राम मंदिर के पास स्थित है एक और बाबरी मस्जिद, अयोध्या में बाबर काल में चार मस्जिदों का हुआ था निर्माण
Ayodhya, Babari Masjid: अयोध्या में आज राम मंदिर का उद्घाटन है। आज मंदिर में रामलला के प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा होनी है। सालों से चले आ रहे विवाद के बाद आखिरकार यहां राम मंदिर बनकर लगभग तैयार है। 1992 में बाबरी मस्जिद के ढहने और सालों तक कोर्ट में केस चलने के बाद फैसला राम मंदिर के पक्ष में आया और विवादित जमीन मंदिर बनाने के लिए दे दी गयी।
हिन्दू पक्ष के लोग सालों से यह दावा कर रहे थे कि जहां बाबरी मस्जिद खड़ा था वहां भगवान राम का जन्म हुआ था और मंदिर को तोड़ कर मुगल शासक बाबर के जनरल मीर बकी ने वहां मस्जिद का निर्माण कराया था। साल 1528 में बनी बाबरी मस्जिद 1992 में ढाह दी गई थी। लेकिन क्या आप जानते हैं कि अयोध्या में तीन और बाबरी मस्जिद हैं। एक तो बिलकुल राम मंदिर के पास में स्थित है।

अयोध्या में बाबर काल की तीन मस्जिदें हूबहू बाबरी मस्जिद की तरह
अयोध्या में बाबर काल की तीन मस्जिदें जो काफी हद तक विवादित बाबरी मस्जिद से मेल खाती हैं, अभी भी शहर में स्थित हैं। इन मस्जिदों में से 'मस्जिद बेगम बालरस' राम मंदिर से कुछ ही दूरी पर स्थित है। जबकि दो और मस्जिदें 'मस्जिद बेगम बलरासपुर' और 'मस्जिद मुमताज शाह' भी अयोध्या में स्थित हैं।
ये तीनों मस्जिदें यूं तो बाबरी मस्जिद से काफी छोटी हैं लेकिन इनकी बनावट विवादित बाबरी मस्जिद से काफी मेल खाती हैं। इन तीनों मस्जिदों में बाबरी मस्जिद की तरह ही तीन गुम्बद हैं और कोई मीनार नहीं है। तीन गुम्बद में एक गुम्बद बड़ा और दो गुम्बद छोटा है। इन सभी मस्जिदों का निर्माण बाबर के काल में होने के कारण इन्हें बाबरी मस्जिद कहते हैं।
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बाबर के काल से मस्जिदों में नहीं होती थी मीनारें
अयोध्या में 16वीं शताब्दी की बनी काफी मस्जिदें पाई जाती हैं। इतिहासकार बताते हैं कि बाबर के काल में निर्मित मस्जिदों में मीनारें नहीं होती थी। इन सभी मस्जिदों में केवल गुम्बद बनाए जाते थे। इस वजह से ये मस्जिदें आपस में काफी मेल खाती हैं।
इन मस्जिदों में गुम्बदों की संख्या एक तीन या पांच होती थी। बाबर काल के किसी भी मस्जिद में दो गुम्बद नहीं पाए जाते हैं। दो गुम्बद वाली मस्जिद दिल्ली सल्तनत की शैली में बनाई गई थी।
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जौनपुर शैली पर हुआ था बाबरी मस्जिद का निर्माण
'बाबरनामा' के मुताबिक बाबर दो बार अयोध्या गया था। हालांकि, किताब में किसी मस्जिद का जिक्र नहीं है। लेकिन फिर भी ये साफ है कि बाबर के दौर में बनाई गई ज्यादातर मस्जिदों का ढांचा एक जैसा ही था।
ढहाई जा चुकी बाबरी मस्जिद की बनावट जौनपुर सल्तनत की शैली पर थी। जौनपुर में मौजूद अटाला मस्जिद पश्चिम से देखने पर बाबरी मस्जिद जैसी ही दिखती है।
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तीन में से एक मस्जिद बची है सही हालत में
अयोध्या में बाबर काल की तीनों बाबरी मस्जिदों में से दो की हालत काफी खस्ता हो चुकी है। केवल मुमताज नगर की मस्जिद ही ठीक हालत में खड़ी है। स्थानीय हिंदू और मुस्लिम परिवारों का कहना है कि मस्जिद मुमताज शाह विवादित बाबरी मस्जिद के दौर की ही है। हालांकि, अयोध्या के आसपास बनी इन तीनों मस्जिदों में से किसी से जुड़ा कोई अभिलेख नहीं मिलता, जिसमें इसमें बनवाने का समय पता चल सके।
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जल्दबाजी में क्यों होता था मस्जिद का निर्माण?
इतिहास के जानकार कहते हैं कि पुराने जमाने में जहां भी फौजें पड़ाव डालती थीं, वहां हजारों लोग कुछ समय के लिए रुकते थे। इबादत के लिए मस्जिदों का निर्माण किया जाता था। अयोध्या से जौनपुर के बीच में कई बाबर काल की कई मस्जिदें मिलती हैं।
इनके अंदर जाने के लिए छोटा दरवाजा होता है और इनके पीछे के हिस्से से कोई भी रास्ता नहीं होता। कहा जाता है कि अयोध्या में बाबर काल की बची हुई तीन मस्जिदों को उसके जनरल मीर बकी ने बहुत जल्दबाजी में बनवाई होंगी।
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