Mohammed Shami Case: चेक बाउंस मामले में शमी को कोर्ट से बड़ी राहत, हसीन जहां ने लगाया था गंभीर आरोप
Mohammed Shami Case: भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी को एक बड़े कानूनी विवाद में बड़ी राहत मिल गई है। कोलकाता की अलीपुर अदालत ने शमी को उनकी अलग रह रही पत्नी हसीन जहां द्वारा दायर किए गए चेक बाउंस (Cheque Bounce) के मामले में पूरी तरह बरी कर दिया है। अदालत ने मामले की गहन सुनवाई के बाद शमी को 1 लाख रुपये के चेक अनादरण के आरोपों से दोषमुक्त करार दिया है।
आखिर क्या था पूरा मामला? (Mohammed Shami Case)
यह कानूनी विवाद साल 2018 में शुरू हुआ था, जब हसीन जहां ने मोहम्मद शमी के खिलाफ कई शिकायतें दर्ज कराई थीं। इसी दौरान उन्होंने अदालत का रुख करते हुए आरोप लगाया था कि शमी ने उन्हें घर के खर्चों के लिए 1 लाख रुपये का एक चेक जारी किया था। जब इस चेक को बैंक में जमा किया गया तो वह बाउंस हो गया। इसके बाद हसीन जहां ने शमी के खिलाफ कानूनी कार्यवाही शुरू की थी, जो पिछले कई सालों से अदालत में लंबित थी।

फैसले के बाद बोले शमी- 'मैंने हमेशा सब कुछ सही किया'
अदालत का फैसला आने के बाद मीडिया से बातचीत में मोहम्मद शमी ने अपनी राहत और खुशी जाहिर की। शमी ने कहा कि मुझे पूरा भरोसा था कि फैसला हमारे पक्ष में ही आएगा क्योंकि मैंने कुछ भी गलत नहीं किया था। मैंने अपनी तरफ से सब कुछ सही किया। मैदान पर हो या मैदान से बाहर, मैं हमेशा हर परिस्थिति को अपनी पूरी क्षमता से संभालने की कोशिश करता हूं। शमी मौजूदा समय में लखनऊ के लिए आईपीएल मैच खेल रहे हैं।
गुजारे भत्ते को लेकर चल रहा विवाद
चेक बाउंस मामले में बरी होने के बावजूद दोनों के बीच गुजारे भत्ते को लेकर चल रहा मुख्य विवाद अभी समाप्त नहीं हुआ है। कलकत्ता उच्च न्यायालय के मौजूदा निर्देश के मुताबिक मोहम्मद शमी अपनी पत्नी हसीन जहां को 1.5 लाख रुपये प्रति माह और अपनी बेटी के पालन-पोषण के लिए 2.5 लाख रुपये प्रति माह दे रहे हैं। दोनों को मिलाकर शमी हर महीने कुल 4 लाख रुपये की राशि दे रहे हैं। हालांकि, हसीन जहां ने इस राशि को घरेलू खर्चों के लिए नाकाफी बताते हुए देश की सर्वोच्च अदालत का दरवाजा भी खटखटाया था।
चार साल से अधिक समय तक चले इस चेक बाउंस मामले में आया यह फैसला मोहम्मद शमी के लिए एक बड़ी मानसिक राहत है। खेल के मैदान पर लगातार देश का प्रतिनिधित्व करने वाले खिलाड़ी के लिए ऐसे कानूनी विवाद ध्यान भटकाने वाले होते हैं। अलीपुर अदालत के इस फैसले से शमी पर से एक बड़ा कानूनी बोझ कम हुआ है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट में लंबित भरण-पोषण का मामला अभी भी दोनों पक्षों के बीच भविष्य के वित्तीय समीकरण तय करेगा, लेकिन चेक बाउंस के आपराधिक आरोपों से बरी होना शमी के पक्ष को मजबूत करता है।















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