'सपनों को पंख देगा यह कानून', पास हुआ राष्ट्रीय खेल शासन विधेयक,क्या है यह बिल जिस पर 'उड़न परी' ने जताई खुशी?
PT Usha Backs National Sports Governance Bill: भारतीय खेलों के इतिहास में मंगलवार का दिन एक नए अध्याय के रूप में दर्ज हो सकता है। दशकों तक खिलाड़ियों और खेल प्रशासकों के बीच चली आ रही खामोश जंग, संसाधनों की कमी और पारदर्शिता की मांग को अब एक नए कानून के जरिए दूर करने की कोशिश शुरू हो रही है। भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) की अध्यक्ष और दिग्गज एथलीट पीटी उषा ने राज्यसभा में राष्ट्रीय खेल शासन विधेयक (National Sports Governance Bill) का खुलकर समर्थन किया।
कभी इस बिल का विरोध करने वाली उषा ने अब इसे "खेलों में पारदर्शिता, जवाबदेही और बदलाव की कुंजी" करार दिया। उन्होंने अपने खेल जीवन के संघर्ष और 1984 ओलंपिक की यादों का ज़िक्र करते हुए कहा कि यह कानून खिलाड़ियों के सपनों को पंख देने वाला साबित होगा। उन्होंने कहा कि यह कानून दशकों से चले आ रहे "जमे हुए हालात" को खत्म कर खेल प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही लाएगा।

राज्यसभा में रखी भावनाएं
लोकसभा से सोमवार को पारित इस विधेयक पर चर्चा के दौरान उषा ने इसके प्रावधानों की सराहना की। इसमें राष्ट्रीय खेल बोर्ड (NSB) का गठन शामिल है, जिसे राष्ट्रीय खेल महासंघों (NSFs) को मान्यता देने का अधिकार होगा। केंद्र से वित्तीय सहायता पाने के लिए महासंघों को NSB से जुड़ना अनिवार्य होगा।
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खेल विवादों के लिए ट्रिब्यूनल का प्रस्ताव
विधेयक में खेल विवादों के निपटारे के लिए राष्ट्रीय खेल ट्रिब्यूनल और महासंघों के चुनाव कराने के लिए राष्ट्रीय खेल चुनाव पैनल बनाने का भी प्रस्ताव है। उषा ने कहा, "आज का दिन मेरे लिए व्यक्तिगत और राष्ट्रीय स्तर पर बेहद महत्वपूर्ण है। मैंने इस पल का लंबे समय से इंतजार किया था।"
पहले किया था विरोध, अब बदला रुख
पिछले साल उषा ने इस विधेयक का विरोध किया था और कहा था कि यह सरकारी हस्तक्षेप है, जिससे अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति भारत पर प्रतिबंध लगा सकती है। लेकिन खेल मंत्री मनसुख मांडविया से विस्तृत चर्चा के बाद उन्होंने अपना रुख बदल लिया।
1984 की याद और बदलते हालात
उषा ने कहा, "1984 में लॉस एंजिल्स ओलंपिक में मैं 20 साल की थी और पदक से चूक गई थी। उस समय हमारे सपनों को सहारा देने वाला कोई मजबूत खेल कानून नहीं था। चार दशक बीत गए, लेकिन कोई बदलाव नहीं हुआ। आज उम्मीद हकीकत बन रही है।"
महिला खिलाड़ियों और प्रायोजकों के लिए भरोसा
उन्होंने कहा कि यह विधेयक पारदर्शिता, जवाबदेही और लैंगिक समानता को बढ़ावा देगा। इससे खिलाड़ियों को ताकत मिलेगी और प्रायोजकों व महासंघों में विश्वास बढ़ेगा।
2036 ओलंपिक की तैयारी में मददगार
उषा ने जोर देकर कहा कि यह कानून भारत के 2036 ओलंपिक की मेजबानी के सपने के लिए अहम है। उन्होंने इसे केवल एक विधेयक नहीं, बल्कि 'कार्रवाई का आह्वान' बताया।
डोपिंग विरोधी कानून का भी समर्थन
उषा ने राष्ट्रीय डोपिंग विरोधी (संशोधन) विधेयक का भी समर्थन किया, जिसमें राष्ट्रीय डोपिंग एजेंसी की स्वतंत्रता बनाए रखते हुए राष्ट्रीय डोपिंग बोर्ड बनाने का प्रावधान है। उन्होंने कहा, "ऐसे कानून ही खेलों में स्वच्छ और निष्पक्ष माहौल तैयार करेंगे।"
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