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Sagar : बीएमसी में नर्सिंग हड़ताल, 6 घंटे वार्डों में न दवा मिली, न बोतल चढ़ी, बिगड़े हालात

सागर के बीएमसी का ​नर्सिंग स्टाफ काम के बोझ तले दबा हुआ है। एक—एक स्टाफ पर 60 से अधिक मरीजों का लोड है। नर्सिंग स्टाफ के सदस्यों से बाबूगिरी तक का काम कराया जा रहा है। प्रबंधन खाली पदों पर भर्ती नहीं कर रहा है।

बीएमसी में हड़ताल

Madhya Pradesh के बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में गुरुवार को नर्सिंग स्टाफ की सामूहिक हड़ताल से अस्पताल के हालात बिगड़ गए। ड्यूटी पर पहुंचा और नाइड ट्यूटी कर वापस लौटने वाला नर्सिंग स्टाफ काम बंद कर अस्पताल के बाहर आकर धरना देने लगा। स्टाफ की हड़ताल के कारण अस्पताल के वार्डों में व्यवस्थाएं गड़बड़ा गईं और मरीज परेशान हो गए। इधर कैजुअल्टी में भी इमरजेंसी सेवाएं ठप हो गई थीं। बता दें कि खाली पड़े पदों पर नई भर्ती करने, नर्सिंग स्टाफ को बाबूगिरी के काम से वापस भेजने की मांग को लेकर यह हड़ताल की गई थी।

नर्सिंग स्टाफ की हड़ताल

जानकारी अनुसार सुबह आठ बजे बीएमसी अस्पताल में शिफ्ट बदलने के समय पूरा नर्सिंग स्टाफ ड्यूटी छोड़कर अस्पताल के बाहर आकर हड़ताल पर बैठ गया। स्टाफ ने बीएमसी प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए आक्रोश जताया। स्टाफ का कहना है कि बीएमसी प्रबंधन और शासन कॉलेज में पदस्थ नर्सिंग स्टाफ के साथ उपेक्षित रवैया अपनाए हुए है। पद खाली पड़े हैं, लेकिन इनको भरा नहीं जा रहा है। इधर हड़ताल की जानकारी बीएमसी प्रबंधन को पहले से थी, लेकिन वैकल्पिक रूप से कोई खास इंतजाम बीएमसी प्रबंधन कर नहीं पाया और अस्पताल में महज एक घंटे में ही हालात बिगड़ गए। अस्पताल में मरीजों को इलाज के अभाव में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा तो वार्डों में न कोई दवा देने वाला था, न कोई इंजेक्शन लगाने वाला। मरीज वाड़ों में दर्द से तड़पते लावारिस हालत में पड़े रहे।

नर्सिंग स्टाफ की हड़ताल

एक-एक स्टाफ के भरोसे 60-60 मरीजों का भार है
नर्सिंग इंजार्च राजीव गुप्ता ने बताया कि मेडिकल कॉलेज में स्वीकृत पदों में से आधे पद खाली पड़े हैं। बीते 6 सालों से बीएमसी प्रबंधन इनपर भर्ती नहीं कर रहा है। एक भर्ती प्रक्रिया पर स्टे का हवाला देकर पूरी भर्ती प्रक्रिया को रोक दिया है। कोई में स्टे हटवाने के लिए भी बीएमसी प्रबंधन अपनी तरफ से कोई पहल नहीं करता है। इधर नर्सिंग स्टाफ में से कईयों को दवा काउंटर, पंजीयन काउंटर से लेकर डीन कार्यालय तक क्लेरीकल के काम में लगाया गया है, जबकि इसके लिए बीएमसी के पास पर्याप्त स्टाफ है। बार-बार मांग करने के बावजूद हमारी कोई सुनवाई नहीं हो रही। अस्पताल में नर्सिंग स्टाफ पर बोझ डाला जा रहा है। एक-एक पर 60 मरीजों का भार रहता है।

कोर्ट में स्टे हटवाने कानूनी प्रक्रिया अपना रहे हैं
बीएमसी प्रबंधन ने हड़ताल पर गए ​नर्सिंग स्टाफ से चर्चा की और उनको नर्सिंग की नई भर्ती का आश्वासन दिया गया है। इस दौरान कोर्ट से लगी रोक व स्टे को हटवाने के लिए कोर्ट में लीगल प्रक्रिया अपना रहे हैं। यह सही है कि अस्पताल में हड़ताल से कुछ समय के व्यवस्था गड़बड़ा गई थी। वैसे हमने वैकल्पिक व्यवस्था की थी।
- डॉ. आरएस वर्मा, डीन, बीएमसी सागर

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