पंजाब: भगवंत मान को CM उम्मीदवार बनाने से AAP को हुआ फ़ायदा, जानिए कैसे पलटी बाज़ी ?

पंजाब में आम आदमी पार्टी ने प्रचंड बहुमत से जीत दर्ज की है, अब कई तरह की चर्चाएं और मंथन का दौर जारी है।

चंडीगढ़, 11 मार्च 2022। पंजाब में आम आदमी पार्टी ने प्रचंड बहुमत से जीत दर्ज की है, अब कई तरह की चर्चाएं और मंथन का दौर जारी है कि किस वजह से पंजाब में विपक्षी दलों की हार हुई और आम आदमी पार्टी की ऐतिहासिक जीत दर्ज करने में विनिंग फ़ैक्टर कौन साबित हुए। पंजाब में भगवंत मान को आम आदमी पार्टी का मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बनाना आप के लिए संजीवनी का काम कर गया। क्योंकि पिछली बार के विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी ने सीएम उम्मीदवार की घोषणा नहीं की थी और पार्टी अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाई थी। पिछले चुनाव में आम आदमी पार्टी की हार की सबसे बड़ी वजह यही बताई जा रही थी।

मान को सीएम उम्मीदवार बनाने का फ़ैसला सही

मान को सीएम उम्मीदवार बनाने का फ़ैसला सही

पंजाब में चुनाव के दौरान पार्टी के नेता औ कार्यकर्ता इस बात पर ज़ोर दे रहे थे कि सीएम उम्मीदवार की घोषणा करने के बाद ही चुनावी रण में उतरे। पिछले बार के चुनाव में पार्टी ने सीएम उम्मीदवार की घोषणा नहीं की थी तो हार गई थी। क्योंकि जनता के बीच में यह भ्रम फैला दिया गया था कि अगर आम आदमी पार्टी जीतेगी तो बाहर के लोगों को सीएम बना दिया जाएगा। इस भ्रम की वजह से ही जनता ने पिछली बार आम आदमी पार्टी पर भरोसा नहीं जताया था। इस बार आम आदमी पार्टी ने भगवंत मान को सीएम उम्मीदवार बनाने का सही फ़ैसला लिया इसलिए जनता ने पार्टी पर भरोसा भी जताया है। आम आदमी पार्टी के नेता और कार्यकर्ताओं का कहना है कि इस बार पार्टी ने अपना मुख्यमंत्री उम्मीदवार भगवंत मान को घोषित किया जिससे पंजाब की जनता का रुख साफ़ हो गया की अगर आम आदमी पार्टी जीतेगी तो प्रदेश में अपने ही राज्य का मुख्यमंत्री बनेगा।

'जनता ने पहले ही भगवंत को मान लिया थी CM'

'जनता ने पहले ही भगवंत को मान लिया थी CM'

पंजाब की जनता ने अरविंद केजरीवाल के दिल्ली मॉडल को ध्यान में रखते हुए भगवंत मान को सीएम मान लिया था। जिसका परिणाम चुनावी नतीजों में साफ़ देखने को मिला है। उनका कहना है कि चुनाव से पहले पंजाब में आम आदमी पार्टी के सीएम उम्मीदवार की घोषणा नहीं होने की वजह से गुटबाज़ी भी शुरू हो गई थी। पार्टी के नेता दूसरे दलों का दामन थामने लग गए थे। जिस वजह से पार्टी कमज़ोर होने लगी थी। ठीक इसी तरह के हालात 2017 के विधानसभा चुनाव में भी पैदा हो गए थे, पार्टी ने सीएम उम्मीदवार की घोषणा नही की थी। दूसरे दलों से कई नेता ने आप की सदस्यता ले ली थी ताकि पार्टी उन्हें सीएम उम्मीदवार घोषित कर दे। इस वजह से 2017 में पार्टी हार गई थी। पंजाब में इस बार के विधानसभा चुनाव में पार्टी आलाकमान ने अपने नेताओं और कार्यकर्ताओं के सुझाव को ध्यान में रखते हुए सीएम उम्मीदवार की घोषणा की।

आम आदमी पार्टी को मिले सभी समुदायों के वोट

आम आदमी पार्टी को मिले सभी समुदायों के वोट

भगवंत मान के सीएम उम्मीदवार की घोषणा होने के बाद से ही पंजाब में सियासी समीकरण बदलने लगे थे। हालांकि विपक्षी दलों ने भगवंत मान के सीएम उम्मीदवार की घोषणा होने के बाद से ही आप पर निशाना साधना शुरू कर दिया था। सियासी जानकारों की मानें तो भगवंत मान के मुख्यमंत्री उम्मीदवार की घोषणा होने के बाद आप के सत्ता में आने से पंजाब का सीएम कौन होगा यह साफ़ हो चुका था। इसके बाद अब लोगों का झुकाव केजरीवाल मॉडल की तरफ़ होने लगा था। भगवंत मान को सीएम प्रोजेक्ट करने से आम आदमी पार्टी को काफि फायदा हुआ। पंजाब के सभी वर्गों के लोगों ने आम आदमी पार्टी को वोट किया ये चुनावी नतीजों में भी देखने को मिला है। वहीं भगवंत मान का यह स्लोगन एक मौक़ आप को भी जनता के दिलों में घर कर गया और आम आदमी पार्टी ने प्रचंड बहुमत से जीत दर्ज की।

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