बिहार में एनडीए के पास 127 विधायक, फिर भी गठबंधन को सता रहा कुर्सी जाने का डर
बिहार में सियासी समीकरण बदलने के बाद अब विपक्ष में भी सत्ता पाने की आस जगी है। आरजेडी अब रणनीति तैयार करने में जुट गई है, कि किसी तरह से भी सत्ता पक्ष को अल्पमत में लाकर सरकार बनाने का दावा ठोक सके।
पटना, 24 मार्च 2022। बिहार में सियासी समीकरण बदलने के बाद अब विपक्ष में भी सत्ता पाने की आस जगी है। आरजेडी अब रणनीति तैयार करने में जुट गई है, कि किसी तरह से भी सत्ता पक्ष को अल्पमत में लाकर सरकार बनाने का दावा ठोक सके। यही वजह है कि बिहार में एनडीए गठबंधन किसी भी तरह का रिस्क नहीं लेना चाह रही है। कुर्सी ख़तरे में न पड़ जाए इसलिए भाजपा ने मास्टर स्ट्रोक खेलते हुए वीआईपी के विधायक राजू सिंह, स्वर्णा सिंह और मिश्री लाल यादव को पार्टी में शामिल करवा लिया है। अब एनडीए के पास 127 विधायकों का समर्थन है, इसके बाद भी कुर्सी जाने का डर सता रहा है।

सत्ता पर क़ाबिज होने के लिए 122 सीटों की ज़रूरत
बिहार में कुल 243 विधानसभा सीटें हैं, इनमें 242 सीटों पर सदस्य हैं लेकिन एक सीट अभी खाली है। क्योंकि विकासशील इंसान पार्टी के एक विधायक मुसाफिर पासवान के निधन के बाद बोंचहा विधानसभा सीट खाली हो गई थी। अब इस सीट पर उपचुनाव होने वाले हैं। बिहार में सत्ता पर क़ाबिज़ होने के लिए 122 सीटों की ज़रूरत होती है, जिसमें एनडीए गठबंधन के पास 127 विधायकों का समर्थन है। विपक्ष के पास 115 विधायक हैं, सत्ता पाने के लिए सिर्फ़ 7 विधायकों का ही समर्थन चाहिए।

जोड़-तोड़ की रणनीति तैयार करने में जुटा विपक्ष
सूत्रों की मानें तो विपक्ष ओवौसी की पार्टी के पांच विधायक, हिन्दुस्तान अवाम मोर्चा के एक विधायक (जीतनराम मांझी) और एक निर्दलीय विधायक से समर्थन देने के लिए लगातार संपर्क साध रहे हैं। इसके साथ ही सत्ता पक्ष के कुछ विधायकों से इस्तीफ़ा दिलावकर यह सदस्यता रद्द करवाकर अल्पमत में लाने की रणनीति तैयार करने में जुट गई है। बिहार में आंकड़ों की बाज़ी ज़रा सी भी पलटी तो सत्ता परिवर्तन हो सकता है। वीआईपी के तीनों विधायकों का विलय करवाने के बाद भी एनडीए की कुर्सी ख़तरे में नजर आ रही है। मुकेश सहनी भी अपने अपमान का बदला लेने के लिए हर मुमकिन कोशिश कर रहे हैं कि बिहार में एनडीए सत्ता से बाहर हो जाए।

बिहार में बन सकती है महागठबंधन की सरकार
बिहार में बदले सियासी समीकरण को देखते हुए सियासी जानकारों का मान्ना है कि विधानसभा भंग हो सकती है। क्योंकि नीतीश कुमार पर जब भाजपा नेता लखीसराय और बेगूसराय वाले मामले पर हमलावर थे तो मुकेश सहनी उनके साथ क़दम से क़दम मिलाकर खड़े हुए थे। अब मौजूदा हालात में नीतीश कुमार भी भाजपा से नाराज़ चल रहे हैं। ऐसे में मुमकिन है कि नीतीश कुमार विपक्ष को बाहर से समर्थन दे दें। अगर ऐसा हुआ तो कुछ विधायक इस्तीफ़ा दें सकते हैं जिससे सत्ता पक्ष के अल्पमत में आते ही विधानसभा भंग हो जाएगी । इसके साथ ही अगर विपक्ष ने सात विधायकों का समर्थन हासिल कर लिया तो बिहार में महागठबंधन की सरकार बन जाएगी।
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