PM Modi के 12 साल: क्या कमाल-क्या मलाल? कितनी तरक्की-कितना बदलाव? हाथ में 22 राज्यों की कमान!
PM Narendra Modi 12 Years Journey: गुजरात के वडनगर की साधारण गलियों से निकलकर देश की सबसे ऊंची जिम्मेदारी तक पहुंचने वाले नरेंद्र मोदी ने 10 जून 2026 को एक नया इतिहास रच दिया। लगातार 4,399 दिनों तक प्रधानमंत्री पद पर रहते हुए उन्होंने भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के 4,398 दिनों के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया और सबसे लंबे समय तक लगातार सेवा देने वाले प्रधानमंत्री बन गए।
साल 2014 में जब नरेंद्र मोदी पहली बार केंद्र की सत्ता में आए थे, तब उन्होंने विकास, सुशासन और बदलाव का वादा किया था। इसके बाद के 12 वर्षों में देश ने कई बड़े फैसले, नई योजनाएं, वैश्विक मंच पर बढ़ती साख और तकनीक आधारित बदलाव देखे। वहीं दूसरी तरफ बेरोजगारी, महंगाई, कृषि संकट और सामाजिक-राजनीतिक बहसों जैसे मुद्दे भी लगातार चर्चा में रहे। इसलिए मोदी सरकार का यह 12 साल का सफर सिर्फ उपलब्धियों की सूची नहीं, बल्कि सफलताओं और चुनौतियों का मिला-जुला अध्याय भी है।

वर्तमान में NDA के पास आज 20 राज्यों और 2 केंद्रशासित प्रदेशों में सत्ता है। BJP के 240 लोकसभा सांसद, 113 राज्यसभा सांसद और 1,810 विधायक हैं। ऐसे में 2014 से 2026 तक के इस लंबे दौर को समझना जरूरी हो जाता है। आखिर इन 12 वर्षों में देश कितना बदला, कितनी तरक्की हुई, क्या कमाल हुआ और किन मुद्दों पर सवाल अब भी कायम हैं? आइए विस्तार से जानते हैं...
PM मोदी के 12 साल: 10 बड़े कमाल (उपलब्धियां)
- 1. तीन तलाक पर रोक: 2019 में मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) कानून लाकर तत्काल तीन तलाक को अपराध घोषित किया गया। मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों में ऐतिहासिक कदम माना गया।
- 2. अनुच्छेद 370 का समाप्त होना: जम्मू-कश्मीर से विशेष दर्जा हटाकर पूरे देश में समान संवैधानिक व्यवस्था लागू की। केंद्रशासित प्रदेश के रूप में पुनर्गठन किया गया।
- 3. राम मंदिर का निर्माण और प्राण प्रतिष्ठा: दशकों पुराने विवाद का समाधान। 2024 में अयोध्या में राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा हुई। लाखों श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र बना।
- 4. आतंकवाद पर आक्रामक नीति: उरी (2016) के बाद सर्जिकल स्ट्राइक और पुलवामा (2019) के बाद बालाकोट एयर स्ट्राइक। 2025 में पहलगाम हमले के बाद 'ऑपरेशन सिंदूर' में पाकिस्तान स्थित ठिकानों पर कार्रवाई। जीरो टॉलरेंस की नीति का प्रदर्शन।

- 5. डिजिटल इंडिया और UPI क्रांति: भारत दुनिया का सबसे बड़ा डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम बन गया। UPI रियल टाइम ट्रांजेक्शन में ग्लोबल लीडर। स्टार्टअप्स 350 से बढ़कर 2,34,090 हो गए।
- 6. गरीब कल्याण योजनाओं का विस्तार: जनधन अकाउंट, उज्ज्वला गैस कनेक्शन, आयुष्मान भारत स्वास्थ्य बीमा, पीएम आवास योजना, मुफ्त राशन - करोड़ों गरीब परिवारों तक पहुंच।
- 7. इंफ्रास्ट्रक्चर बूम: एयरपोर्ट 74 से 164, राष्ट्रीय राजमार्ग 91,287 किमी से 1,46,572 किमी, मेट्रो नेटवर्क 248 किमी से 1,095 किमी। वंदे भारत ट्रेनें, एक्सप्रेसवे, नए एयरपोर्ट - कनेक्टिविटी में क्रांति।
- 8. शिक्षा और स्वास्थ्य में विस्तार: MBBS सीटें 51,348 से 1.28 लाख, AIIMS 7 से 23, IIT 11 से 23, IIM 13 से 21।
- 9. G20 की मेजबानी और वैश्विक कूटनीति: नई दिल्ली G20 समिट ने भारत को विश्व पटल पर नई पहचान दी।
- 10. रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता: घरेलू रक्षा उत्पादन ₹46,429 करोड़ (2014-15) से ₹1,50,590 करोड़ (2024-25), रक्षा निर्यात ₹686 करोड़ से ₹38,424 करोड़, रक्षा बजट ₹2.53 लाख करोड़ से ₹7.85 लाख करोड़। चंद्रयान-3 जैसे मिशन।

- 2018: ₹70+
- 2022: ₹80+
- 2024: ₹83-84
- 2026: ₹85-86 के आसपास
- Uttar Pradesh : योगी आदित्यनाथ
- Maharashtra : देवेंद्र फडणवीस
- Madhya Pradesh : मोहन यादव
- Gujarat : भूपेंद्र पटेल
- Rajasthan : भजनलाल शर्मा
- Chhattisgarh : विष्णुदेव साय
- Odisha : मोहन चरण माझी
- Assam : हिमंत बिस्वा सरमा
- Arunachal Pradesh : पेमा खांडू
- Goa : प्रमोद सावंत
- Haryana : नायब सिंह सैनी
- Bihar : सम्राट चौधरी (NDA सरकार)
- Sikkim : प्रेम सिंह तमांग (NDA सहयोगी)
- Meghalaya : कॉनराड संगमा (NDA सहयोगी)
- Nagaland : नेफियू रियो (NDA सहयोगी)
- Andhra Pradesh : एन. चंद्रबाबू नायडू
- West Bengal : सुवेंदु अधिकारी (2026 चुनाव के बाद NDA)
- Tripura : माणिक साहा
- Manipur : राष्ट्रपति शासन के बावजूद NDA प्रभाव क्षेत्र
- Mizoram : NDA समर्थक समीकरणों के साथ
- दिल्ली (रेखा गुप्ता),
- पुदुचेरी (एन. रंगासामी)।
- लोकसभा: 240 सांसद
- राज्यसभा: 113 सांसद
- विधायक: 1,810
PM मोदी सरकार के 11 बड़े मलाल, 12 साल में क्या अधूरा रहा?
1. संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 का फेल होना
मोदी सरकार 2023 के महिला आरक्षण कानून (106वां संशोधन) को 2029 लोकसभा चुनाव से पहले लागू करने के लिए उत्सुक थी। इसके लिए 2011 जनगणना के आधार पर परिसीमन और लोकसभा-विधानसभा सीटों के विस्तार का प्रस्ताव लाया गया।
संविधान संशोधन के लिए जरूरी दो-तिहाई बहुमत लोकसभा में जुट नहीं सका। विधेयक गिर गया। इससे जुड़े परिसीमन विधेयक और केंद्र शासित प्रदेशों से संबंधित कानून भी अटक गए। यह मोदी सरकार की 12 साल की सबसे बड़ी संसदीय हार मानी जा रही है। विपक्ष ने इसे 'दक्षिणी राज्यों के साथ अन्याय' बताया, जबकि सरकार इसे 'राष्ट्रीय हित का मुद्दा' मानती रही।
2. परिसीमन (Delimitation) विधेयक, 2026
सरकार लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर लगभग 850 करने की दिशा में थी। दक्षिणी राज्यों (जिनकी जनसंख्या वृद्धि दर कम है) और विपक्ष का तीखा विरोध रहा। 131वें संशोधन के फेल होने के साथ यह विधेयक भी प्रभावी रूप से रुक गया।
परिसीमन न हो पाने से जनसंख्या के हिसाब से उत्तरी राज्यों का प्रतिनिधित्व बढ़ाने का मौका चूक गया। यह लंबे समय से लंबित सुधार अब आगे बढ़ने की राह पर अटका हुआ है।
3. वन नेशन, वन इलेक्शन (One Nation, One Election)
मोदी सरकार इसे अपने प्रमुख सुधार एजेंडे में शामिल करती रही। एक साथ लोकसभा और विधानसभा चुनाव कराने के लिए संविधान संशोधन व कई कानूनों में बदलाव जरूरी थे।
हालांकि, अब तक संसद से अंतिम स्वीकृति नहीं मिल सकी है। प्रधानमंत्री मोदी ने खुद इसे भाजपा के 'अधूरे एजेंडे' में गिना है। इससे चुनावी खर्च, मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट की बार-बार लगने वाली बाधा और विकास कार्यों में रुकावट कम करने का लक्ष्य अधूरा रह गया।
4. यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) का राष्ट्रीय स्तर पर लागू न होना
भाजपा के मूल वैचारिक एजेंडे का हिस्सा। उत्तराखंड जैसे कुछ राज्यों में राज्य स्तर पर UCC लागू किया गया, लेकिन पूरे देश के लिए राष्ट्रीय कानून अभी तक संसद से पारित नहीं हो सका। 2026 में भी पीएम मोदी ने इसे 'unfinished agenda' बताया। व्यक्तिगत कानूनों में एकरूपता लाकर लैंगिक समानता और राष्ट्रीय एकता मजबूत करने का वादा अधूरा माना जा रहा है।
5. महिला आरक्षण की वास्तविक से दूरी
2023 में नारी शक्ति वंदन अधिनियम पारित हो गया था, लेकिन कानून में स्पष्ट प्रावधान है कि आरक्षण अगली जनगणना और परिसीमन के बाद ही लागू होगा। परिणामस्वरूप कानून पारित होने के बावजूद महिला आरक्षण अभी जमीन पर नहीं उतरा है। लाखों महिलाओं को लोकसभा और विधानसभाओं में 33% आरक्षण का इंतजार है। यह सरकार के महिला सशक्तिकरण एजेंडे का सबसे बड़ा अधूरा काम माना जाता है।
6. लोकसभा और विधानसभा सीटों के बड़े विस्तार का प्रस्ताव
2026 के परिसीमन पैकेज में लोकसभा सीटें 550 से बढ़ाकर 850 तक करने का विचार शामिल था। संविधान संशोधन के साथ यह प्रस्ताव भी विफल हो गया।
इससे लोकतंत्र में जनसंख्या के अनुपात में प्रतिनिधित्व बढ़ाने का अवसर टल गया। विपक्ष इसे 'उत्तर भारत के पक्ष में पक्षपात' बता रहा है, जबकि सरकार इसे राष्ट्रीय समायोजन का मुद्दा मानती है।
7. रुपया vs डॉलर: मुद्रा की कमजोरी
2014 चुनाव से पहले नरेंद्र मोदी ने यूपीए शासन पर हमला करते हुए कहा था कि रुपया 'आईसीयू में' है। उस समय 1 डॉलर ≈ ₹58-60 था।
मोदी सरकार के 12 साल में रुपया लगातार कमजोर हुआ:
रुपये के कमजोर होने से कच्चा तेल, उर्वरक, इलेक्ट्रॉनिक्स आयात महंगे पड़े, चालू खाता घाटे पर दबाव बढ़ा।
सरकार और RBI का बचाव: यह केवल भारत की समस्या नहीं, वैश्विक है। फेड रेट बढ़ोतरी, कोविड, रूस-यूक्रेन युद्ध और महंगाई का असर सभी उभरती मुद्राओं पर पड़ा। भारतीय मुद्रा को अत्यधिक उतार-चढ़ाव से बचाने में सफल रहा। सरकार ने रुपये में व्यापार, UPI निर्यात और स्थानीय मुद्रा सेटलमेंट को बढ़ावा दिया, लेकिन डॉलर का दबदबा अभी कायम है।
8. पुलवामा (2019) और पहलगाम (2025) आतंकी हमले
मोदी सरकार ने आतंकवाद पर 'जीरो टॉलरेंस' और सर्जिकल-एयर स्ट्राइक जैसी आक्रामक नीति को अपनी सबसे बड़ी उपलब्धि बताया। फिर भी पुलवामा में 40 CRPF जवानों की शहादत और पहलगाम में 21 पर्यटकों पर हमला सुरक्षा तंत्र पर सवाल खड़े करते हैं।
जवाबी कार्रवाइयां (बालाकोट, ऑपरेशन सिंदूर) हुईं, लेकिन हमलों को पहले रोकने में खुफिया और सुरक्षा तैयारियों पर मलाल रहा। जम्मू-कश्मीर में पर्यटन बढ़ने के दावों के बावजूद आतंकियों द्वारा चुनौती देना सरकार के लिए असहज रहा।
9. मणिपुर हिंसा को जल्दी नियंत्रित न कर पाना
मई 2023 में शुरू हुई मैतेई-कुकी हिंसा दो साल से ज्यादा चली। केंद्र ने सुरक्षा बल भेजे, राष्ट्रपति शासन लगाया, लेकिन पूरी शांति नहीं लौट सकी।
प्रधानमंत्री का हिंसा प्रभावित क्षेत्र में 28 महीने बाद (सितंबर 2025) पहुंचना विपक्ष की सबसे बड़ी आलोचना बनी। 2024 लोकसभा चुनाव में भाजपा दोनों सीटें हार गई। सैकड़ों मौतें, हजारों विस्थापित और समुदायों के बीच गहरी खाई राष्ट्रीय एकता के नैरेटिव पर सवाल खड़े करती रही। यह पूर्वोत्तर में 'मजबूत प्रशासन' की छवि के लिए बड़ा मलाल रहा।
10. पंजाब और तमिलनाडु में BJP का सत्ता से बाहर रहना
पंजाब में 12 साल से एनडीए और बीजेपी दोनों अपनी सरकार बनाने में विफल रहे। 2022 में पंजाब में किसान आंदोलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी की सुरक्षा में चूक (फिरोजपुर घटना) एक बड़ा राजनीतिक और सुरक्षा मलाल बना। रैली रद्द हुई, गृह मंत्रालय को बयान जारी करना पड़ा। उधर, तमिलनाडु में भी भाजपा सत्ता हासिल नहीं कर सकी। इन राज्यों में पार्टी की जड़ें मजबूत न हो पाना और क्षेत्रीय दलों का दबदबा बरकरार रहना राष्ट्रीय विस्तार के एजेंडे में कमी मानी जा रही है।
11. नोटबंदी: बैकफायर माना गया फैसला
2016 में काला धन और फर्जी नोटों पर लगाम लगाने के लिए नोटबंदी की गई। 2000 रुपये का नया नोट लाया गया, लेकिन बाद में जमाखोरी और अन्य कारणों से इसे वापस लेना पड़ा।
2026 तक 2000 रुपये का नोट बाजार से लगभग गायब है। आलोचक इसे 'बैकफायर' कहते हैं। हालांकि, सरकार का तर्क है कि डिजिटल ट्रांजेक्शन बढ़े, कर आधार चौड़ा हुआ, लेकिन आम जनता को हुई परेशानी और आर्थिक नुकसान एक लंबा मलाल रहा।
12 साल का राजनीतिक विस्तार: 22 राज्यों-केंद्रशासित प्रदेशों में कमान
NDA आज भारत के बड़े हिस्से पर शासन कर रहा है। 20 राज्य और 2 केंद्रशासित प्रदेश:
NDA शासित राज्य (20):

केंद्रशासित प्रदेश (2):
2014 बनाम 2026: कितनी तरक्की और बदलाव?


आर्थिक स्थिति
भारत 'फ्रेजाइल फाइव' से निकलकर दुनिया की तेज बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल। 2025-26 में 7.7% विकास दर। चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था।
BJP की ताकत (2026) में कितना इजाफा?

12 साल की कहानी सिर्फ आंकड़ों की नहीं, बल्कि एक राष्ट्र की मानसिकता बदलने की है 'चरैवेति-चरैवेति' की। जहां कमाल हैं, वहां मलाल भी हैं। तरक्की तो हुई है, लेकिन चुनौतियां बाकी हैं। 2026 के बाद का भारत कैसा होगा, यह निर्भर करेगा कि अधूरे एजेंडे पूरे होते हैं या नहीं, और जनता का विश्वास कायम रहता है या नहीं। एनडीए का 12 साल का सफर विकास, सुधार, चुनौतियों और निरंतरता की मिसाल है। देश अब अगले पड़ाव की तैयारी में है, विकसित भारत 2047 की ओर।
(नोट- आंकड़े मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक)













Click it and Unblock the Notifications