बिहार: VIP के बाद अब कांग्रेस के विधायकों पर BJP की नज़र, INC की निगरानी में सभी नेता

बिहार में सियासी घमासान जारी है, सत्ता धारी पार्टी अपनी कुर्सी बचाये रखना चाहती है तो वहीं विपक्ष सत्ता हासिल करने के लिए रणनीति तैयार कर रहा है।

पटना, 29 मार्च 20022। बिहार में सियासी घमासान जारी है, सत्ता धारी पार्टी अपनी कुर्सी बचाये रखना चाहती है तो वहीं विपक्ष सत्ता हासिल करने के लिए रणनीति तैयार कर रहा है। भाजपा और वीआईपी सुप्रीमो मुकेश सहनी के विवाद के बाद ये चर्चा तेज़ हो गई थी कि बिहार में सत्ता परिवर्तन होने वाला है। हालांकि भाजपा ने मास्टर स्ट्रोक खेलते हुए सहनी के तीनों विधायकों को ही अपनी पार्टी में शामिल करवा लिया। जिसके बाद से सत्ता परिवर्तन का शोर थम गया था। लेकिन इसके बाद फिर एक चर्चा ने सुर्खियों में है कि एनडीए को अल्पमत में लाकर विधानसभा भंग करवाकर आरजेडी सरकार बनाने का दावा पेश कर सकती है।

सियासी रणनीति तैयार करने में जुटी भाजपा

सियासी रणनीति तैयार करने में जुटी भाजपा

बिहार के सियासी गलियारों में यह चर्चा तेज़ होने के साथ ही भाजपा सियासी रणनीति तैयार करने में जुट गई है। सूत्रों की मानें तो बिहार में कांग्रेस के 19 विधायकों में से 14 विधायक भाजपा के संपर्क में है और वह जल्द ही भाजपा में शामिल हो सकते हैं। हालांकि ये चर्चा पहले भी हुई थी भाजपा विधायक हरिभूषण ठाकुर सार्वजनिक तौर पर कांग्रेस विधायकों के भाजपा से सम्पर्क होने की बात कह चुके हैं लेकिन इस बाबत कांग्रेस विधायक दल के नेता अजित शर्मा ने इसे अफवाह क़रार देते हुए बेतुकी बयानबाज़ी बताया था। उन्होंने कहा था कि सुर्खियों में रहने के लिए भाजपा नेता इस तरह की बयानबाज़ी कर रहे है। कांग्रेस के सभी विधायक एकजुट हैं। कांग्रेस का कोई भी विधायक पार्टी छोड़कर अन्य दल में शामिल नहीं होने जा रहा है।

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    पार्टी आलाकमान की निगरानी में सभी विधायक

    पार्टी आलाकमान की निगरानी में सभी विधायक

    कांग्रेस के सूत्रों की मानें तो पार्टी आलाकमान को भी विधायकों के दल बदलने का संकेत मिल चुका है। इसलिए हाई कमान अपनी निगरानी में सभी विधायकों को रखे हुआ है। आपको बता दें किवीआईपी के तीन विधायकों के भाजपा शामिल होने के बाद बिहार में पार्टी के 77 विधायक हो चुके हैं। अगर भाजपा कांग्रेस के 14 विधायकों को अपने साथ लाने में कामयाब हो गई तो भाजपा के बिहार में 90 से ज़्यादा विधायक हो जाएंगे। इसके बाद सत्ता पक्ष को अल्पमत में लाकर खुद सत्ता पर क़ाबिज़ होने का विपक्ष सपना अधूरा ही रह जायेगा।

    बिहार में बदल रहे सियासी समीकरण

    बिहार में बदल रहे सियासी समीकरण

    बिहार में सियासी समीकरण बदलने के बाद अब विपक्ष में भी सत्ता पाने की आस जगी है। आरजेडी अब रणनीति तैयार करने में जुट गई है, कि किसी तरह से भी सत्ता पक्ष को अल्पमत में लाकर सरकार बनाने का दावा ठोक सके। यही वजह है कि बिहार में एनडीए गठबंधन किसी भी तरह का रिस्क नहीं लेना चाह रही है। कुर्सी ख़तरे में न पड़ जाए इसलिए भाजपा ने मास्टर स्ट्रोक खेलते हुए वीआईपी के विधायक राजू सिंह, स्वर्णा सिंह और मिश्री लाल यादव को पार्टी में शामिल करवा लिया है। अब एनडीए के पास 127 विधायकों का समर्थन है, इसके बाद भी कुर्सी जाने का डर सता रहा है।

    बिहार में विधानसभा सीटों का गणित

    बिहार में विधानसभा सीटों का गणित

    बिहार में कुल 243 विधानसभा सीटें हैं, इनमें 242 सीटों पर सदस्य हैं लेकिन एक सीट अभी खाली है। क्योंकि विकासशील इंसान पार्टी के एक विधायक मुसाफिर पासवान के निधन के बाद बोंचहा विधानसभा सीट खाली हो गई थी। अब इस सीट पर उपचुनाव होने वाले हैं। बिहार में सत्ता पर क़ाबिज़ होने के लिए 122 सीटों की ज़रूरत होती है, जिसमें एनडीए गठबंधन के पास 127 विधायकों का समर्थन है। विपक्ष के पास 115 विधायक हैं, सत्ता पाने के लिए सिर्फ़ 7 विधायकों का ही समर्थन चाहिए।

    आरजेडी भी तैयार कर रही रणनीति

    आरजेडी भी तैयार कर रही रणनीति

    सूत्रों की मानें तो विपक्ष ओवौसी की पार्टी के पांच विधायक, हिन्दुस्तान अवाम मोर्चा के एक विधायक (जीतनराम मांझी) और एक निर्दलीय विधायक से समर्थन देने के लिए लगातार संपर्क साध रहे हैं। इसके साथ ही सत्ता पक्ष के कुछ विधायकों से इस्तीफ़ा दिलावकर यह सदस्यता रद्द करवाकर अल्पमत में लाने की रणनीति तैयार करने में जुट गई है। बिहार में आंकड़ों की बाज़ी ज़रा सी भी पलटी तो सत्ता परिवर्तन हो सकता है। वीआईपी के तीनों विधायकों का विलय करवाने के बाद भी एनडीए की कुर्सी ख़तरे में नजर आ रही है।

    कांग्रेस विधायकों से संपर्क साध रही भाजपा

    कांग्रेस विधायकों से संपर्क साध रही भाजपा

    बिहार में बदले सियासी समीकरण को देखते हुए सियासी जानकारों का मान्ना है कि विधानसभा भंग हो सकती है। क्योंकि नीतीश कुमार पर जब भाजपा नेता लखीसराय और बेगूसराय वाले मामले पर हमलावर थे तो मुकेश सहनी उनके साथ क़दम से क़दम मिलाकर खड़े हुए थे। अब मौजूदा हालात में नीतीश कुमार भी भाजपा से नाराज़ चल रहे हैं। ऐसे में मुमकिन है कि नीतीश कुमार विपक्ष को बाहर से समर्थन दे दें। अगर ऐसा हुआ तो कुछ विधायक इस्तीफ़ा दें सकते हैं जिससे सत्ता पक्ष के अल्पमत में आते ही विधानसभा भंग हो जाएगी । इसके साथ ही अगर विपक्ष ने सात विधायकों का समर्थन हासिल कर लिया तो बिहार में महागठबंधन की सरकार बन जाएगी। लेकिन भारतीय जनता पार्टी ने इसका तोड़ निकालने के लिए सियासी रणनीति तैयार कर कांग्रेस के विधायकों से संपर्क साधना शुरू कर दिया है।

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