'मुझे डस्टबिन न समझें', ममता के चहेते फायरब्रांड सांसद Kalyan Banerjee क्यों हुए नाराज? क्या दे रहे इस्तीफा
Kalyan Banerjee Ultimatum in TMC Crisis: पश्चिम बंगाल में अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रही तृणमूल कांग्रेस (TMC) की मुखिया ममता बनर्जी पर एक के बाद एक विपदा आ रही है। अब TMC के फायरब्रांड सांसद कल्याण बनर्जी ने भी बगावत कर दी है। गुरुवार को कल्याण बनर्जी ने ममता बनर्जी को अल्टीमेटम दे दिया है। उन्होंने ममता दीदी के सामने ये शर्त रख दी है कि पार्टी में अब अभिषेक बनर्जी और उनके बीच से किसी एक को चुनना होगा।
श्रीरामपुर लोकसभा सीट से सांसद और जाने-माने वकील की ये बगावत ममता बनर्जी के लिए किसी कयामत से कम नहीं है। समझिए आखिर ममता बनर्जी के चहेते सांसदों में एक कल्याण बनर्जी ने बगावती तेवर दिखाते हुए अल्टीमेटम क्यों दे दिया? क्या वो भी इस्तीफा देने वाले बागी सांसदों के गुट में शुमार हो गए हैं?

आखिर क्यों कल्याण बनर्जी ने ममता दीदी को दिया अल्टीमेटम?
दरअसल, कल्याण बनर्जी ने गुरूवार को मीडिया के सामने अपना दर्द और नाराजगी व्यक्त करते हुए बताया कि वो अभिषेक बनर्जी से कथित तलाशी और समन के एक महत्वपूर्ण कानूनी मामले को संभाल रहे थे। जिसकी तैयारी उन्होंने कोर्ट में घंटों बैठकर की, लेकिन आधी रात को उन्हें अचानक सूचित किया गया कि उनकी जगह कोई दूसरा वकील कर लिया गया है, जो अभिषेक बनर्जी के केस में कोर्ट में जिरह करेगा। कल्याण बनर्जी ने अभिषेक बनर्जी से जुड़े केस से खुद को अलग करने की घोषणा करते हुए कहा, "अभिषेक बनर्जी ने मुझ पर कभी भरोसा नहीं किया और आगे भी नहीं करेंगे।"
कल्याण बनर्जी बोले- मुझे डस्टबिन की तरह न समझें
कल्याण बनर्जी ने इसे अपमानजनक बताते हुए कहा, "यह बेहद अपमानजनक है। मुझे आधी रात को बताया जाता है कि वकील बदल दिया गया है। इससे साफ है कि मुझ पर कभी भरोसा नहीं किया गया। मुझे डस्टबिन की तरह न समझें। अगर किसी और से केस लड़वाना था, तो पहले बता देना चाहिए था। आधी रात को मुझे बताया गया कि अब मेरी जरूरत नहीं है।"
'चू कित-कित' वाले कल्याण बनर्जी क्या टीएमसी से हो जाएंगे छू?
'चू कित-कित' वाले कल्याण बनर्जी' के नाम से फेमस इस सांसद को ममता बनर्जी के सबसे भरोसेमंद सहयोगियों में गिना जाता है। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले और बाद में कई महत्वपूर्ण कानूनी मामलों में उन्होंने टीएमसी का पक्ष मजबूती से रखा है। फर्जी हस्ताक्षर से जुड़े जिस मामले में अभिषेक बनर्जी आरोपी हैं, उसमें भी वे मुख्य वकील रहे हैं। हालांकि, अब उन्होंने साफ कहा है कि ममता बनर्जी को अभिषेक बनर्जी को हटाना चाहिए, अन्यथा वे पार्टी में बने रहने में असमर्थ हैं। यानी कल्याण बनर्जी भी बगावती सांसदों के खेमे में जल्द शामिल नजर आएंगे।
कौन हैं कल्याण बनर्जी?
4 जनवरी 1957 को जन्में कल्याण बनर्जी पेशे से वरिष्ठ वकील हैं और 1981 से कोलकाता हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में वकालत कर रहे हैं। उन्होंने रांची विश्वविद्यालय से एलएलबी की डिग्री प्राप्त की। अपने लंबे कानूनी करियर में कल्याण बनर्जी कई हाई-प्रोफाइल मामलों से जुड़े रहे हैं, जिनमें नंदीग्राम भूमि विवाद, सिंगूर भूमि अधिग्रहण और रिजवानुर रहमान मामला प्रमुख हैं। इन मामलों में उनकी भूमिका ने उन्हें एक अनुभवी और प्रभावशाली वकील के रूप में स्थापित किया।
कल्याण बनर्जी का राजनीतिक करियर
राजनीति में उनका कद समय के साथ लगातार बढ़ता गया। वे तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर श्रीरामपुर लोकसभा सीट से 2009, 2014, 2019 और 2024 में लगातार चार बार सांसद चुने गए हैं।
ममता बुआ के चहेते की पैरवी में तुड़वा चुके हैं सिर
ये वो ही कल्याण बनर्जी हैं जो चुनाव के बाद अभिषेक बनर्जी पर भीड़ द्वारा किए गए हमले के बाद हुगली जिले के चंडीतला पुलिस स्टेशन ज्ञापन देने पहुंचे थे, तब वहां उन पर भीड़ द्वारा हमला कर दिया था। "चोर-चोर" जैसे नारे भी लगाए गए। इस घटना को लेकर कल्याण बनर्जी ने आरोप लगाया कि जब वे आगे बढ़ रहे थे, तो बीजेपी कार्यकर्ताओं ने उनके साथ गाली-गलौज की और उन पर क्रिकेट की ड्यूस बॉल या पत्थर से हमला किया, जिससे उनके सिर में चोट लगने और खून बहने लगा।
'चू कित-कित' वाले कल्याण बनर्जी क्यों कहलाए?
दरअसल, लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान कल्याण बनर्जी ने अपने चुटीले अंदाज से भाजपा पर तंज कसते हुए 'चू कित-कित' खेल का उदाहरण दिया था। चू कित-कित जिसे कई जगह किट-किट या ठिकरी का खेल भी कहते हैं।
कल्याण बनर्जी कहा था कि "भाजपा 2024 लोकसभा चुनाव में '400 पार' के नारे के साथ मैदान में उतरी थी, जिसे उन्होंने 'चू-400' बताया, लेकिन जब नतीजे आए तो पार्टी 240 सीटों पर सिमट गई, जिसे उन्होंने 'कित-240' करार दिया।" कल्याण बनर्जी ने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा कि भाजपा इस राजनीतिक 'चू कित-कित' के खेल में भी हार गई। उनके इस मजाकिया अंदाज और अभिनय और तंज पर लोकसभा में सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों ओर के सांसदों ने जमकर ठहाके लगाए थे।














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