ओबामा से झूठ बोलता पाक, कभी नहीं लगा सकता जेयूडी और हक्कानी पर बैन
इस्लामाबाद। पाकिस्तान की ओर से आई यह खबर कि उसने हक्कानी नेटवर्क और जमात-उद-दावा को बैन करने का फैसला किया है, दुनिया के कई देशों की ओर से सराही गई। अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की भारत यात्रा जल्द शुरू होने वाली है। ऐसे में हो सकता है ओबामा का ध्यान आकर्षित करने के मकसद यह कदम उठाया गया है। लेकिन यह भी हकीकत है कि पाक कभी भी इन संगठनों को बैन नहीं कर सकता है।

क्या हैं बैन के मायने
- भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के कई अधिकारी भी पाक के फैसले को लेकर आश्वस्त नहीं हैं।
- उनका मानना है कि पाक ने इससे पहले भी कई आतंकी संगठनों पर बैन लगाया है।
- इसके बाद भी अक्सर ही पाक में कई आतंक संगठन फिर से एकजुट होते नजर आए हैं।
- हो सकता है कि पाक इन संगठनों को आदेश दे कि वे कुछ देर के लिए शांत रहें या फिर वह किसी और नाम से अपना संचालन फिर से शुरू कर दें।
- विशेषज्ञों की मानें तो नवाज शरीफ सरकार की ओर से लिया गया यह फैसला आईएसआई को कभी भी मंजूर नहीं होगा।
- कई विशेषज्ञों की ओर से कई बार यह बात कही जा चुकी है कि हक्कानी नेटवर्क पर लगाया गया बैन शायद तालिबान को खत्म करने वाला कदम होगा।
- मुल्ला उमर वाले तालिबान और तहरीक-ए-तालिबान पर लगाया गया बैन पाक के लिए कश्मीर में जारी लड़ाई को कमजोर कर देगा।
- मुल्ला उमर वाला तालिबान, कश्मीर और अफगानिस्तान की लड़ाई में शामिल है।
- इसे हक्कानी की ओर से समर्थन मिलता है।
- इस पर बैन के लिए पाक के अंदर ही कुछ संस्थाएं सहमत नहीं होंगी।
बलूचिस्तान भेजा गया मुल्ला उमर
- पेशावर में आतंकी हमले के बाद पाक में एक बड़ा आपरेशन जर्ब-ए-अज्ब नाम दिया गया है।
- 16 दिसंबर के बाद से पाक में जो कुछ भी हो रहा है उससे ज्यादा लोग सहमत नजर नहीं आ रहे हैं।
- आईएसआई के कुछ अधिकारियों ने पाक-अफगानिस्तान सीमा पर स्थित हक्कानी नेटवर्क के कैंपों का दौरा किया गया था।
- इन अधिकारियों की ओर से उन्हें कहा गया था कि वे सभी सुरक्षित जगह की ओर से चले जाएं।
- भारतीय सुरक्षा अधिकारियों मानते हैं कि पाक हक्कानी नेटवर्क और दूसरे आतंकी संगठनों के खिलाफ कार्रवाई नहीं कर सकता है।
- अगर वह ऐसा कुछ करेगा तो उसे एक बड़ा नुकसान झेलने को तैयार रहना होगा।
- हक्कानी नेटवर्क पर बैन का मतलब अफगानिस्तान में पाक के प्रॉक्सी वॉर खत्म होना।
- मुल्ला उमर अफगानिस्तान तालिबान का प्रमुख है, वह पाक के लिए किसी बहुमूल्य संपत्ति से कम नहीं है।
- अमेरिकी फौजें जब अफगानिस्तान को छोड़कर चली जाएंगी तो फिर मुल्ला उमर आईएसआई की लड़ाई को आगे बढ़ाएगा।
- इसके बदले आईएसआई उसे छिपने के लिए एक सुरक्षित पनाह मुहैया कराएगी।
- हाल ही में आई इंटेलीजेंस के मुताबिक मुल्ला उमर को बलूचिस्तान में उसके एक सुरक्षित जगह दे दी गई है।
सईद के बिना कश्मीर की लड़ाई अधूरी
- हाफिज सईद का जेयूडी यानी जमात-उद-दावा एक चैरिटी ऑर्गनाइजेशन है।
- सईद भी पाक में है और मुल्ला उमर की तरह वह भी पाक के लिए एक बहुमूल्य संपत्ति है।
- सर्इद पाक के राजनीतिक समीकरणों को हिलाने का दम रखता है। साथ ही वह आईएसआई के लिए भी काफी अहम है।
- जेयूडी एक चैरिटी ऑर्गनाइजेशन है और कई अंतराष्ट्रीय एजेंसियों के लिए मुसीबत की बड़ी वजह है।
- एजेंसियों ने जेयूडी पर आरोप लगाया है कि इसके बहाने सईद लश्कर के लिए फंड इकट्ठा करता है।
- भारतीय एजेंसियों की मानें तो जेयूडी पर लगा बैन अस्थायी ही होगा और इसे कोर्ट में चुनौती दे दी जाएगी।
- अक्टूबर 2014 में ही पाक की ओर से फैसला लिया गया था जेयूडी पर बैन लगाया जाएगा लेकिन ऐसा हुआ ही नहीं है।
- पाक सरकार सिर्फ दुनिया को दिखाने के लिए इस पर बैन लगाएगी।
- हकीकत यही है कि पाक कभी भी हाफिज सईद पर बैन लगाने के बारे में सोच भी नहीं सकता है।
- अगर ऐसा कोई कदम उठाया गया तो फिर पाक के लिए एक बड़ी मुसीबत आ सकती है।
- लश्कर-ए-तैयबा आईएसआई का वह भरोसेमंद साथी की तरह रहा है जो कश्मीर में उसके लिए लड़ाई को आगे बढ़ा रहा है।
- भारतीय एजेंसियों की मानें तो बैन से पहले सरकार की ओर से खुद सईद को भरोसे में लिया जाएगा।
- जेयूडी दूसरे नाम के संस्था के लिए फंड इकट्ठा करती रहेगी।












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