मसूद अजहर पर बैन के लिए ट्रंप के एक्शन मोड में आने की वे 6 वजहें
चीन और पाकिस्तान पर दबाव बनाने के अलावा आतंकवाद से लड़ाई को लेकर अपनी प्रतिबद्धता को लेकर अमेरिका चाहता है जैश-ए-मोहम्मद के चीफ मौलाना मसूद अजहर पर बैन।
वॉशिंगटन। जैश-ए-मोहम्मद चीफ मौलाना मसूद अजहर अपने बैन को लेकर फिर से खबरों में आ गया है। मंगलवार को खबरें आईं कि अमेरिका, मसूद अजहर को बैन करने के लिए यूनाइटेड नेशंस (यूएन) पहुंच चुका है। अमेरिका के मसूद अजहर को बैन करने वाले प्रस्ताव को फ्रांस और यूनाइटेड किंगडम का भी समर्थन मिला है। हालांकि चीन ने एक बार फिर से इस पर अपना टेक्निकल होल्ड लगा दिया है और छह माह तक कुछ नहीं हो सकता है।
संसद और पठानकोट में आतंकी हमले का दोषी
वर्ष 2001 में संसद पर आतंकी हमले के अलावा पठानकोट आतंकी हमले को अंजाम देने वाला जैश-ए-मोहम्मद एक आतंकवादी संगठन है। भारत के अलावा अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), यूनाइटेड किंगडम और यूएन ने इसे आतंकवादी संगठन घोषित किया हुआ है। वहीं दिलचस्प बात यह है कि जिस जैश को इतने देशों ने आतंकवादी संगठन घोषित किया हुआ तो वहीं इसके चीफ को अभी तक ग्लोबल टेररिस्ट का स्टेटस नहीं दिया गया है। ऐसे में जब अमेरिका की ओर से यह कदम उठाया गया तो भारत को भी एक नई उम्मीद जगी है। लेकिन आखिर अमेरिका ने मसूद अजहर के बैन को लेकर यह कदम क्यों उठाया। यहां पर हम आपको बता दें कि मसूद अजहर, अल कायदा के काफी करीब रहा है। एक नजर डालिए उन वजहों पर कि आखिर क्यों अमेरिका चाहता है मसूद अजहर को ग्लोबल टेररिस्ट घोषित किया जाए। पढ़ें-चीन ने पाक से कहा मसूद अजहर 'समस्या' का अब हल तलाशे

चीन पर दबाव बनाने की कोशिश
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप का प्रशासन अब इस मुद्दे पर यूएन में आगे बढ़ेगा। राष्ट्रपति ट्रंप पहले से ही चीन को लेकर अपनी आक्रामक नीति की ओर इशारा कर चुके हैं। मसूद अजहर पर बैन का कदम उठाकर उन्होंने और उनके प्रशासन ने साफ कर दिया है कि चीन पर अमेरिका का रुख कभी कमजोर नहीं हो सकता है। यह फैसला उसी दिशा में लिया गया एक अहम फैसला है।

पाकिस्तान पर कार्रवाई का संकेत
मंगलवार को मसूद अजहर पर बैन के इस नए प्रस्ताव की जानकारी तब आई जब अमेरिका के 10 थिंक टैंक्स ने एक रिपोर्ट राष्ट्रपति ट्रंप के ऑफिस भेजी। इस रिपोर्ट में राष्ट्रपति ट्रंप से गुजारिश की गई है कि वह आतंकवाद का समर्थन करने वाले पाकिस्तान पर कड़ी कार्रवाई करें और उस पर आर्थिक दंड लगाएं। खुद राष्ट्रपति ट्रंप भी आतंकवाद पर पाकिस्तान की नीति की आलोचना खुलकर कर चुके हैं। जिस समय ओसामा बिन लादेन को अमेरिक कमांडो ने मारा था राष्ट्रपति ट्रंप ने कड़े शब्दों में पाक की आलोचना की थी। ऐसे में साफ है कि ट्रंप, आने वाले कुछ दिनों में पाक के खिलाफ कड़े कदम उठा सकते हैं।

आतंकवाद पर नीति
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप साफ कर देना चाहते हैं कि आतंकवाद को लेकर अमेरिका की नीति में कोई बदलाव नहीं हुआ है। अमेरिका आज भी निष्पक्ष तौर पर उन देशों के साथ खड़ा है, जो आतंकवाद या गलत नीतियों का सामना कर रहे हैं, चाहे वह पाक के आतंकवाद का सामना करने वाला भारत हो या फिर चीन की नीतियों की वजह से अलग-थलग होकर रहने को मजबूर ताइवान हो।

दक्षिण एशिया में मजबूत मौजूदगी
अमेरिका के लिए आने वाले कुछ समय में दक्षिण एशिया में अपनी पकड़ मजबूत करना सबसे अहम है। भले ही राष्ट्रपति ट्रंप, रूस और राष्ट्रपति ब्लादीमिर पुतिन की तारीफ कर चुके हों, लेकिन वह यह बात भी जानते हैं कि रूस इस समय किसी न किसी वजह से अफगानिस्तान, पाकिस्तान और चीन के साथ है। भारत के साथ रूस के अच्छे रिश्तें और सिक्योरिटी काउंसिल का स्थायी सदस्य होने के बावजूद रूस ने मसूद अजहर को लेकर अभी तक कोई भी ऐसा इशारा नहीं दिया है जिससे लगे कि वह भारत के साथ है। ऐसे में यह अमेरिका के लिए अच्छा मौका साबित हो सकता है जब वह भारत को अपने भरोसे में लेकर दक्षिण एशिया पर अपनी बादशाहत कायम कर सकेगा।

इस्लामिक आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने चुनावी अभियान से लेकर शपथ ग्रहण तक में एक बात पुरजोर तरीके से कही कि वह हर हाल में इस्लामिक आतंकवाद को खत्म करके रहेंगे और इसका समर्थन करने वाले देशों के खिलाफ सख्त कदम उठाएंगे। जैश के सरगना पर अगर बैन लगता है तो यह सही मायनों में ट्रंप और उनके प्रशासन की जीत होगी।

यमन, अल-कायदा और सोमालिया का कनेक्शन
यमन, अल-कायदा और सोमालिया, तीनों को ही अमेरिका आतंकवाद का गढ़ मानता है। सोमालिया और यमन को तो हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सात बैन देशों की लिस्ट में डाला है। मसूद अजहर ने वर्ष 1993 में यह कुबूल किया था कि वह अल-इतिहाद-अल-इस्लामिया के नेता से मिलने के लिए नैरोबी, केन्या गया था। यह संगठन अल-कायदा से जुड़ा हुआ है।












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