शशि थरूर पर आरोप जड़ते हुए ललित मोदी बोले झूठ? कोच्चि टस्कर्स बिड मामले पर 16 साल पुराने रिकॉर्ड ने खोली पोल

Lalit Modi: आईपीएल के संस्थापक और पूर्व चेयरमैन ललित मोदी ने एएनआई को दिए हालिया इंटरव्यू में दावा किया कि उन्होंने कोच्चि को आईपीएल फ्रेंचाइजी की बोली प्रक्रिया में शामिल होने दिया, जबकि उसके पास स्टेडियम तक नहीं था। साथ ही उन्होंने कहा कि शशि थरूर के कहने और उनके प्रभाव में आकर उन्होंने यह फैसला लिया था।

लेकिन जब 2010 के रिकॉर्ड, उस समय के सार्वजनिक बयानों और कोच्चि की वास्तविक स्थिति को देखा जाता है, तो ललित मोदी के ताजा दावों पर कई सवाल खड़े होते हैं। केरल क्रिकेट संघ का स्टेडियम नहीं था यह सच है लेकिन इसे उन्होंने इसको अपने ढाल के रूप में इस्तेमाल किया है।

lalit modi

2010 में खुद ललित मोदी ने क्या कहा था?

23 मार्च 2010 को कोच्चि फ्रेंचाइजी को मंजूरी मिलने के बाद ललित मोदी ने साफ कहा था कि शशि थरूर सिर्फ केरल को आईपीएल टीम दिलाने की कोशिश कर रहे थे और उनकी भूमिका वहीं तक सीमित थी। यानी 2010 में ललित मोदी सार्वजनिक रूप से शशि थरूर की भूमिका को सीमित बता रहे थे, जबकि 2026 में वह दावा कर रहे हैं कि थरूर ने उन्हें प्रभावित करके कोच्चि को सिस्टम में शामिल कराया।

स्टेडियम वाला दावा भी सवालों के घेरे में

अपने ताजा इंटरव्यू में ललित मोदी ने कहा कि कोच्चि के पास तो स्टेडियम ही नहीं था। 2010 में वही ललित मोदी कह रहे थे कि केरल क्रिकेट एसोसिएशन भविष्य के लिए नया क्रिकेट स्टेडियम विकसित कर रही है और तब तक IPL वैकल्पिक व्यवस्था करेगा।

क्या कोच्चि के पास सच में कोई स्टेडियम नहीं था?

यहीं पर ललित मोदी का दावा सबसे ज्यादा कमजोर पड़ता है। कोच्चि में उस समय जवाहर लाल नेहरु इंटरनेशनल स्टेडियम पहले से मौजूद था। यह कोई छोटा मैदान नहीं था, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर का बहुउद्देश्यीय स्टेडियम था, जहां बड़े खेल आयोजन और अंतरराष्ट्रीय मुकाबले आयोजित हो चुके थे, 1998 से वहां इंटरनेशनल क्रिकेट हो रहा था। 2011 में कोच्चि ने अपने IPL मैच भी इसी मैदान पर खेले।

यदि किसी मैदान पर अंतरराष्ट्रीय मुकाबले हो सकते थे, तो वहां आईपीएल मैच कराना कोई असंभव बात नहीं थी। यही वजह है कि कोच्चि टस्कर्स का होम ग्राउंड भी यही स्टेडियम बना। दरअसल, कोच्चि के पास उस समय शायद वानखेड़े या चेपॉक जैसा समर्पित क्रिकेट स्टेडियम नहीं था, लेकिन स्टेडियम तो इंटरनेशनल लेवल का था, तभी तो वहां आईपीएल मैच हुए। किसी भी फ्रेंचाइजी के पास अपना खुद का स्टेडियम नहीं होता है।

क्या था वह असली विवाद?

दिलचस्प बात यह है कि 2010 में जब कोच्चि टस्कर्स विवाद सुर्खियों में था, तब ललित मोदी की मुख्य आपत्ति स्टेडियम को लेकर नहीं थी। उस समय विवाद फ्रेंचाइजी के शेयरहोल्डिंग पैटर्न, मालिकाना ढांचे और सुनंदा पुष्कर की हिस्सेदारी को लेकर था। शशि थरूर ने भी उस समय कहा था कि उनका उद्देश्य सिर्फ केरल को आईपीएल टीम दिलाना था और उन्होंने किसी निजी लाभ से इनकार किया था।

16 साल बाद बदला नैरेटिव?

कोच्चि टस्कर्स मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि 2010 और 2026 में ललित मोदी के बयानों में बड़ा अंतर क्यों दिखाई देता है। 2010 में उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा था कि शशि थरूर की भूमिका केवल केरल को आईपीएल टीम दिलाने तक सीमित थी और कोच्चि के इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर भी कोई गंभीर आपत्ति नहीं जताई थी। वहीं अब, 16 साल बाद, मोदी दावा कर रहे हैं कि कोच्चि के पास स्टेडियम तक नहीं था और उन्होंने थरूर के प्रभाव में आकर उसे सिस्टम में प्रवेश दिया। ऐसे में उनके पुराने रिकॉर्डेड बयान और मौजूदा दावों के बीच का विरोधाभास इस पूरे विवाद को फिर से चर्चा के केंद्र में ले आया है।

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