UP चुनाव से पहले सपा-कांग्रेस को लेकर शिंदे गुट की भविष्यवाणी! बताया कौन होगा लखनऊ की गद्दी का अगला दावेदार
UP Assembly Election 2027: उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव की आहट के साथ ही सियासी बयानबाजी का दौर चरम पर पहुंच गया है। शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) के प्रवक्ता और वरिष्ठ नेता संजय निरुपम ने उत्तर प्रदेश के आगामी चुनावी भविष्य और 'इंडिया' (INDIA) गठबंधन को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला दावा किया है।
मुंबई में पत्रकारों से बात करते हुए निरुपम ने साफ कहा कि यूपी में जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आएंगे, वैसे-वैसे सीट बंटवारे को लेकर सपा और कांग्रेस के बीच भयानक सिर-फुटौवल शुरू हो जाएगी। उन्होंने दावा किया कि विपक्षी चाहे जो भी पैंतरा अपना लें, यूपी में दोबारा एनडीए (NDA) की ही सरकार बनने जा रही है।

सपा के सहारे ही जिंदा है कांग्रेस
शिवसेना (शिंदे गुट) के प्रवक्ता संजय निरुपम ने 'इंडिया' गठबंधन के भविष्य पर सवाल उठाते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में कांग्रेस पूरी तरह समाप्ति की ओर है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, 'अगर कांग्रेस को यूपी में दोबारा जिंदा होना है, तो उसे समाजवादी पार्टी के बैसाखी के सहारे ही आगे बढ़ना होगा। चूंकि सपा वहां मुख्य विपक्षी पार्टी है, इसलिए वह शेर की तरह ज्यादा से ज्यादा सीटें अपने पास रखना चाहेगी।'
निरुपम ने आगे कहा कि कांग्रेस की पुरानी आदत अपने सहयोगी दलों पर दबाव बनाकर खुद को मजबूत करने की रही है। ऐसे में दोनों पार्टियों के बीच मतभेद और एक-दूसरे पर तीखी बयानबाजी का बढ़ना पूरी तरह तय है।
फेल होगा विपक्ष का हर फॉर्मूला
संजय निरुपम ने दावा किया कि विपक्षी दल चाहे किसी भी फॉर्मूले के तहत आपस में सीटें बांट लें, लेकिन उत्तर प्रदेश की जनता दोबारा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के चेहरे पर ही भरोसा जताएगी। उन्होंने कहा कि योगी सरकार ने जिस तरह से प्रदेश में कानून-व्यवस्था को मजबूत किया है और 'माफिया राज' का खात्मा किया है, उसकी वजह से यूपी के मतदाता इस बार जाति-पाति की राजनीति से ऊपर उठकर एनडीए (NDA) के पक्ष में एकतरफा वोट करेंगे।
ममता की पार्टी TMC में भयंकर फूट का दावा
पश्चिम बंगाल की राजनीति और तृणमूल कांग्रेस (TMC) पर बात करते हुए संजय निरुपम ने बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि हाल ही में ममता बनर्जी के भतीजे और टीएमसी महासचिव अभिषेक बनर्जी पर जो हमला हुआ, उसके बाद सहानुभूति जुटाने के लिए ममता दीदी ने सभी विधायकों की एक बड़ी बैठक बुलाई थी। लेकिन हैरानी की बात यह रही कि उस बैठक में टीएमसी के 80 विधायक पहुंचे ही नहीं। निरुपम के मुताबिक, अगर अपने ही नेता के भतीजे पर हमले के बाद विधायक गायब हैं, तो इसका साफ मतलब है कि टीएमसी के अंदरूनी ढांचे में बहुत भयंकर टूट-फूट चल रही है।
क्या हैं UP विधानसभा के मौजूदा सियासी समीकरण?
उत्तर प्रदेश में कुल 403 विधानसभा सीटें हैं। अगर पिछले इतिहास और मौजूदा सियासी जमीन पर नजर डालें तो समीकरण काफी दिलचस्प हैं:
- 2022 का विधानसभा नतीजा: पिछले चुनाव में सपा ने सुभासपा (ओम प्रकाश राजभर की पार्टी) के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था और सपा ने अकेले 111 सीटें जीती थीं।
- बदले हुए समीकरण: आज राजभर की सुभासपा एनडीए (NDA) का हिस्सा बन चुकी है। वहीं, समाजवादी पार्टी अब 'इंडिया अलायंस' के तहत कांग्रेस के साथ खड़ी है।
- लोकसभा चुनाव का बूस्टर: पिछले लोकसभा चुनाव में इस सपा-कांग्रेस गठबंधन ने यूपी में सबको चौंकाते हुए ऐतिहासिक प्रदर्शन किया था, जिसमें सपा को 37 और कांग्रेस को 6 सीटें मिली थीं। इसी बड़ी जीत के भरोसे यह गठबंधन उत्साहित है।
क्या समय से पहले होंगे यूपी में चुनाव?
उत्तर प्रदेश में नियम के मुताबिक विधानसभा चुनाव साल 2027 के फरवरी-मार्च महीने में होने तय हैं। लेकिन देश के राजनीतिक गलियारों में यह अटकलें बेहद तेज हैं कि यूपी में इसी साल (2026) के अंत तक चुनाव कराए जा सकते हैं। इसके पीछे का सबसे बड़ा कारण देश भर में होने वाली महा-जनगणना को माना जा रहा है, जिसकी रफ्तार अगले साल की शुरुआत में बहुत तेज होने वाली है। इसी प्रशासनिक व्यस्तता से बचने के लिए चुनाव आयोग उत्तर प्रदेश में समय से पहले चुनाव कराने का बड़ा फैसला ले सकता है।















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