फिर टूट रही शिवसेना! एकनाथ शिंदे के 'ऑपरेशन टाइगर' से घबराए Uddhav Thackeray की जाति क्या है?
Uddhav Thackeray caste, Net worth: महाराष्ट्र की राजनीति एक बार फिर उसी मोड़ पर खड़ी दिख रही है, जहां से 2022 में बालासाहेब की शिवसेना का विभाजन शुरू हुआ था। इस बार वजह एकनाथ शिंदे का कथित "ऑपरेशन टाइगर" है। दावा किया जा रहा है कि इसके जरिए एकनाथ शिंदे गुट वाली शिवसेना, उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले शिवसेना (UBT) खेमे से सांसदों को अपने पाले में शामिल कर रहे हैं।
जिसके बाद उद्धव ठाकरे के सामने अपनी पार्टी और सांसदों को एकजुट रखने की नई चुनौती खड़ी हो गई है।रविवार को मुंबई स्थित उनके आवास 'मातोश्री' में बुलाई गई लोकसभा सांसदों की बैठक में कुल 9 में से सिर्फ 4 सांसद ही पहुंचे। इसे 'ऑपरेशन टाइगर' को शिवसेना (यूबीटी) में सेंध लगाने की रणनीति माना जा रहा है।

शिंदे गुट के एमएलसी कृपाल तुमाने ने दावा किया है कि उद्धव ठाकरे के कम से कम 7 लोकसभा सांसद और 16 विधायक उनके संपर्क में हैं। उन्होंने दावा किया कि संसद के आगामी सत्र से पहले यह सांसद शिंदे खेमे में शामिल हो सकते हैं। अगर ये दावे सच होते हैं तो 2022 के बाद उद्धव की शिवसेना में ये सबसे बड़ी टूट होगी।
क्या सच में फिर हो रही उद्धव की शिवसेना में बगावत?
हालांकि संजय राउत लगातार दावा कर रहे हैं पार्टी पूरी तरह एकजुट है, जबकि विरोधी खेमे इसे "अंदरूनी असंतोष" का संकेत बता रहे हैं। इसी बीच उद्धव ठाकरे ने मुंबई में अपने सांसदों की बैठक बुलाकर स्थिति को नियंत्रण में रखने की कोशिश की, ताकि किसी भी तरह की टूट की आशंका को रोका जा सके। महाराष्ट्र में इस उथल-पुथल के बीच उद्धव ठाकरे की जाति और पार्टी सुर्खियों में हैं। आइए जानते हैं सभी सवालों के जवाब...
Uddhav Thackeray caste: उद्धव ठाकरे की जाति क्या है?
उद्धव ठाकरे का जन्म 27 जुलाई 1960 को मुंबई में महाराष्ट्र के प्रसिद्ध राजनीतिक प्रभावशाली परिवार में हुआ।शिवसेना के संस्थापक स्वर्गीय बालासाहेब ठाकरे के बेटे हैं और महाराष्ट्र की राजनीति के प्रमुख चेहरों में से एक हैं। ठाकरे परिवार मूलतः मराठी चित्पावन ब्राह्मण समुदाय से जुड़ा माना जाता है। यानी उद्धव ठाकरे मराठी ब्राहृमण हैं।
हालांकि उद्धव ठाकरे की राजनीति पर जाति की तुलना में उनकी "मराठी अस्मिता" और क्षेत्रीय राजनीति का अधिक प्रभाव रहा है। शिवसेना की राजनीति पारंपरिक रूप से जातिगत राजनीति से अलग, मराठी भाषा और क्षेत्रीय पहचान पर आधारित रही है।
एकनाथ शिंदे की जाति क्या है?
एकनाथ शिंदे का जन्म महाराष्ट्र के सातारा जिले में हुआ था। सतारा छत्रपति शिवाजी महाराज का गढ़ है। वे मराठा जाति और समुदाय (Maratha caste/community) से ताल्लुक रखते हैं। मराठा समुदाय महाराष्ट्र का एक प्रमुख सामाजिक समूह है, जो ऐतिहासिक रूप से खेती-किसानी, सैन्य सेवा और बाद में राजनीति में भी बहुत प्रभावशाली रहा है।
शिवसेना: 1966 से 2026 तक का राजनीतिक सफर

🟠 1966 बालासाहेब ठाकरे ने शिवसेना की स्थापना की। मुंबई में शिवसेना की शुरुआत हुई। मराठी अस्मिता और "मराठी मानुष" मुख्य मुद्दा रहा। महाराष्ट्र की क्षेत्रीय राजनीति में नई ताकत का उदय हुआ।
🟠 1989 में भाजपा-शिवसेना का राजनीतिक गठबंधन और लोकसभा और विधानसभा चुनाव साथ लड़े। दोनों के साथ आने से हिंदुत्व की राजनीति को मजबूती मिली
🟠 1995 में शिवसेना पहली बार महाराष्ट्र में सत्ता में और भाजपा-शिवसेना गठबंधन की सरकार बनी। मनोहर जोशी मुख्यमंत्री बने और शिवसेना भाजपा की सरकार ने शासन किया।
⚫ 2012 में शिवसेना के संस्थापक बालासाहेब ठाकरे का 17 नवंबर को निधन हो गया। चचेरे भाई राज ठाकरे के बजाय उद्धव ठाकरे ने नेतृत्व संभाला तो राज अलग हो गए और अपनी अगल पार्टी एमएनए गठित की।
पार्टी में नेतृत्व परिवर्तन का दौर शुरू
🔴 2019 (अक्टूबर-नवंबर) में विधानसभा चुनाव के बाद भाजपा से 30 साल पुराना गठबंधन टूटा। मुख्यमंत्री पद को लेकर विवाद के कारण उद्धव ठाकरे की शिवसेना ने भाजपा से नाता तोड़ा और यहीं से महाराष्ट्र में राजनीतिक अनिश्चितता हर दिन बढ़ती गई।
🔴 2019 (नवंबर) में भाजपा से नाता तोड़कर विरोधी विचारधार वाली कांग्रेस और शरद पवार की एनसीपी से हाथ मिलाकर महाविकास आघाड़ी (MVA) का गठबंधन का गठन किया जिसमें शिवसेना + कांग्रेस + NCP साथ आए। महाविकास आघाड़ी सरकार बनी और उद्धव ठाकरे की सीएम बनने की जिद पूरी हुई और वो मुख्यमंत्री के तौर पर सत्ता पर काबिज हुए।
🔴जून 2022 में शिवसेना के एकनाथ शिंदे ने उद्धव ठाकरे से बगावत कर दी और कई विधायक शिंदे गुट में शामिल हुए और शिवसेना में बड़ी टूट हुई और महाराष्ट्र में राजनीतिक संकट शुरू हो गया।
🟠 30 जून 2022: शिवसेना के दो टुकड़े होने की वजह से उद्धव के प्रतिनिधित्व वाली MVA सरकार गिर गई और उद्धव ठाकरे को इस्तीफा देना पड़ा। एकनाथ शिंदे मुख्यमंत्री बने और भाजपा ने सरकार को समर्थन दिया
🔴 वर्ष 2023 शिवसेना नाम और धनुष-बाण चिन्ह शिंदे गुट को मिला। चुनाव आयोग का बड़ा फैसला आया और शिंदे गुट को आधिकारिक शिवसेना का दर्जा मिल गया और उद्धव ठाकरे से शिवसेना और तीर धनुष छिन गया। जिसके बाद अपनी पार्टी को मजबूरी में नया नाम "शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) दिया।
🔴2024-2026: दो शिवसेनाओं के बीच राजनीति शुरू हुई। एकनाथ शिंदे की शिवसेना और उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT)। महाराष्ट्र की राजनीति में सीधी टक्कर हुई और दोनों गुट अपने-अपने जनाधार को मजबूत करने में जुटे हुए हैंं।















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