'ऑपरेशन टाइगर' से बढ़ाई उद्धव ठाकरे की धड़कन! आखिर कौन हैं वो वो सांसद जो अ‍हम बैठक में नहीं हुए शामिल?

Maharashtra Politics: महाराष्ट्र की राजनीति में जारी हलचल के बीच शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के सांसदों की एक बड़ी बैठक मुंबई के मातोश्री में रविवार को आनन-फानन में बुलाई गई। शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे की अध्यक्षता में हुई इस बैठक पर पूरे राज्य की निगाहें टिकी थीं।

यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब राज्य में 'ऑपरेशन टाइगर' यानी उद्धव गुट के सांसदों को एकनाथ शिंदे गुट में शामिल कराने की चर्चाएं जोरों पर हैं। अपनी ताकत को आंकने की इस कोशिश के बीच चार सांसदों की अनुपस्थिति ने राजनीतिक गलियारों में नए कयासों और संभावित राजनीतिक बदलावों को जन्म दे दिया है।

Uddhav Thackeray

मातोश्री में कौन-कौन से सांसद रहे मौजूद?

बैठक में व्यक्तिगत रूप से पहुंचने वाले नेताओं में राज्यसभा सदस्य संजय राउत, दक्षिण मुंबई के सांसद अरविंद सावंत और दक्षिण मध्य मुंबई के सांसद अनिल देसाई प्रमुख थे। इनके साथ ही नाशिक के सांसद राजाभाऊ वाजे और मुंबई उत्तर पूर्व के सांसद संजय दिना पाटिल भी मातोश्री में चर्चा में शामिल हुए।

कौन हैं वो दो सांसद जो ऑनलाइन ज्‍वॉइन की बैठक?

वहीं, दो सांसदों ने बैठक में यवतमाल-वाशिम के लोकसभा सांसद संजय देशमुख ऑनलाइन जुड़े क्‍योंकि उनकी बेटी की अगले महीने शादी है जिसकी तैयारियों में व्यस्‍त थे, जिसकी जानकारी उन्होंने पार्टी के मुख्य रणनीतिकारों को पहले ही दे दी थी।

हिंगोली से पार्टी सांसद नागेश पाटिल आष्टीकर भी इस बैठक में डिजिटल मंच के जरिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से शामिल हुए। आष्टीकर वर्तमान में अपने क्षेत्र में स्थानीय स्वशासी निकायों के विधान परिषद चुनाव कार्यों में व्यस्त हैं। मीडिया से बातचीत में उन्होंने पुष्टि की कि वे पहले से तय चुनावी दौरों के कारण ऑनलाइन उपस्थित रहे।

कौन से वो सांसद हैं जो बैठक में नहीं हुए शामिल?

सांसद ओमराजे निंबाळकर

कुछ बेहद अहम सांसदों की पूर्ण अनुपस्थिति ने संगठन के लिए चिंता बढ़ा दी है। उस्मानाबाद से लोकप्रिय सांसद ओमराजे निंबाळकर इस बैठक में शामिल नहीं हो सके। हालांकि उन्होंने पार्टी नेता अनिल देसाई को पहले ही सूचित कर दिया था कि वे अपने बेटे की बीमारी के कारण पुणे में रुकने को मजबूर हैं।

सांसद संजय, उर्फ बंडू जाधव

परभणी के सांसद संजय, उर्फ बंडू जाधव, मातोश्री में हुई इस अहमबैठक से पूरी तरह गायब रहे। स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, जाधव अपने संसदीय क्षेत्र में आयोजित होने वाले एक पारंपरिक सामाजिक भोज 'धोंडे जेवण' और धार्मिक कीर्तन कार्यक्रम में शामिल होने के कारण मुंबई की इस बेहद जरूरी बैठक में नहीं आ सके। संजय जाधव जैसे कद्दावर सांसद ने भी बैठक से दूरी बनाई।

सांसद भाऊसाहेब वाकचौरे

इस पूरी परिस्थिति में शिवसेना (यूबीटी) नेतृत्व के लिए सबसे बड़ी पहेली शिरडी के सांसद भाऊसाहेब वाकचौरे बने हुए हैं। वाकचौरे सुबह से ही पूरी तरह से 'नॉट रीचेबल' पाए गए हैं। पार्टी सहयोगियों द्वारा उनके दोनों व्यक्तिगत मोबाइल नंबरों पर लगातार संपर्क साधने की कोशिश की गई, लेकिन उनसे कोई संपर्क नहीं हो पाया है। वाकचौरे की वफादारी को लेकर पहले भी संशय के बादल मंदराते रहे हैं। शिरडी क्षेत्र में यह चर्चा तेज है कि क्या वाकचौरे ने पाला बदलने का मन बना लिया है और पार्टी में उनकी 'विकेट गिर गई' है। हालांकि भी आधिकारिक रूप से ऐलान नहीं किया है।

उद्धव की बैठक में सांसदों का गैरमौजूदगी के वजह शिंदे का 'ऑपरेशन टाइगर' माना जा रहा है। ये ही सांसद हैं जो उद्धव ठाकरे से बगावत कर विरोधी शिंदे खेमे में जल्‍द शामिल हो सकते हैं।

शिवसेना (यूबीटी) बैठक में 10 सांसद

  1. संजय राउत राज्यसभा (महाराष्ट्र) प्रत्यक्ष उपस्थित रहे
  2. अरविंद सावंत दक्षिण मुंबई प्रत्यक्ष उपस्थित रहे
  3. अनिल देसाई दक्षिण मध्य मुंबई प्रत्यक्ष उपस्थित रहे
  4. राजाभाऊ वाजे नाशिक प्रत्यक्ष उपस्थित रहे
  5. संजय दिना पाटिल मुंबई उत्तर पूर्व प्रत्यक्ष उपस्थित रहे
  6. sंजय देशमुख यवतमाल-वाशिम ऑनलाइन उपस्थित रहे (पुत्री के विवाह की तैयारी)
  7. नागेश पाटिल आष्टीकर हिंगोली ऑनलाइन उपस्थित रहे (विधान परिषद चुनाव कार्य)
  8. ओमराजे निंबाळकर उस्मानाबाद अनुपस्थित रहे (पुत्र के बीमार होने के कारण)
  9. संजय (बंडू) जाधव परभणी अनुपस्थित रहे ('धोंडे जेवण' व स्थानीय कीर्तन)
  10. भाऊसाहेब वाकचौरे शिरडी अनुपस्थित रहे ('नॉट रीचेबल' संदिग्ध स्थिति)

बता दें महाराष्‍ट्र में उपमुख्‍यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाला खेमा लगातार अपनी ताकत बढ़ाने की कोशिशों में जुटा है, वहीं उद्धव ठाकरे के लिए अपने सांगठनिक ढांचे और सांसदों को एकजुट बनाए रखने की बड़ी चुनौती है।

इस महत्वपूर्ण बैठक के बाद उभरे नए घटनाक्रमों ने महाराष्ट्र की महा विकास अघाड़ी और सत्तापक्ष के बीच आगामी सियासी मुकाबले को और रोचक बना दिया है। फिलहाल सांसदों के इस रुख पर शिवसेना (यूबीटी) की पैनी नजर है और वे जमीनी स्तर पर डैमेज कंट्रोल की योजनाओं को आगे बढ़ाने के प्रयास कर रहे हैं।

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