Devendra Fadnavis का नाम तय होने से पहले 10 दिन का पूरा ड्रामा समझिए! एकनाथ शिंदे मोलभाव में कैसे पिछड़ते गए?

Maharashtra CM: बीजेपी विधायक दल के नेता चुने जाने के बाद देवेंद्र फडणवीस का तीसरी बार महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बनने का रास्ता साफ हो गया है। महाराष्ट्र में किसी भी गठबंधन को मिले अभूतपूर्व बहुमत के बावजूद यह तय करने में 10 दिन लग गए। क्योंकि, इसके पीछे बहुत ज्यादा सियासी ड्रामा हुआ है। मुंबई से लेकर दिल्ली तक मान मनौव्वल का दौर चला है। तब जाकर सही तस्वीर सामने आई है, जिसकी भावना महाराष्ट्र की जनता ने जनादेश में ही जाहिर कर दी थी।

देवेंद्र फडणवीस के मंत्रिमंडल में फिर से दो उपमुख्यमंत्री होने की संभावना है। इनमें से एक तो एनसीपी विधायक दल के नेता अजित पवार होंगे और दूसरे शिवसेना विधायक दल के नेता और मौजूदा कार्यवाहक मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के होने की संभावना है।

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नतीजे आने के बाद सरकार की तस्वीर साफ होने में लगा लंबा वक्त
एकनाथ शिंदे पहले दिन ही विधानसभा में महायुति विधायकों के संख्या बल को स्वीकार कर लेते तो शायद ऐतिहासिक जीत के बाद भी सरकार गठन में इतनी देरी नहीं होती। दरअसल, सबसे पहले अजित पवार की पार्टी की ओर से यह साफ कर दिया गया कि वह विधायकों के संख्या गणित को देखते हुए बीजेपी से देवेंद्र फडणवीस को मुख्यमंत्री बनाए जाने का समर्थन करते हैं।

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शिवसेना की ओर से शिंदे को सीएम बनाए जाने से शुरू हुआ मोलभाव!
लेकिन, सीएम शिंदे इसी बात के लिए शुरू में तैयार नहीं हुए। उनकी पार्टी की ओर से तरह-तरह की दलीलें दी गईं। पहले शिवसेना की ओर से उन्हें ही मुख्यमंत्री बनाए जाने की मांग की गई। टीओआई ने एक दिग्गज राजनेता के हवाले से बताया है कि फिर जब पिछले हफ्ते एकनाथ शिंदे सरकार गठन को लेकर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मिलने दिल्ली पहुंचे तो उन्होंने कहा कि अगर पूरे कार्यकाल के लिए संभव नहीं है तो कम से कम 6 महीने के लिए ही सीएम बनाया जाना चाहिए।

कम से कम 6 महीने के लिए सीएम बनना चाहते थे शिंदे- रिपोर्ट
बीजेपी नेतृत्व ने उनकी मांग को यह कहकर खारिज कर दिया कि इससे एक गलत उदाहरण स्थापित होगा। बीजेपी नेताओं का हवाला देते हुए उन्होंने उनके बारे में कहा,'6 महीने के लिए सीएम नियुक्त किए जाने की कोई व्यवस्था नहीं है, यह गलत फैसला होगा और प्रशासन पर इसका विपरीत प्रभाव पड़ेगा।'

दिल्ली से लौटने के बाद अपने गांव जाकर बीमार पड़ गए शिंदे
28 नवंबर को हुई इस बैठक के बाद ही शिंदे ने कहा था कि वह न तो सरकार गठन में अड़चन बनेंगे और बीजेपी नेतृत्व जिस नाम को भी फाइनल कर देगा, वह उसे ही मान लेंगे। लेकिन, उसके बाद शिंदे अचानक अपने गांव चल गए और फिर उनके अस्वस्थ होने की खबरें आने लगीं।

फिर विभागों को लेकर शिवसेना ने शुरू किया मोलभाव!
बाद में इस तरह की जानकारियां सामने आईं कि वह खुद डिप्टी सीएम नहीं बनना चाहते हैं। उनके लिए उनके हिसाब से कद की मांग की बातें भी सामने आईं। फिर खबरें आई कि वह अपने सांसद बेटे को उपमुख्यमंत्री बनवा सकते हैं।

लेकिन,बाद में खुद श्रीकांत शिंदे ने इन अटकलों को खारिज कर दिया। फिर कई रिपोर्ट आई कि शिवसेना तभी सरकार में हिस्सा बनेगी, जब उसे गृह, राजस्व और शहरी विकास जैसे विभाग दिए जाएं। अन्यथा यहां तक दावा किया गया कि पार्टी नई सरकार को बाहर से समर्थन दे सकती है।

हर मोलभाव में पिछड़ते गए शिंदे!
लेकिन, बाद में मीडिया में ऐसी खबरें आईं कि गृह विभाग मुख्यमंत्री के पास ही रहेगा और स्पीकर भी बीजेपी का ही होगा। अलबत्ता शिवसेना को डिप्टी सीएम के अलावा शहरी विकास जैसे विभाग दिए जाने की संभावना है।

लेकिन,मंगलवार शाम को देवेंद्र फडणवीस खुद एकनाथ शिंदे के आधिकारिक आवास वर्षा में उनसे मुलाकात के लिए पहुंचे। इसके बाद एकनाथ शिंदे के एक करीबी नेता ने कहा कि वह महायुति सरकार में शामिल होने के लिए तैयार हैं और वह उपमुख्यमंत्री भी बन सकते हैं।

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288 सीटों वाली महाराष्ट्र विधानसभा में बीजेपी के अपने 132 विधायक जीतकर पहुंचे हैं। उसे महायुति के कुछ छोटे दलों और अन्य पार्टियों का भी समर्थन है, जिससे उसकी अपनी संख्या 138 हो जाती है। वहीं महायुति के अन्य बड़े सहयोगी दलों में शिवसेना के 57 और एनसीपी के 41 विधायक हैं।

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