'लाठियां लाओ, भारत को नेपाल बना दो', क्या दिल्ली में दंगे की साजिश रच रही कॉकरोच जनता पार्टी? वीडियो का सच!
Cockroach Janata Party: सोशल मीडिया पर तहलका मचाने वाली 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) अब एक बड़े विवाद के केंद्र में आ गई है। 6 जून को दिल्ली के जंतर-मंतर पर होने वाले बड़े प्रदर्शन से ठीक पहले इंटरनेट पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। दावा किया जा रहा है कि इस आंदोलन की आड़ में दिल्ली को दहलाने और दंगे भड़काने की तैयारी चल रही है। भाजपा नेता तजिंदर पाल सिंह बग्गा ने इस वीडियो को साझा करते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं।
भाजपा नेता तजिंदर पाल सिंह बग्गा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पहले ट्विटर) पर वीडियो शेयर करते हुए CJP को सीधे निशाने पर लिया है। बग्गा ने अपने पोस्ट में लिखा कि कॉकरोच जनता पार्टी दिल्ली में दंगे भड़काने की योजना बना रही है। उन्होंने दावा किया कि यह वही गुट है जिसने साल 2020 में दिल्ली को आग में झोंकने वाले उमर खालिद का समर्थन किया था।

वायरल वीडियो के आधार पर दावा किया जा रहा है कि प्रदर्शनकारियों को 'लाठियां लाने' और 'भारत को नेपाल में बदल देने' के लिए उकसाया जा रहा है।
हालांकि दूसरी तरफ सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके का कहना है कि वे पूरी तरह से संवैधानिक और लोकतांत्रिक तरीके से शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना चाहते हैं और इसके लिए आधिकारिक अनुमति भी मांगी गई है। (वनइंडिया हिंदी इस वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं करता है)
पाकिस्तान और भारत-विरोधी कनेक्शन
एक अन्य पोस्ट में बग्गा ने पार्टी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास को घेरते हुए कहा कि सौरव ने भारत सरकार को निशाना बनाने के लिए पाकिस्तानी मुख्य न्यायाधीश को ट्वीट किया था।
उन्होंने आरोप लगाया कि सौरव दास आर्टिकल 370 और राम मंदिर के फैसलों का विरोध कर चुके हैं। बग्गा ने कहा कि जब उन्होंने पहले कहा था कि इस पार्टी को भारत-विरोधी ताकतों और पाकिस्तान का समर्थन हासिल है, तब लोगों ने उन पर निशाना साधा था, लेकिन अब सच सामने आ चुका है।
प्रवक्ताओं की लिस्ट में कोई महिला क्यों नहीं? संस्थापक का जवाब
पार्टी ने हाल ही में सौरव दास, विजेता दहिया और आशुतोष रांका को अपना आधिकारिक प्रवक्ता नियुक्त किया है। लेकिन इस घोषणा के बाद सोशल मीडिया पर यह सवाल उठने लगा कि टीम में कोई महिला प्रवक्ता क्यों नहीं है?
इस सवाल पर प्रतिक्रिया देते हुए पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने स्थिति साफ की। उन्होंने बताया कि संगठन ने अपनी महिला टीम के सदस्यों को इस भूमिका की पेशकश की थी।
हालांकि, लगातार मिल रही ऑनलाइन धमकियों और ट्र्रोलिंग के डर से महिला सदस्यों ने खुद सामने आने से मना कर दिया और पर्दे के पीछे रहकर काम करने की इच्छा जताई। दीपके ने कहा कि वे अपनी टीम के फैसले का सम्मान करते हैं, साथ ही उन्होंने देश की युवा महिलाओं को आगे आकर इस आंदोलन का हिस्सा बनने का न्योता भी दिया
शशि थरूर की नसीहत: 'इंस्टाग्राम टाउन स्क्वायर है, बैलेट बॉक्स नहीं' (Shashi Tharoor On Gen Z and Cockroach Janta Party)
इस पूरे आंदोलन और युवाओं के गुस्से पर कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने 'द इंडियन एक्सप्रेस' में एक खास लेख लिखकर देश की युवा पीढ़ी (Gen Z) को बेहद जरूरी सलाह दी है।
गुस्सा सही पर रास्ता अलग हो: थरूर ने लिखा कि युवाओं का गुस्सा और सिस्टम के प्रति उनकी निराशा बिल्कुल जायज है, लेकिन सोशल मीडिया के सहारे बदलाव नहीं आता। उन्होंने कहा, "इंस्टाग्राम आपका टाउन स्क्वायर (चौपाल) हो सकता है, लेकिन यह बैलेट बॉक्स (मतपेटी) नहीं है।"
सिस्टम को बदलने के व्यावहारिक उपाय: थरूर ने युवाओं को केवल सोशल मीडिया पर भड़ास निकालने के बजाय जमीनी स्तर पर काम करने के 4 बड़े तरीके बताए हैं:
प्रतिनिधियों को जवाबदेह बनाएं: अपने स्थानीय विधायकों और सांसदों के दफ्तरों का घेराव करें और आरटीआई (RTI) के जरिए पारदर्शिता की मांग करें।
संस्थागत दबाव डालें: अपनी मांगों को ठोस और स्पष्ट एजेंडे के रूप में रखें ताकि मीडिया और संसद इस पर बात करने के लिए मजबूर हों।
प्रोफेशनल तरीका अपनाएं: छात्र संघों, कानूनी विशेषज्ञों और पॉलिसी ग्रुप्स के साथ मिलकर काम करें ताकि कोर्ट में कानूनी लड़ाई मजबूती से लड़ी जा सके।
सक्रिय भागीदारी: बदलाव रोजमर्रा की उबाऊ राजनीति का हिस्सा बनने से आता है, व्यवस्था से दूरी बनाने से नहीं।
थरूर ने अंत में कहा कि युवाओं को खुद को 'कॉकरोच' समझने या इस नाम को स्थायी पहचान बनाने की जरूरत नहीं है। उन्हें मुख्यधारा के राजनेताओं के साथ मिलकर इस सिस्टम को फिर से खड़ा करना चाहिए।
आंदोलन की असल मांग क्या है?
इस पूरे विवाद के बीच कॉकरोच जनता पार्टी का मुख्य एजेंडा देश की शिक्षा प्रणाली में सुधार लाना है। 3 जून को हुई अपनी पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने साफ किया कि वे इस जर्जर हो चुकी व्यवस्था से न्यूनतम जवाबदेही की मांग कर रहे हैं।
यह पूरा आंदोलन NEET, CBSE और अन्य सरकारी भर्ती परीक्षाओं में हुए पेपर लीक और धांधली के खिलाफ है। संगठन 6 जून को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करके केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर अड़ा हुआ है।
इस बीच अमेरिका की बोस्टन यूनिवर्सिटी से पढ़ाई पूरी कर चुके संस्थापक अभिजीत दीपके भी आंदोलन का नेतृत्व करने के लिए भारत लौट रहे हैं। अब देखना यह होगा कि दिल्ली पुलिस इस संवेदनशील माहौल में इस प्रदर्शन को अनुमति देती है या नहीं।















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