Devendra Fadnavis: महाराष्ट्र की राजनीति में कैसे हुई नए युग की शुरुआत? यूं ही गदगद नहीं है BJP!
Maharashtra CM Devendra Fadnavis: गुरुवार,5 दिसंबर 2024 को मुंबई के आजाद मैदान में देवेंद्र फडणवीस के शपथग्रहण समारोह की भव्यता में कोई कमी नहीं थी। मंच और मंच के नीचे मौजूद लोगों से यह साफ हो गया कि देश की आर्थिक राजधानी की सियासी फिजा बदलना भारतीय राजनीति के लिए क्या मायने रखता है। इस शपथग्रहण समारोह की रौनक तब और बढ़ गई, जब काफी ना नुकुर के बाद एकनाथ शिंदे ने भी अजित पवार के साथ डिप्टी सीएम पद की शपथ ली।
प्रदेश में भाजपा और उसकी अगुवाई वाला गठबंधन लगातार तीसरी बार चुनाव जीता है और तीनों ही बार बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। लेकिन, इस बार बीजेपी की ऐतिहासिक जीत और उसपर से मुख्यमंत्री के तौर पर देवेंद्र फडणवीस की ताजपोशी का मतलब कहीं ज्यादा है और महाराष्ट्र की राजनीति पर दूरगामी प्रभाव डाल सकता है।

महाराष्ट्र की सबसे बड़ी सियासी शक्ति के रूप में स्थापित हुई बीजेपी
बीजेपी के लिए यह सफलता सिर्फ अपनी अगुवाई वाली सरकार बनाने तक ही सीमित नहीं है। उसके लिए यह इसलिए और भी ज्यादा महत्वपूर्ण है कि महाराष्ट्र में वह इस बार एकमात्र सबसे बड़ी राजनीतिक शक्ति के रूप में स्थापित हुई है। कांग्रेस पार्टी का कद उसके सामने बहुत ही छोटा हो चुका है। क्षेत्रीय दलों का दबदबा या तो बेजान पड़ चुका है, या फिर शिवसेना और एनसीपी को उसी से सहारा मिला है।
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पांच साल पहले फडणवीस ने सादे समारोह में ली थी शपथ
इस परिवर्तन को हम पांच साल पहले (23 नवंबर,2019) देवेंद्र फडणवीस को सादे समारोह में शपथ लेने की मजबूरी से समझ सकते हैं। तब भी बीजेपी चुनाव जीतकर आई थी। सबसे बड़ी पार्टी बनी थी। लेकिन, उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली उसकी सहयोगी शिवसेना ने ऐसा गच्चा दिया कि सबसे बड़ी पार्टी बनकर भी वह बौनी साबित हुई। फडणवीस ने अजित पवार के साथ गुपचुप तरीके से शपथ ली तो उंगलियां बीजेपी पर ही उठने लगीं।
दशकों बाद शीर्ष पर दिख रही है कोई सियासी पार्टी
लेकिन, पांच साल बाद वही पार्टी वहां पहुंच चुकी है, जहां डंके की चोट पर कई दिन पहले ही शपथग्रहण की तारीख तय हो चुकी थी। मीडिया में एकनाथ शिंदे के शपथ लेने या नहीं लेने की अटकलें चलती रहीं, लेकिन आजाद मैदान में बीजेपी के विधायक दल के नेता के भव्य शपथग्रहण समारोह की तैयारियों में कोई रुकावट नहीं आई। यह महाराष्ट्र की राजनीति में दशकों बाद किसी पार्टी के शीर्ष पर होने का प्रमाण है। यह महाराष्ट्र की राजनीति के लिए एक नए युग की शुरुआत है।
राजनीति में शून्य से शिखर पर पहुंची है भाजपा
बीजेपी को यहां तक पहुंचने में साढ़े तीन दशक से भी ज्यादा लगे हैं। महाराष्ट्र विधानसभा में उसकी पहली धमक तब दिखी थी, जब 1990 में वह 42 सीटें लेकर पहुंची थी। यह वो दौर था जब राम मंदिर आंदोलन अपने चरम पर था। 1995 में बीजेपी 65 सीटें लेकर असेंबली में पहुंची तो उसे शिवसेना के जूनियर पार्टनर के तौर पर पहली बार सत्ता का स्वाद चखने को मिला।
2024 में अकेले बहुमत के करीब पहुंची बीजेपी
पार्टी की जूनियर पार्टनर से सीनियर पार्टनर बनने में भी करीब दो दशक लग गए। 2014 में पहली बार उसे शिवसेना से ज्यादा सीटें मिलीं और मोदी लहर के प्रभाव के बीच 122 सीटें जीतने के दम पर फडणवीस राज्य में पार्टी के पहले मुख्यमंत्री बने। लेकिन,उसी नरेंद्र-देवेंद्र की जोड़ी के प्रभाव ने 2024 में पार्टी को बहुमत (145 सीट) के करीब (132 सीट) पहुंचाकर इतिहास रच दिया।
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बीजेपी की नई सरकार,महाराष्ट्र की राजनीति का नया युग?
- 2024 के विधानसभा चुनाव के परिणाम के बाद देवेंद्र फडणवीस की अगुवाई में शिवसेना और एनसीपी के साथ गठबंधन सरकार बनाकर बीजेपी ने प्रदेश की राजनीति में एक तरह से अपनी 'सर्वोच्चता' स्थापित की है।
- महाराष्ट्र का जनादेश यहां के राजनीतिक परिदृश्य के लिए एक पार्टी के प्रभुत्व के पक्ष में नजर आया है,जो बीजेपी के भविष्य के लिए आकर्षक संभावना है।
- बीते वर्षों में धीरे-धीरे बीजेपी ने विदर्भ, उत्तर और पश्चिम महाराष्ट्र में कांग्रेस का किला ध्वस्त करने में कामयाबी हासिल की है, जिसे वापस पाने की स्थिति में फिलहाल कोई नहीं दिखता।
- शिवसेना और एनसीपी में टूट होने की वजह से जहां दोनों दलों का एक गुट बुरी तरह से कमजोर पड़ चुका है, वहीं दूसरा गुट सीट संख्या के मामले में भले ही टिका हुआ है, लेकिन उनका भी सहारा बीजेपी ही लग रही है।
- इस तरह से महाराष्ट्र की राजनीति में अब बीजेपी ने खुद को सबसे बड़ी राजनीतिक शक्ति के रूप में स्थापित कर लिया है और उसकी चुनौतियों से निपटने के लिए प्रतिद्वंद्वियों को बहुत कड़े जमीनी संघर्ष की आवश्यकता पड़ सकती है।











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