Punjab Mukh Mantri Sehat Yojana: हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी और नवजात देखभाल में बड़ा सहारा
Punjab Mukh Mantri Sehat Yojana: पंजाब सरकार की भगवंत मान सरकार द्वारा चलाई जा रही 'मुख्यमंत्री सेहत योजना' राज्य के लोगों के लिए एक मजबूत स्वास्थ्य सुरक्षा कवच बनती जा रही है। खासकर गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं के इलाज में यह योजना बहुत बड़ी राहत साबित हो रही है।
इस योजना के तहत जटिल प्रसव, हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी और गंभीर रूप से बीमार नवजात बच्चों का इलाज पूरी तरह कैशलेस तरीके से किया जा रहा है, जिससे गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों पर आर्थिक बोझ नहीं पड़ रहा है।

हाई-रिस्क गर्भावस्था की बढ़ती चुनौती
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-5) पर आधारित एक अध्ययन के अनुसार देश में लगभग हर दो में से एक गर्भावस्था हाई-रिस्क श्रेणी में आती है। इसका मतलब है कि गर्भावस्था के दौरान जटिलताओं की संभावना काफी अधिक रहती है।
हाई-रिस्क गर्भावस्था के है क्या कारण?
- महिलाओं में शिक्षा की कमी
- गरीबी और कमजोर आर्थिक स्थिति
- दो बच्चों के बीच कम अंतर
- पहले हुई जटिल डिलीवरी या सिजेरियन ऑपरेशन
- सही समय पर स्वास्थ्य जांच न होना
इन कारणों की वजह से खासकर कमजोर वर्ग की महिलाओं को ज्यादा खतरा होता है, जिससे मातृ और शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत करने की जरूरत महसूस होती है।
सेहत कार्ड से कैशलेस मातृत्व इलाज
'सेहत कार्ड' इस योजना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसके जरिए गर्भवती महिलाओं को अस्पताल में कैशलेस इलाज मिल रहा है। खासकर उन मामलों में जहां सिजेरियन डिलीवरी या जटिल प्रसव की जरूरत पड़ती है, यह कार्ड बेहद मददगार साबित हो रहा है।
25 मई 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार
- कुल 7,300 मातृत्व और नवजात उपचार मामलों में इलाज हुआ
- इस पर लगभग ₹7.04 करोड़ खर्च किए गए
- इनमें से करीब 5,300 हाई-रिस्क सिजेरियन डिलीवरी शामिल थीं
- इन पर लगभग ₹6.37 करोड़ खर्च हुए
इससे साफ है कि बड़ी संख्या में महिलाओं को बिना आर्थिक चिंता के सुरक्षित इलाज मिला है।
आर्थिक तनाव से महिलाओं को मिली राहत
पटियाला की 28 वर्षीय दीपिका, जिन्हें गर्भावस्था में एनीमिया और अन्य जटिलताएं थीं, बताती हैं कि उनका पूरा सिजेरियन ऑपरेशन सेहत कार्ड के जरिए बिना किसी खर्च के हुआ। उनके परिवार के लिए यह बड़ी राहत थी।
इसी तरह दीक्षा सोनकर ने बताया कि तीसरी डिलीवरी के दौरान उन्हें समय पर अस्पताल में इलाज मिला और पूरा खर्च योजना के तहत कैशलेस रहा। उनके पति विकास सोनकर, जो रोज़ मजदूरी करते हैं, बताते हैं कि पहले मेडिकल इमरजेंसी में उन्हें उधार या कर्ज लेना पड़ता था, लेकिन इस योजना ने उनका बड़ा आर्थिक बोझ कम कर दिया है।
नवजात शिशुओं के लिए विशेष स्वास्थ्य सेवाएं
इस योजना में सिर्फ माताओं का ही नहीं, बल्कि नवजात शिशुओं का भी खास ध्यान रखा जा रहा है। गंभीर रूप से बीमार और समय से पहले जन्मे बच्चों को अलग-अलग स्तर की देखभाल दी जा रही है।
कुल 2,094 नवजात शिशुओं का इलाज किया गया
- 881 बच्चों का बेसिक नियोनेटल केयर में इलाज
- 777 बच्चों का स्पेशल नियोनेटल केयर में इलाज
- 207 बच्चों को इंटेंसिव केयर (CPAP, वेंटिलेशन आदि)
- 116 बेहद कमजोर नवजातों को एडवांस्ड केयर
- 64 गंभीर स्थिति वाले बच्चों को क्रिटिकल केयर
- 18 बच्चों को लंबे समय तक चलने वाली क्रॉनिक केयर
इन सभी इलाजों में लाखों रुपये का खर्च सरकार ने वहन किया, जिससे परिवारों को राहत मिली।
बड़ी संख्या में हुआ रजिस्ट्रेशन
यह योजना धीरे-धीरे पूरे राज्य में एक बड़े स्वास्थ्य सुरक्षा सिस्टम के रूप में उभर रही है। अब तक लगभग 44.8 लाख लोगों ने इस योजना के तहत रजिस्ट्रेशन कराया है। इससे साफ है कि लोग इस योजना पर भरोसा कर रहे हैं और इसका लाभ लगातार बढ़ रहा है।
पंजाब की 'मुख्यमंत्री सेहत योजना' ने खासकर गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं के इलाज को आसान और सुलभ बनाया है। हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी जैसे गंभीर मामलों में यह योजना गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों के लिए बड़ी राहत बनकर सामने आई है। इससे न सिर्फ सुरक्षित प्रसव संभव हो रहा है, बल्कि आर्थिक तनाव भी काफी हद तक कम हो रहा है।












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