Maharashtra CM: देवेंद्र फडणवीस की हुई ताजपोशी,अब 'ट्रिपल इंजन' सरकार पर रह सकता है महायुति का जोर
Devendra Fadnavis as Maharashtra CM: महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद भले ही लगभग दो हफ्ते लग गए हों, लेकिन देवेंद्र फडणवीस की अगुवाई में जो सरकार बनी है, उससे लगता है कि यह सरकार आगे तेजी से निर्णय लेने वाली सरकार दिखाई देगी। राजनीतिक तौर पर देखें तो इस गठबंधन के सामने अब स्थानीय निकायों, जिला परिषदों और सबसे बढ़कर बीएमसी चुनावों की चुनौतियां आने वाली हैं।
अंत भला तो सब भला। गुरुवार को देवेंद्र फडणवीस के साथ जिस तरह से एकनाथ शिंदे और अजित पवार ने शपथग्रहण में एकजुटता दिखाई,उससे प्रदेश के लिए बहुत ही सकारात्मक संदेश निकला है। क्योंकि,नई सरकार के गठन में देरी होने की वजह से प्रदेश की जनता की ओर से शानदार जनादेश मिलने के बाद भी असमंज की स्थिति आशंकाओं को जन्म दे रहे थे।

अब ट्रिपल इंजन सरकार पर फोकस!
एक रिपोर्ट के मुताबिक बीएमसी चुनाव अगले साल की शुरुआत में ही करवाए जा सकते हैं। इसमें पहले से ही तीन साल की देरी चल रही है। अब जब राज्य का निजाम भाजपा के हाथ में आ चुका है तो मुंबई में पार्टी के विधायकों की उम्मीदें भी आसमान छूने लगी हैं। यही वजह है कि जैसे देवेंद्र फडणवीस के सीएम बनने की खबर पक्की हो गई तो मुंबई के दहिसर की भाजपा विधायक मनीषा चौधरी की खुशी का ठिकाना नहीं रहा।
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उन्होंने कहा,'फडणवीस पहले भी मुख्यमंत्री थे। कोविड महामारी के दौरान उन्होंने खुद को एक प्रभावी विपक्ष का नेता साबित किया और फिर उपमुख्यमंत्री बने और शिंदे के साथ काम किया। अब हम निकाय चुनाव जीतेंगे और यह एक ट्रिपल इंजन सरकार होगी।'
'जनता की उम्मीदों पर खरा उतरने वाली सरकार होगी'
वहीं राज्य की ओबीसी नेता और बीजेपी एमएलसी पंकजा मुंडे ने उम्मीद जताई कि'उनकी लीडरशिप महाराष्ट्र के लोगों के सपनों और आकांक्षाओं को पूरा करने में निर्णायक साबित हो।' जबकि, भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े ने एक पोस्ट में लिखा कि प्रदेश के लोगों ने महायुति में बहुत भरोसा दिखाया है और देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली सरकार इस पर खरा उतरेगी।
स्थिर और बड़े फैसले लेने वाली सरकार!
देवेंद्र फडणवीस की अगुवाई वाली महायुति सरकार पिछली एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली सरकार से इस मायने में अलग है कि इस बार बीजेपी को इतनी सीटें मिली हैं कि वह हमेशा निर्णायक भूमिका में होगी। इसके बावजूद जिस तरह से शिंदे को सरकार में शामिल करने के लिए भाजपा ने धैर्य दिखाया है, उससे यह संदेश भी मिला है कि वह गठबंधन धर्म निभाना चाहती है।
लेकिन, सच्चाई ये है कि सीटों का आंकड़ों ने उसे यह शक्ति दे रखी है कि वह रोजाना सरकार गिरने के भय से समझौते वाली सरकार चलाने के लिए मजबूर नहीं होगी। महाराष्ट्र की जनता ने उसे ऐसा जनादेश दिया है कि सबसे बड़ी पार्टी निर्णायक भूमिका निभाते हुए बड़े फैसले लेने में सक्षम होगी और सरकार की स्थिरता पर संकट की नौबत के आसार नहीं रहेंगे।
महायुति की अगली चुनौती
लेकिन,राजनीतिक तौर पर इस गठबंधन की पहली अग्निपरीक्षा बीएमसी, अन्य शहरी निकायों और जिला परिषद चुनावों में होना है। एशिया के सबसे अमीर नगर निगम बीएमसी में करीब 27 वर्षों से उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली शिवसेना (यूबीटी) का कब्जा है।
अगर विधानसभा चुनावों के नतीजों को देखें तो लगता है कि बीएमसी समेत अन्य स्थानीय निकाय के चुनावों में महायुति का पलड़ा भारी हो सकता है। मसलन,मुंबई की 36 सीटों में से 22 पर महायुति जीता है,जिसमें से अकेले बीजेपी के खाते में 15 सीटें गई हैं।
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जबकि, 14 सीटों पर विपक्षी महा विकास अघाड़ी का कब्जा हुआ है, जिनमें से 10 सीटें उद्धव की पार्टी को मिली हैं। लेकिन, लोकसभा चुनावों के बाद जिस तरह से विधानसभा चुनावों के नतीजे पूरी तरह से बदल गए, इसलिए महायुति के लिए बीएमसी समेत अन्य निकाय चुनावों को हल्के में लेना जोखिम से कम नहीं होगा।












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