Karnataka Congress Crisis: सिद्धारमैया राज्यसभा, DK शिवकुमार मुख्यमंत्री? कर्नाटक में ‘बिहार मॉडल' पर मंथन तेज
Karnataka Congress Crisis News: कर्नाटक विधानसभा चुनाव 2023 में प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता में आई कांग्रेस सरकार के भीतर मुख्यमंत्री पद को लेकर चल रही अंदरूनी खींचतान एक बार फिर चरम पर पहुंच गई है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया (Siddaramaiah) और उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार (D.K. Shivakumar) का 26 मई को अचानक दिल्ली दरबार पहुंचना राज्य की राजनीति में एक बड़े नेतृत्व परिवर्तन (Leadership Change) का साफ संकेत दे रहा है।
हालांकि कांग्रेस इसे नियमित बैठक बता रही है, लेकिन पार्टी सूत्रों के मुताबिक हाईकमान अब कर्नाटक में सत्ता हस्तांतरण के पक्ष में दिखाई दे रहा है।

दरअसल, 2023 में कांग्रेस की बड़ी जीत के बाद से ही सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच नेतृत्व को लेकर खींचतान की खबरें लगातार सामने आती रही हैं। पार्टी के कई विधायक पहले भी शिवकुमार को मुख्यमंत्री बनाने की मांग उठा चुके हैं।
Will Siddaramaiah Shift to Rajya Sabha: क्या राज्यसभा जाएंगे सिद्धारमैया? क्या है कांग्रेस का 'बिहार मॉडल' फॉर्मूला?
राजनीतिक गलियारों में अब सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की है कि कांग्रेस नेतृत्व सिद्धारमैया को राज्यसभा भेजने का विकल्प तलाश रहा है। सूत्रों के मुताबिक पार्टी की ओर से उन्हें राज्यसभा सीट ऑफर की जा सकती है। साथ ही उनके बेटे यतींद्र सिद्धारमैया को राज्य मंत्रिमंडल में जगह देने पर भी विचार हो रहा है।
यदि ऐसा होता है तो यह रणनीति कुछ हद तक बिहार मॉडल जैसी मानी जा रही है। हाल ही में बिहार में नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने और उनके बेटे निशांत कुमार को सरकार में भूमिका मिलने की चर्चा ने राजनीतिक हलकों में काफी सुर्खियां बटोरी थीं।
दरअसल,सिद्धारमैया के लिए राज्यसभा सीट की तैयारी की जा रही है। कर्नाटक से जून 2026 में राज्यसभा की चार सीटें खाली हो रही हैं (जिसमें मल्लिकार्जुन खड़गे की सीट भी शामिल है)। कांग्रेस अपने संख्या बल के दम पर आसानी से तीन सीटें जीत सकती है। इनमें से एक सीट सिद्धारमैया को देकर उन्हें दिल्ली की राजनीति में लाया जा सकता है।
हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक- सिद्धारमैया के मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बदले उनके बेटे यतींद्र सिद्धारमैया को कर्नाटक की नई कैबिनेट में एक महत्वपूर्ण मंत्री पद (संभवतः स्वास्थ्य मंत्रालय) दिया जा सकता है।
क्या फिर इंतजार करना पड़ेगा डीके शिवकुमार को?
हालांकि सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर सिद्धारमैया मुख्यमंत्री पद छोड़ते हैं तो क्या डीके शिवकुमार को आखिरकार मुख्यमंत्री बनाया जाएगा? सूत्रों का कहना है कि स्थिति अभी इतनी सीधी नहीं है। कांग्रेस नेतृत्व भले सत्ता परिवर्तन चाहता हो, लेकिन सिद्धारमैया खेमे की इच्छा नहीं है कि शिवकुमार सीधे उनकी जगह लें।
ऐसे में पार्टी के भीतर एक और विकल्प पर चर्चा हो रही है कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को समझौता उम्मीदवार के तौर पर मुख्यमंत्री बनाया जा सकता है। हालांकि फिलहाल इसे सबसे कमजोर संभावना माना जा रहा है। यदि ऐसा होता है तो कांग्रेस संगठन में भी बड़ा फेरबदल संभव है। राहुल गांधी, केसी वेणुगोपाल को पार्टी अध्यक्ष पद की बड़ी जिम्मेदारी देने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।
कांग्रेस आला हाईकमान के रुख ने बढ़ाई हलचल
सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल और कर्नाटक प्रभारी रणदीप सुरजेवाला तीनों कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन के पक्ष में माने जा रहे हैं। इसी वजह से सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार का दिल्ली दौरा काफी अहम माना जा रहा है।
दिल्ली पहुंचने के बाद जब मीडिया ने डीके शिवकुमार से पूछा कि क्या वह कर्नाटक के अगले मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं, तो उन्होंने कोई सीधा जवाब नहीं दिया। हालांकि कैमरों के सामने उनकी मुस्कान ने राजनीतिक अटकलों को और हवा दे दी।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस अभी इस बदलाव को लेकर पूरी तरह अंतिम फैसला नहीं कर पाई है, लेकिन अंदरखाने मंथन तेज है।
2023 से ही चल रही है 'पावर शेयरिंग' की चर्चा
जब 2023 में कांग्रेस ने कर्नाटक विधानसभा चुनाव में बड़ी जीत हासिल की थी, तभी यह चर्चा सामने आई थी कि सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच ढाई-ढाई साल के मुख्यमंत्री कार्यकाल का फॉर्मूला तय हुआ है। उस हिसाब से नवंबर 2025 में सत्ता परिवर्तन होना था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उस दौरान दोनों नेताओं की कई "ब्रेकफास्ट मीटिंग्स" भी चर्चा में रहीं, लेकिन नेतृत्व परिवर्तन टल गया। अब एक बार फिर वही सवाल उठने लगे हैं।
क्यों अहम है राज्यसभा का विकल्प?
राजनीतिक हलकों में यह चर्चा इसलिए भी तेज हुई है क्योंकि जून में कर्नाटक से राज्यसभा की चार सीटों पर चुनाव होने वाले हैं। कांग्रेस को इनमें से कम से कम तीन सीटें जीतने का भरोसा है। ऐसे में 77 वर्षीय सिद्धारमैया के लिए राज्यसभा का रास्ता तैयार किया जा सकता है। इससे पार्टी नेतृत्व कर्नाटक में नई राजनीतिक व्यवस्था लागू करने की कोशिश कर सकता है।
कर्नाटक कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह है कि नेतृत्व परिवर्तन की स्थिति में पार्टी के भीतर संतुलन कैसे बनाए रखा जाए। सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार दोनों ही बड़े जनाधार वाले नेता हैं और किसी एक को पूरी तरह नजरअंदाज करना कांग्रेस के लिए जोखिम भरा हो सकता है। फिलहाल कांग्रेस हाईकमान की बैठकों और दिल्ली में चल रही राजनीतिक गतिविधियों पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं। आने वाले दिनों में कर्नाटक की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।














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