Pakistani Shia: न पैसे निकालने दिए, न सामान समेटने दिया, UAE ने हजारों पाकिस्तानी शियाओं को भगाया वापस
Pakistani Shia: अमेरिका-ईरान की जंग में अगर कोई तबीयत से पिसा है तो वो है पाकिस्तान। पेट्रोल-डीजल-गैस की मार के बाद अब UAE पाकिस्तानियों को खिलाफ सीधे एक्शन लेने पर आ गया है। दरअसल UAE की सरकार ने कई पाकिस्तानियों को बिना कोई समय दिए अपने देश से भगा दिया है।
पाकिस्तान के चकवाल गांव जिले के कई गांवों में 100 से अधिक शिया मुस्लिम UAE से वापस लौटाए गए हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि ये लोग बिना नौकरी, बिना सामान और कई मामलों में अपनी सालों की जमा पूंजी तक लिए बिना पाकिस्तान खदेड़े गए हैं। ये सिर्फ कुछ लोग नहीं हैं, बल्कि उन हजारों पाकिस्तानी शियाओं का हिस्सा हैं जिन्हें ईरान युद्ध के दौरान UAE से वापस भेजा गया है।

बैंक से पैसे निकालने का तक नहीं दिया मौका
पत्रकारों ने 103 ऐसे पाकिस्तानियों के इमिग्रेशन दस्तावेज, वीजा स्टेटस के स्क्रीनशॉट और फ्लाइट डिटेल्स की जांच की, जिन्होंने खुद को निर्वासित शिया बताया। इनमें से 24 लोगों का इंटरव्यू भी लिया गया। सभी लोगों ने दावा किया कि उन्हें दर्जनों अन्य शिया मुसलमानों के साथ अचानक विमान में बैठाकर पाकिस्तान भेज दिया गया। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें अपना सामान लेने या बैंक में जमा अपनी बचत निकालने तक का मौका नहीं दिया गया।
लीगल तरीके से रह रहे, फिर भी भगाया
साउथ एशिया मॉर्निंग पोस्ट में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, चकवाल में 5 मई को ली गई तस्वीरों में दो पाकिस्तानी शिया मुस्लिम युवक दिखाई दिए, जिन्हें UAE से वापस भेजा गया था। इनमें एक 24 साल के एयरपोर्ट कस्टमर सर्विस अधिकारी और एक 26 साल के बिल्डिंग सिक्योरिटी अधिकारी शामिल थे। दोनों लंबे समय से UAE में लीगल तरीके से काम कर रहे थे, लेकिन अमेरिका-इजरायल और ईरान युद्ध के बाद शुरू हुए तनाव के बीच उन्हें भी अन्य लोगों के साथ वापस भेज दिया गया।
7,500 पाकिस्तानी शियाओं को भेजे जाने का दावा
पाकिस्तानी शिया राजनीतिक संगठन मजलिस वहदत-ए-मुस्लिमीन द्वारा तैयार किए गए एक डेटाबेस के मुताबिक, 28 फरवरी से अब तक करीब 7,500 पाकिस्तानी शियाओं को खाड़ी देश UAE से पाकिस्तान वापस भेजा जा चुका है। यही वह समय था जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमले शुरू किए थे। संगठन के प्रवक्ता मोहसिन आबिदी का कहना है कि असली संख्या इससे कहीं ज्यादा हो सकती है।
ईरान युद्ध के बाद तेज हुए निष्कासन
पाकिस्तान के शिया समुदाय के नेताओं का कहना है कि ईरान युद्ध के दौरान इन निष्कासनों में अचानक तेजी आई। उनका मानना है कि खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव और ईरान द्वारा UAE पर मिसाइल और ड्रोन हमलों के बाद स्थिति और खराब हो गई। हालांकि, रॉयटर्स यह पता नहीं लगा सका कि आखिर UAE अधिकारियों ने किन आधारों पर इन पाकिस्तानियों को निष्कासन के लिए चुना।
UAE सरकार ने सवालों पर नहीं दिया जवाब
UAE के विदेश मंत्रालय से जब पत्रकारों ने इस पूरे मामले को लेकर सवाल पूछे, तो मंत्रालय ने किसी भी तरह की टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। इससे पूरे मामले को लेकर और ज्यादा सवाल खड़े हो गए हैं, क्योंकि अभी तक यह साफ नहीं हो पाया है कि इतने बड़े स्तर पर निष्कासन आखिर क्यों किए गए। जबकि पाकिस्तानी सरकार अपनी इज्जत बचाने के लिए मीडिया में यह कह रही है कि उन्हें धार्मिक आधार पर नहीं निकाला गया। लेकिन अगर आंकड़े देखें तो सभी 7500 लोगों में से 90 फीसदी लोग शिया हैं।
चुप्पी साधे पाक सरकार, अधिकारी ने खोली पोल
हालांकि, पाकिस्तान सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम गुप्त रखने की शर्त पर रॉयटर्स के पत्रकार को बताया कि इस्लामाबाद इस पूरे मामले की समीक्षा कर रहा है। अधिकारी ने कहा कि UAE से हजारों पाकिस्तानियों को वापस भेजा गया है, जिनमें अधिकांश शिया समुदाय से थे। उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान सरकार ने राजनयिक कारणों की वजह से इस मुद्दे को सार्वजनिक रूप से ज्यादा नहीं उठाया है, लेकिन इन कारणों का डिटेल से खुलासा नहीं किया गया।
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