त्रिलोक सिंह की सक्सेस स्टोरी: भारतीय सेना में बनना चाहते थे फौजी, NDA में फेल होने के बाद क्रैक की UPSC
Trilok Singh Karanot jodhpur Rajasthan: असफलता को अवसर में बदलने का नाम है त्रिलोक सिंह करणोत। कभी भारतीय सेना में जाने का सपना देखने वाले त्रिलोक ने जब मेडिकल कारणों से NDA में चयन के बाद भी बाहर होना पड़ा, तो हार नहीं मानी बल्कि एक नया सपना देखा। IAS अधिकारी बनने का। और उसी सपने को साकार करते हुए UPSC 2024 में देशभर में 20वीं रैंक हासिल कर ली।
त्रिलोक सिंह, जोधपुर के डिगाड़ी इलाके में रहते हैं और ओसियां तहसील के भाकरी गांव से ताल्लुक रखते हैं। उनके पिता चूनसिंह भारतीय सेना में सूबेदार पद से रिटायर हो चुके हैं और अब महात्मा गांधी अस्पताल में असिस्टेंट सिक्योरिटी ऑफिसर के रूप में कार्यरत हैं। त्रिलोक की मां धनकंवर एक गृहिणी हैं, और बहन किरण कंवर असिस्टेंट प्रोफेसर बनने की तैयारी कर रही हैं।

सेना से सिविल सेवा तक का सफर
त्रिलोक की प्रारंभिक शिक्षा आर्मी पब्लिक स्कूल, जोधपुर में हुई, जहाँ उन्होंने दसवीं में 95% और बारहवीं में 96% अंक प्राप्त किए। उन्होंने किरोड़ीमल कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक और जोधपुर के जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में परास्नातक किया। सेना में जाने के लिए उन्होंने NDA की परीक्षा दी और पूरे देश में 232वीं रैंक भी हासिल की, लेकिन मेडिकल फिटनेस के कारण चयन नहीं हो पाया। इस मोड़ पर उन्होंने सिविल सेवा की ओर रुख किया।

सेल्फ स्टडी से सफलता तक
त्रिलोक ने UPSC की तैयारी ज्यादातर जोधपुर में रहकर सेल्फ स्टडी के जरिए की। वह डिगाड़ी की एक लाइब्रेरी में रोज़ सुबह 8 बजे से रात 11 बजे तक पढ़ाई करते थे। कुछ ऑनलाइन कोर्स का सहारा भी लिया, लेकिन मुख्य रूप से उन्होंने अपनी मेहनत और अनुशासन से खुद को साबित किया। यह उनका तीसरा प्रयास था, लेकिन इंटरव्यू देने का पहला मौका था—और इस बार वे 20वीं रैंक लेकर देशभर में छा गए।
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शौक और जीवन दर्शन
पढ़ाई के अलावा त्रिलोक को टेनिस ग्रैंड स्लैम टूर्नामेंट्स लाइव देखने का शौक है, साथ ही वे कविता लेखन और फिल्म सीरीज देखने में भी रुचि रखते हैं। उनका मानना है कि आत्मविश्वास और निरंतरता से कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। वे NET-JRF में भी चयनित हो चुके हैं।
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प्रेरणा के स्रोत
त्रिलोक को पढ़ाई के दौरान सबसे ज्यादा प्रेरणा अपनी बहन किरण से मिलती थी। आज जब उनके चयन की खबर आई, तो जोधपुर में उनके घर पर बधाइयों का तांता लग गया। राजपूत समाज समेत इलाके के लोग उन्हें बधाई देने पहुंचे।
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