Kashmir Earthquake Today: जम्मू-कश्मीर और अंडमान में भूकंप के तेज झटके, रिक्टर स्केल पर 4.8 रही तीव्रता
Kashmir Earthquake Today: जम्मू-कश्मीर में आज तड़के भूकंप के तेज झटकों ने लोगों को दहशत में डाल दिया। 2 फरवरी 2026 की सुबह करीब 5:35 बजे आए इस भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 4.6 मापी गई। कश्मीर घाटी के श्रीनगर, पुलवामा, बारामुला और कुपवाड़ा जैसे जिलों में धरती इस कदर हिली कि लोग कड़कड़ाती ठंड में भी अपने घरों से बाहर निकल आए।
भूकंप का केंद्र उत्तरी कश्मीर बताया जा रहा है, जिसका असर सीमा पार पाकिस्तान में भी महसूस किया गया। यह घटना हिमालयी क्षेत्र की भूगर्भीय संवेदनशीलता को एक बार फिर रेखांकित करती है।

J&K Earthquake: कश्मीर घाटी में तड़के हलचल
सोमवार की अलसुबह जब घाटी के लोग गहरी नींद में थे, तभी 5:35 बजे आए भूकंप ने सबको झकझोर दिया। रिक्टर पैमाने पर 4.8 की तीव्रता वाले इस भूकंप का केंद्र बडगाम में जमीन से 10 किलोमीटर नीचे स्थित था। झटके इतने तेज थे कि लोग घबराहट में घरों से बाहर निकल आए। गनीमत रही कि अब तक किसी जान-माल की हानि की सूचना नहीं मिली है, लेकिन प्रशासन स्थिति पर पैनी नजर रखे हुए है और प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा जांच जारी है।
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Earthquake in Andaman and Nicobar: निकोबार द्वीप समूह में भी डोली धरती
कश्मीर से पहले, हिंद महासागर के प्रहरी अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में भी धरती डोली। रात 3:31 बजे यहां 4.6 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया। इसका केंद्र भी सतह से 10 किलोमीटर की गहराई में निकोबार क्षेत्र के पास था। द्वीप समूह में अक्सर होने वाली इन हलचलों को वैज्ञानिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। फिलहाल यहां भी स्थिति नियंत्रण में है और सुनामी जैसी कोई चेतावनी जारी नहीं की गई है, जो स्थानीय निवासियों के लिए राहत की बात है।
टेक्टोनिक प्लेट्स का विज्ञान
पृथ्वी की ऊपरी सतह मुख्य रूप से 7 विशाल टेक्टोनिक प्लेटों से बनी है। ये प्लेटें स्थिर नहीं हैं और लगातार बहुत धीमी गति से घूमती रहती हैं। जब ये प्लेटें घूमते हुए आपस में टकराती हैं या एक-दूसरे के ऊपर चढ़ती हैं, तो फाल्ट लाइन पर भारी घर्षण पैदा होता है। इस प्रक्रिया में जमा हुई ऊर्जा जब अचानक बाहर निकलती है, तो वह तरंगों के रूप में धरती को कपा देती है। हिमालयी क्षेत्र विशेष रूप से दो प्लेटों के दबाव के कारण अधिक संवेदनशील है।
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सुरक्षा और सावधानी के उपाय
भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदा की भविष्यवाणी सटीक रूप से संभव नहीं है, इसलिए सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है। झटके महसूस होने पर तुरंत खुले मैदान की ओर भागें या किसी मजबूत मेज के नीचे शरण लें। लिफ्ट का प्रयोग करने से बचें और कांच की खिड़कियों से दूर रहें। निर्माण कार्यों में भूकंप-रोधी तकनीक का उपयोग करना और समय-समय पर मॉक ड्रिल करना भविष्य के बड़े खतरों को कम करने में सहायक हो सकता है। सामुदायिक जागरूकता ही हमें सुरक्षित रख सकती है।












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