Anti Reservation Protest: आरक्षण नीति के खिलाफ क्यों हुआ INDIA bloc? J&K में कोटा घटाने के लिए आंदोलन
Anti Reservation Protest: कांग्रेस नेता राहुल गांधी पूरे देश में घूम-घूमकर सुप्रीम कोर्ट से निर्धारित 50% आरक्षण की सीमा तोड़ने की वकालत कर रहे हैं। इसके लिए जातिगत जनगणना कांग्रेस की अगुवाई वाले इंडिया ब्लॉक का प्रमुख राजनीतिक स्टैंड बन चुका है। लेकिन, इसी विपक्षी गठबंधन का जम्मू-कश्मीर में स्टैंड अलग नजर आ रहा है, जहां वह इसी वर्ष चुनाव के बाद सरकार में भी आ चुका है।
जम्मू कश्मीर में नेशनल कांफ्रेंस की अगुवाई वाली गठबंधन सरकार है और इसके नेता उमर अब्दुल्ला अक्टूबर में हुए विधानसभा चुनावों के बाद यहां के मुख्यमंत्री बने हैं। अब इन्हीं की पार्टी के श्रीनगर से सांसद आगा रूहुल्लाह मेहदी ने आरक्षण नीति में बदलाव के लिए आंदोलन शुरू कर दिया है।

Anti Reservation Protest: नेशनल कांफ्रेंस के सांसद ने सामान्य वर्ग का कोटा बढ़ाने के लिए शुरू किया आंदोलन
नेशनल कांफ्रेंस के सांसद मेहदी ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के सरकारी आवास के बाहर ही शांतिपूर्ण प्रदर्शन का आह्वान किया है। उनके इस एलान के जवाब में सीएम अब्दुल्ला ने कहा है कि वह 'आरक्षण के मुद्दे को लेकर लोगों की भावनाओं को समझते हैं।'उन्होंने कहा है कि इस मसले पर विचार के लिए एक कैबिनेट सब-कमेटी बनाई जा रही है।
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जम्मू कश्मीर में कांग्रेस भी नेशनल कांफ्रेंस के साथ ही मिलकर चुनाव लड़ी है और वह अब्दु्ल्ला सरकार को बाहर से समर्थन दे रही है। विधानसभा चुनावों के लिए नेशनल कांफ्रेंस ने जो घोषणापत्र बनाया था, उसमें भी सरकार बनने पर केंद्र शासित प्रदेश की नई आरक्षण नीति में बदलाव करने का वादा किया गया था। इस नीति के तहत ओबीसी, आदिवासियों का आरक्षण कोटा बढ़ाया गया है।
Anti Reservation Protest: उमर अब्दुल्ला की पार्टी के घोषणापत्र में भी शामिल रहा है यह वादा
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा है कि इस मामले की सुनवाई जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाई कोर्ट में भी चल रही है। उनके मुताबिक, 'जब अंतिम कानूनी विकल्प समाप्त हो जाएंगे, तो बेशक हम किसी भी फैसले को मानने के लिए बाध्य होंगे।' उनका कहना है कि 'आपकी सरकार वह कर रही है जो कोई भी जिम्मेदार सरकार करेगी, सबको विश्वास दिलाते हैं कि सबकी सुनी जाएगी और पूरी प्रक्रिया के बाद एक सही फैसले पर पहुंचा जाएगा।'
Anti Reservation Protest: इसी साल उपराज्यपाल प्रशासन ने चुनावों से पहले ओबीसी, आदिवासियों का कोटा बढ़ाया था
दरअसल, इसी साल चुनावों से पहले जब जम्मू और कश्मीर में निर्वाचित सरकार नहीं थी तो उपराज्यपाल मनोज सिन्हा की अगुवाई वाले प्रशासन ने जम्मू और कश्मीर आरक्षण नियम,2005 में बदलाव कर दिया था। इससे ओबीसी और आदिवासियों का कोटा बढ़ गया था। तभी से इस बदलाव का विरोध होने लगा था कि इससे सामान्य वर्गों को नुकसान होगा।
Anti Reservation Protest: सामान्य वर्गों का आरक्षण घटने की वजह से हो रहा है नई नीति का विरोध
इसके विरोध में दावे किए गए कि इसकी वजह से सामान्य वर्ग का आरक्षण घटकर करीब 40% ही रह जाएगा। ओपन मेरिट श्रेणी की वकालत करने वालों की दलील है कि 1992 का सुप्रीम कोर्ट का फैसला भी आरक्षण की सीमा अधिकतम 50% ही निर्धारित करता है, इसलिए ओबीसी और आदिवासियों के लिए कोटा बढ़ाया जाना संविधान के खिलाफ है।
Anti Reservation Protest: आरक्षण नीति में केंद्र सरकार के शासन के दौरान हुआ था किस तरह का बदलाव?
उपराज्यपाल के जरिए केंद्र सरकार ने केंद्र शासित प्रदेश के लिए जो नए नियम लागू किए हैं, उसके तहत पहाड़ी और अन्य आदिवासी समुदायों को अलग से 10% कोटा और ओबीसी का कोटा बढ़ाकर 8% किए जाने की व्यवस्था की गई थी। इसकी वजह से सामान्य वर्ग के लिए उपलब्ध सीटों में कमी हो गई और इंडिया ब्लॉक की ओर से उसी का विरोध किया जा रहा है और सामान्य श्रेणी के हित में पहले वाली व्यवस्था कायम करने की मांग हो रही है।
केंद्र के फैसले के तहत चार नई जनजातीय पहाड़ी जाति समूह, पहाड़ी जनजाति,कोली और गड्डा ब्राह्मण को अनुसूचित जनजाति में शामिल करते हुए उनके लिए अलग से 10% आरक्षण की व्यवस्था की गई थी। इनके अलावा ओबीसी में 15 नई जातियों को शामिल करते हुए इस वर्ग की आरक्षण सीमा को 5% से बढ़ाकर 8% कर दिया गया था।
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Anti Reservation Protest: जम्मू और कश्मीर में पहले क्या थी आरक्षण की व्यवस्था?
जम्मू और कश्मीर में पुरानी व्यवस्था के तहत अनुसूचित जाति (SC) के लिए मात्र 8%,अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए 10%, ओबीसी के लिए 4%, वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) और अंतरराष्ट्रीय सीमा (IB) के नजदीक रहने वाले निवासियों के लिए 4%, पिछड़े इलाकों के निवासी (RBA) को 10% और आर्थिक तौर पर पिछड़े वर्ग(EWSs) के लिए 10% कोटा निर्धारित था।












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