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'हमारा अगला कदम जाति जनगणना कराना है', संविधान चर्चा में बरसे राहुल गांधी, सावरकर पर भी की टिप्पणी

Parliament Winter Session Rahul Gandhi: भारत के संविधान को अपनाने की 75वीं वर्षगांठ पर चर्चा के दौरान लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर जमकर निशाना साधा। राहुल गांधी ने कहा कि जैसे एकलव्य का अंगूठा काटा गया था। ठीक वैसे ही मोदी सरकार हिन्दुस्तान के युवाओं का अंगूठा काट रही है। राहुल गांधी ने यह भी कहा कि हमारा अगला कदम जाति जनगणना कराना है।

राहुल गांधी ने वीर सावरकर पर भी टिप्पणी की है। राहुल गांधी ने अपने हाथ में संविधान की किताब पकड़े हुए वीर सावरकर को कोट किया और कहा, "आपके नेता ने (सावरकर) कहा था कि भारत के संविधान में कुछ भी भारतीय नहीं है। इसलिए आप इनकी (सावरकर की) प्रशंसा झिझकते हुए करते हैं क्योंकि आप ऐसा करने के लिए मजबूर हैं।"

Parliament Winter Session Rahul Gandhi

राहुल गांधी ने कहा- हम जाति जनगणना कराएंगे

राहुल गांधी ने कहा, ''हम यहां जाति जनगणना लागू करेंगे और उसके बाद हिंदुस्तान में एक नए तरह का विकास, एक नई तरह की राजनीति होगी... हम यहां 50% आरक्षण की दीवार को तोड़ेंगे और हम यहां जाति जनगणना कराएंगे। हमारा अगला कदम जाति जनणगना कराना है।''

राहुल गांधी ने कहा, "यह अभयमुद्रा है। आत्मविश्वास, शक्ति और निर्भयता कौशल से, अंगूठे से आती है। ये लोग इसके खिलाफ हैं। जिस तरह से द्रोणाचार्य ने एकलव्य का अंगूठा काट दिया था, आप पूरे देश का अंगूठा काटने में व्यस्त हैं... जब आप धारावी को अडानी को सौंपते हैं, तो आप उद्यमियों, छोटे और मध्यम व्यवसायों के अंगूठे काट देते हैं। जब आप भारत के बंदरगाहों, हवाई अड्डों और रक्षा उद्योग को अडानी को सौंपते हैं, तो आप भारत के उन सभी निष्पक्ष व्यापारियों के अंगूठे काट देते हैं जो ईमानदारी से काम करते हैं।"

राहुल गांधी ने भाजपा और RSS पर साधा निशाना

राहुल गांधी ने कहा, "मैं अपना भाषण भाजपा के नहीं बल्कि RSS के विचारों की आधुनिक व्याख्या करने वाले सर्वोच्च नेता के कथन को उद्धृत करके शुरू करना चाहता हूं, जो भारत के संविधान के बारे में और उनके विचार से भारत को कैसे चलाया जाना चाहिए, के बारे में कहते हैं "भारत के संविधान की सबसे बुरी बात यह है कि इसमें कुछ भी भारतीय नहीं है। मनुस्मृति वह धर्मग्रंथ है जो हमारे हिंदू राष्ट्र के लिए वेदों के बाद सबसे अधिक पूजनीय है और जिससे हमारी प्राचीन संस्कृति, रीति-रिवाज, विचार और व्यवहार का आधार बना है। इस पुस्तक ने सदियों से हमारे राष्ट्र की आध्यात्मिक और दैवीय यात्रा को संहिताबद्ध किया है। आज मनुस्मृति ही कानून है।" ये सावरकर के शब्द हैं...सावरकर ने अपने लेखन में स्पष्ट रूप से कहा है कि हमारे संविधान में कुछ भी भारतीय नहीं है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा है कि जिस पुस्तक से भारत चलता है, उसे इस पुस्तक से हटा दिया जाना चाहिए। इसी बात को लेकर लड़ाई है।''

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