वैक्सीन लगवाने के बावजूद कोरोना की चपेट में क्यों आ रहे लोग? स्टडी में हुआ वायरस को लेकर बड़ा खुलासा

वाशिंगटन, 25 दिसंबर। देश में कोरोना वायरस के मामलों में एक बार फिर उछाल देखने को मिल रहा है। पिछले 24 घंटे में देशभर से 7189 अधिक कोरोना के नए मामले सामने आए, हैरानी की बात तो ये है कि इनमें वो लोग भी शामिल हैं जिनका पूर्ण टीकाकरण हो चुका है। वायरस के खिलाफ एक बड़ा हथियार वैक्सीन लगवाने के बाद भी कई लोग संक्रमण की चपेट में आ रहे हैं, ऐसा क्यों हो रहा है? हाल ही में की गई एक स्टडी में इस सवाल को लेकर बड़ा खुलासा किया गया है।

टीकाकरण के बावजूद क्यों हुआ कोरोना?

टीकाकरण के बावजूद क्यों हुआ कोरोना?

एक नई स्टडी में पता चला है कि कोरोना वायरस प्रसार के लिए शरीर में छिपते-छिपाते हमला करता है। इससे वायरस शरीर में मौजूद प्रतिरक्षा प्रणाली से भी बच कर निकल जाता है। अपनी इस चाल से कोरोना शरीर के अंदर एक कोशिका से दूसरे कोशिका में फैलता रहता है। अमेरिका की ओहियो स्टेट यूनिवर्सिटी में पशु चिकित्सा बायोसाइंसेज विभाग में एक वायरोलॉजी प्रोफेसर शान-लू लिउ के नेतृत्व में इसका पता चला है।

स्टडी में सामने आई बड़ी बात

स्टडी में सामने आई बड़ी बात

सीधे शब्दों में कहें तो वायरस एक कोशिका से दूसरी कोशिका में फैलता है क्योंकि वहां उसे रोकने के लिए कोई प्रतिरक्षा नहीं होती। वायरस सेल की दीवारों के भीतर टिका रहता है। जर्नल प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज में प्रकाशित स्टडी में कहा गया है कि टारगेट सेल एक डोनर सेल बन जाता है और इस तरह बॉडी में कोरोना बिना किसी रोक-टोक के फैलता रहता है।

इस वजह से टीके के बावजूद फैल रहा कोरोना

इस वजह से टीके के बावजूद फैल रहा कोरोना

शोधकर्ताओं ने कहा कि कोरोना वायरस का सेल-टू-सेल ट्रांसमिशन या तो टीकों के माध्यम से या पिछले संक्रमण के माध्यम से उत्पन्न एंटीबॉडी से अवरोध के प्रति संवेदनशील नहीं होता। लिउ ने कहा, एंटीबॉडी न्यूट्रलाइजेशन के लिए सेल-टू-सेल ट्रांसमिशन का प्रतिरोध शायद कुछ ऐसा है जिस पर हमें ध्यान देना चाहिए क्योंकि कोरोना वेरिएंट का उभरना जारी है, जिसमें सबसे हालिया, ओमिक्रॉन भी शामिल है।

एंटीवायरल दवाएं हो सकती हैं मददगार

एंटीवायरल दवाएं हो सकती हैं मददगार

लिउ ने आगे कहा कि हमें वायरल संक्रमण के अन्य चरणों को निशाना बनाने के लिए प्रभावी एंटीवायरल दवाएं विकसित जरूरी है। जैसा कि हम जानते हैं, सार्स वायरस नया नहीं है। स्टडी में कोरोना वायरस की तुलना साल 2003 में सामने आए SARS-CoV से की गई है, जो उस समय सार्स वायरस के फैलने का जिम्मेदार था। लिउ ने कहा, पिछले संस्करण में मृत्यु दर बहुत अधिक थी और यह वायरस सिर्फ आठ महीने तक की परेशान कर पाया था, जबकि यह संस्करण अब लगभग दो वर्षों से महामारी के रूम में जारी है।

इस वजह से एंटीबॉडी से बच निकलता वायरस

इस वजह से एंटीबॉडी से बच निकलता वायरस

स्टडी के मुताबिक सेल-टू-सेल ट्रांसमिशन की वजह से कोरोना वायरस शरीर में मौजूद एंटीबॉडी से बच निकलता है। दुनिया में फिर से कोविड के नए मामलों में बढ़ोतरी का यही कारण है। कोरोना वायरस के नए वेरिएंट ओमिक्रॉन को सबसे पहले 24 नवंबर को दक्षिण अफ्रीका में पहचाना गया था। यह नया खतरा है क्योंकि यह पिछले वेरिएंट की तुलना में तेजी से फैल रहा है। ओमिक्रॉन के फैलाव से पता चलता है कि पूर्ण टीकाकरण होने के बावजूद ये लोगों को अपनी चपेट में ले रहा है।

वैक्सीन की बूस्टर डोज भी नहीं रोक सकी संक्रमण

वैक्सीन की बूस्टर डोज भी नहीं रोक सकी संक्रमण

यहां तक ​​कि जिन लोगों को कोविड के खिलाफ वैक्सीन की बूस्टर डोज दी गई है, वे भी इस संक्रमण से सुरक्षित नहीं हैं। डब्ल्यूएचओ ने इस बात पर जोर दिया है कि वैक्सीन या बूस्टर डोज ही वायरस के खिलाफ एक मात्र उपाय नहीं है, इससे बचने के लिए गाइडलाइन का भी पालन जरूरी है। बता दें कि देश में अब तक 400 से अधिक ओमिक्रॉन के मामले सामने आ चुके हैं। वहीं कोरोना वायरस के नए मामलों की संख्या भी तेजी से बढ़ती जा रही है।

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