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Silver Price Crash: कौन है ट्रंप के सबसे खास केविन वॉर्श? जिसके नाम के ऐलान मात्र से चांदी ₹80,000 गिरी

Silver Price Crash: सोने और चांदी की कीमतों में लगी आग को एक नाम ने अचानक बुझा दिया, वह नाम है केविन वॉर्श। जैसे ही खबर आई कि डोनाल्ड ट्रंप उन्हें अमेरिकी सेंट्रल बैंक (फेडरल रिजर्व) का अगला बॉस बना सकते हैं, ग्लोबल मार्केट में हड़कंप मच गया। चांदी जो कुछ ही समय पहले ₹4.20 लाख के शिखर पर थी, वह 24 घंटे में ₹80,000 तक टूट गई।

केविन वॉर्श की पहचान एक 'सख्त' पॉलिसी मेकर की है। उनके आने की आहट मात्र से डॉलर इतना मजबूत हुआ कि निवेशकों ने डर के मारे सोने-चांदी में भारी बिकवाली शुरू कर दी, जिससे भारतीय बाजारों में लोअर सर्किट लग गया।

Silver Price Crash

कौन हैं Kevin Warsh?

केविन वॉर्श अमेरिकी बैंकिंग और राजनीति का एक बड़ा चेहरा हैं। 55 साल के वॉर्श के पास वॉल स्ट्रीट और व्हाइट हाउस दोनों का तगड़ा अनुभव है। उन्होंने मॉर्गन स्टैनली जैसे बड़े बैंक में काम किया और पूर्व राष्ट्रपति जॉर्ज बुश के आर्थिक सलाहकार भी रहे। सबसे खास बात यह है कि 2006 में जब वे फेडरल रिजर्व के गवर्नर बने, तो वे इतिहास के सबसे कम उम्र (35 साल) के गवर्नर थे। फिलहाल वे स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में पढ़ाते हैं और दुनिया के दिग्गज निवेशकों के साथ जुड़े हुए हैं।

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Why Silver is falling today: क्यों डरे चांदी के निवेशक?

मार्केट में वॉर्श को एक 'हॉक' (Hawkish) माना जाता है। इसका मतलब है कि वे महंगाई कम करने के लिए कड़े फैसले लेने और ब्याज दरों को ऊंचा रखने के पक्षधर हैं। जब ब्याज दरें ऊंची होती हैं, तो डॉलर मजबूत होता है और सोने-चांदी जैसी चीजों की चमक फीकी पड़ जाती है। जैसे ही ट्रंप ने उनके नाम का संकेत दिया, निवेशकों को लगा कि अब सस्ते कर्ज का दौर खत्म होगा। इसी डर ने बाजार में मुनाफावसूली की सुनामी ला दी और देखते ही देखते चांदी के दाम जमीन पर आ गए।

Gold Price Fall: भारत में मची हाहाकार

भारतीय कमोडिटी बाजार (MCX) के लिए 30 जनवरी का दिन किसी डरावने सपने जैसा रहा। चांदी में 15% की गिरावट के बाद ट्रेडिंग रोकनी पड़ी (लोअर सर्किट)। एक ही दिन में चांदी करीब ₹67,000 प्रति किलो तक सस्ती हो गई। सोने का हाल भी बुरा रहा, जो करीब ₹13,000 टूटकर ₹1.60 लाख के नीचे आ गया। आम निवेशकों के लिए यह झटका इसलिए बड़ा था क्योंकि शादियों के सीजन में रिकॉर्ड तेजी देख रहे लोग इस अचानक आए 'क्रैश' के लिए तैयार नहीं थे।

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2008 के संकट के सारथी

केविन वॉर्श सिर्फ एक बैंकर नहीं हैं, बल्कि संकट के समय के बड़े खिलाड़ी माने जाते हैं। 2008 की वैश्विक मंदी के दौरान उन्होंने फेडरल रिजर्व और बड़े बैंकों के बीच एक पुल का काम किया था। जेपी मॉर्गन और बेयर स्टर्न्स के बीच हुई ऐतिहासिक डील के पीछे भी उन्हीं का दिमाग था। ट्रंप को एक ऐसा व्यक्ति चाहिए जो उनकी आर्थिक नीतियों को मजबूती से लागू कर सके और वॉर्श इस सांचे में पूरी तरह फिट बैठते हैं। उनकी यही 'प्रोफेशनल पावर' आज बाजार पर भारी पड़ रही है।

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आगे क्या होगा?

बाजार के जानकारों का कहना है कि यह गिरावट एक 'शॉर्ट टर्म रिएक्शन' भी हो सकती है। केविन वॉर्श के नाम ने निवेशकों को ऊंचे भाव पर प्रॉफिट बुक करने का बहाना दे दिया है। हालांकि, जब तक दुनिया में तनाव और अनिश्चितता का माहौल है, सोने-चांदी में एकदम से तेजी खत्म नहीं होगी। लेकिन हां, अब निवेशकों की नजर इस बात पर रहेगी कि वॉर्श आधिकारिक रूप से पद संभालते हैं या नहीं और उनकी पहली पॉलिसी कैसी रहती है। फिलहाल, डॉलर की मजबूती बुलियन मार्केट के लिए सिरदर्द बनी रहेगी।

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