Who Is Andy Burnham: कौन एंडी बर्नहैम? जो बन सकते हैं ब्रिटेन के अगले PM, क्यों बने पार्टी की पसंद?
Who Is Andy Burnham: ब्रिटेन की राजनीति इन दिनों बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है। प्रधानमंत्री कीर स्टारमर के इस्तीफे के बाद लेबर पार्टी में नए नेता की तलाश तेज हो गई है। इस दौड़ में सबसे मजबूत नाम एंडी बर्नहैम (Andy Burnham) का सामने आ रहा है। हाल ही में मेकरफील्ड उपचुनाव जीतकर संसद में वापसी करने वाले बर्नहैम को अब स्टारमर के संभावित उत्तराधिकारी के रूप में देखा जा रहा है।
सोमवार को ब्रिटिश संसद में शपथ लेने वाले एंडी बर्नहैम के लिए यह राजनीतिक करियर का बेहद अहम मोड़ माना जा रहा है। इससे पहले वह दो बार लेबर पार्टी के नेतृत्व की दौड़ में हार चुके हैं, लेकिन इस बार हालात उनके पक्ष में दिखाई दे रहे हैं। पूर्व स्वास्थ्य मंत्री वेस स्ट्रीटिंग जैसे वरिष्ठ नेताओं का समर्थन मिलने से उनकी दावेदारी और मजबूत हो गई है। यही वजह है कि अब उन्हें ब्रिटेन का अगला प्रधानमंत्री बनने का प्रबल दावेदार माना जा रहा है।

कैसे मिला 'किंग ऑफ द नॉर्थ' का टाइटल?
एंडी बर्नहैम का राजनीतिक सफर काफी दिलचस्प और संघर्षों से भरा रहा है। साल 2017 में उन्होंने वेस्टमिंस्टर की सक्रिय राजनीति छोड़कर ग्रेटर मैनचेस्टर के पहले सीधे चुने गए मेयर के रूप में नई जिम्मेदारी संभाली थी। मेयर बनने के बाद उन्होंने स्थानीय लोगों के मुद्दों को प्राथमिकता दी और कई ऐसे फैसले लिए जिनसे आम जनता को सीधा फायदा मिला।
कोविड-19 महामारी के दौरान जब ब्रिटिश सरकार ने उत्तरी इंग्लैंड के कई हिस्सों में सख्त प्रतिबंध लगाए, तब बर्नहैम खुलकर सरकार के खिलाफ खड़े हुए। उन्होंने आरोप लगाया कि कंजर्वेटिव सरकार उत्तरी क्षेत्रों के लोगों के साथ भेदभाव कर रही है। उनके इस मजबूत और जनता के पक्ष वाले रुख ने उन्हें लोगों के बीच काफी लोकप्रिय बना दिया। इसी दौरान उन्हें 'किंग ऑफ द नॉर्थ' का नाम भी मिला।
मिडिल क्लास फैमिली से निकलकर बने राजनेता
एंडी बर्नहैम का जन्म साल 1970 में लिवरपूल में हुआ था। वह एक मिडिल क्लास परिवार से आते हैं। उनके पिता टेलीकॉम इंजीनियर थे, जबकि उनकी मां एक क्लिनिक में रिसेप्शनिस्ट के रूप में काम करती थीं। बर्नहैम और उनके दोनों भाई अपने परिवार में यूनिवर्सिटी जाने वाले पहले शख्स बने। उन्होंने कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी से अंग्रेजी साहित्य की पढ़ाई की। हालांकि शुरुआत में उन्हें वहां के माहौल में खुद को ढालने में काफी कठिनाई हुई। यूनिवर्सिटी में कई छात्र रईस परिवारों से आते थे, जिसके कारण वह खुद को अलग महसूस करते थे। लेकिन संगीत और खेलों में उनकी रुचि ने उन्हें आत्मविश्वास दिया और आगे बढ़ने में मदद की।
14 साल की उम्र में बने लेबर पार्टी के समर्थक
एंडी बर्नहैम का राजनीति से जुड़ाव बचपन से ही रहा है। वह किशोरावस्था से ही लेबर पार्टी के समर्थक रहे हैं। उन्होंने सिर्फ 14 साल की उम्र में पार्टी की सदस्यता ली थी। दरअसल, बीबीसी पर आने वाले एक सामाजिक नाटक देखने के बाद वह लेबर पार्टी की विचारधारा से प्रभावित हुए। यह नाटक बेरोजगारी और आम लोगों की मुश्किलों पर आधारित था। उसी एक्सपीरियंस ने उन्हें राजनीति और सामाजिक मुद्दों के प्रति गंभीर बना दिया।
दो बार हार, लेकिन नहीं मानी हार
एंडी बर्नहैम इससे पहले भी लेबर पार्टी के शीर्ष पद के लिए अपनी दावेदारी पेश कर चुके हैं। साल 2010 में उन्होंने पार्टी नेतृत्व का चुनाव लड़ा, लेकिन एड मिलिबैंड से हार गए। इसके बाद 2015 में उन्होंने फिर कोशिश की, लेकिन इस बार जेरेमी कॉर्बिन ने उन्हें पीछे छोड़ दिया।
हालांकि इन हारों ने उन्हें कमजोर नहीं किया। इसके बजाय उन्होंने अपने राजनीतिक अनुभव को और मजबूत बनाया। समय के साथ उनकी सोच और नेतृत्व शैली में भी काफी बदलाव आया। उन्होंने अपने राजनीतिक नजरिए को और बड़ा बनाया और जनता से जुड़ाव मजबूत किया।
राजनीतिक विचारधारा में आया बड़ा बदलाव
अपने शुरुआती राजनीतिक करियर में एंडी बर्नहैम को टोनी ब्लेयर की मिडिल-वे पॉलिटिक्स का समर्थक माना जाता था। लेकिन समय के साथ उनके विचारों में बदलाव आया और अब वह पार्टी के वामपंथी विचारों के ज्यादा करीब माने जाते हैं। वह जल और ऊर्जा जैसे महत्वपूर्ण संसाधनों के नेशनलाइजेशन का खुलकर समर्थन करते हैं। इसके अलावा, हिल्सबरो स्टेडियम त्रासदी के पीड़ितों को न्याय दिलाने के अभियान में भी उन्होंने अहम भूमिका निभाई थी। इस मुद्दे पर उनके प्रयासों की ब्रिटेन में काफी सराहना हुई।
मेकरफील्ड उपचुनाव ने खोले नए दरवाजे
संसद में वापसी का रास्ता एंडी बर्नहैम के लिए आसान नहीं था। लेकिन लेबर पार्टी के भीतर बदलते समीकरणों ने उनके लिए नए अवसर पैदा किए। मेकरफील्ड सीट के सांसद जोश सिमंस ने उनके लिए अपनी सीट छोड़ी, जिसके बाद उपचुनाव कराया गया। इस उपचुनाव में बर्नहैम ने शानदार जीत दर्ज की। उन्होंने लेबर पार्टी का वोट शेयर बढ़ाकर लगभग 55 प्रतिशत तक पहुंचा दिया और अपने मुख्य प्रतिद्वंद्वी को बड़े अंतर से हराया। इस जीत ने पार्टी के भीतर उनकी स्थिति को और मजबूत कर दिया।
क्या तीसरी कोशिश में मिल जाएगी सफलता?
मौजूदा राजनीतिक हालात एंडी बर्नहैम के पक्ष में दिखाई दे रहे हैं। मेयर के रूप में उनकी सफलता, संसद में वापसी और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का समर्थन उन्हें मजबूत दावेदार बनाता है। दो बार नेतृत्व की दौड़ में हार का सामना करने वाले बर्नहैम अब तीसरी बार बड़े मौके के सामने खड़े हैं। उन्होंने खुद को एक ऐसे नेता के रूप में स्थापित किया है जो प्रशासनिक अनुभव, जनसमर्थन और राजनीतिक समझ तीनों रखता है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या 'किंग ऑफ द नॉर्थ' अब ब्रिटेन की सबसे बड़ी राजनीतिक कुर्सी तक पहुंच पाते हैं या नहीं।
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