दिल्ली में कहीं भी दिखे बंद नाला या जलभराव? CM रेखा गुप्ता ने बताया 311 App का नया प्लान, 34 लाख टन सिल्ट हटाई
दिल्ली में हर साल मानसून के दौरान जलभराव सबसे बड़ी समस्या बनकर सामने आता है। कई इलाकों में सड़कें तालाब जैसी नजर आती हैं और लोगों को घंटों ट्रैफिक जाम का सामना करना पड़ता है। लेकिन इस बार दिल्ली सरकार दावा कर रही है कि राजधानी को जलभराव से बचाने के लिए पहले से ही बड़े स्तर पर तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में दिल्ली सरकार ने नालों की सफाई और ड्रेनेज सिस्टम को मजबूत करने के लिए व्यापक अभियान चलाया है। सरकार का कहना है कि अब तक 34 लाख मीट्रिक टन से अधिक सिल्ट नालों से निकाली जा चुकी है, जिससे बारिश के पानी की निकासी पहले की तुलना में अधिक सुचारु हो सकेगी।

मानसून से पहले बड़ी तैयारी (Delhi Monsoon Preparedness)
राजधानी में जलभराव की समस्या से निपटने के लिए इस बार प्रशासन ने पहले से संवेदनशील इलाकों की पहचान की है। उन स्थानों पर विशेष फोकस किया गया है जहां पिछले वर्षों में बार-बार पानी भरने की शिकायतें सामने आती रही हैं। नालों की डी-सिल्टिंग का काम युद्धस्तर पर चलाया गया, ताकि बारिश के दौरान पानी का प्रवाह बाधित न हो। सरकार का मानना है कि समय रहते सफाई पूरी होने से जल निकासी व्यवस्था अधिक प्रभावी साबित होगी।
34 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा सिल्ट हटाई गई
दिल्ली सरकार के मुताबिक, मानसून प्रबंधन योजना के तहत अब तक 3.4 मिलियन यानी 34 लाख मीट्रिक टन से अधिक सिल्ट नालों से हटाई जा चुकी है। यह अभियान राजधानी के प्रमुख ड्रेनों, बड़े नालों और उन क्षेत्रों में चलाया गया जहां बाढ़ जैसी स्थिति बनने का खतरा अधिक रहता है। प्रशासन का कहना है कि सिल्ट हटाने से नालों की क्षमता बढ़ी है और बारिश का पानी तेजी से निकल सकेगा।
311 ऐप से जनता भी बनी अभियान की भागीदार
इस बार सरकार ने नागरिकों को भी जलभराव रोकने की मुहिम से जोड़ा है। 311 ऐप के जरिए लोग बंद नालों, जलभराव, सीवर ओवरफ्लो या सफाई से जुड़ी शिकायतें सीधे दर्ज करा सकते हैं। अधिकारियों का कहना है कि मानसून के दौरान ऐप पर आने वाली शिकायतों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाया जाएगा। इससे समस्याओं का समाधान पहले की तुलना में अधिक तेजी से किया जा सकेगा।
CM रेखा गुप्ता लगातार कर रहीं समीक्षा
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता खुद भी मानसून तैयारियों की नियमित समीक्षा कर रही हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि बारिश शुरू होने से पहले सभी जरूरी व्यवस्थाएं पूरी कर ली जाएं और किसी भी इलाके में जलभराव की स्थिति बनने पर तत्काल कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि सरकार का लक्ष्य केवल नालों की सफाई तक सीमित नहीं है, बल्कि दिल्लीवासियों को बारिश के मौसम में होने वाली परेशानियों से राहत दिलाना भी है।
कई एजेंसियां मिलकर कर रही हैं काम
दिल्ली सरकार, नगर निगम, लोक निर्माण विभाग और अन्य संबंधित एजेंसियां मिलकर इस अभियान को आगे बढ़ा रही हैं। संवेदनशील इलाकों में विशेष निगरानी टीमें तैनात की गई हैं, जो बारिश के दौरान स्थिति पर नजर रखेंगी और जरूरत पड़ने पर तुरंत हस्तक्षेप करेंगी।
स्पष्ट है कि इस बार दिल्ली सरकार मानसून को लेकर कोई जोखिम नहीं लेना चाहती। अब नजर इस बात पर रहेगी कि बारिश शुरू होने के बाद जमीन पर तैयारियों का असर कितना दिखाई देता है और क्या दिल्ली वास्तव में जलभराव मुक्त शहर बनने की दिशा में आगे बढ़ पाती है।














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