क्या चीन पर शी जिनपिंग का कंट्रोल यूं ही बना रहेगा!
चीन की सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी ने राष्ट्रपति के कार्यकाल पर लगी सीमा को हटाने का प्रस्ताव रखा है.
ये ऐसा कदम है जो मौजूदा नेता शी जिनपिंग को सत्ता में बनाए रखेगा. चीन की राजनीति में इसे एक निर्णायक घड़ी के तौर पर देखा जा रहा है.
इस घोषणा की उम्मीद कई लोगों को थी. राष्ट्रपति शी जिनपिंग चीन की राजनीति में एक प्रभावशाली चेहरा बन चुके हैं.
उनके साथ पार्टी के धड़ों की वफ़ादारी है, सेना और व्यापारी वर्ग है. इनकी वजह से वो देश के क्रांतिकारी संस्थापक माओत्से तुंग के बाद सबसे शक्तिशाली नेता माने जाते हैं.
शी जिनपिंग की तस्वीरों के होर्डिंग पूरे देश में लगे हुए हैं और सरकारी गानों में उनके आधिकारिक छोटे नाम, 'पापा शी' का इस्तेमाल होता है.
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जिनपिंग का कद पार्टी से बड़ा
पिछले हफ़्ते तक़रीबन 80 करोड़ लोगों ने टेलीविज़न पर चीनी नए साल का जश्न देखा जहां पूरे प्रोग्राम में शी के 'चीन की नई सोच का ज़माना' का प्रचार होता रहा.
दशकों तक कम्युनिस्ट पार्टी ने चीन पर राज किया है. अब शी जिनपिंग अपनी उसी पार्टी को पछाड़ कर स्पॉटलाइट में आए हैं जिस पार्टी ने उन्हें ऊंचाई तक पहुंचाया.
अतीत में कम्युनिस्ट पार्टी मज़बूती के साथ नियंत्रण में रही, लेकिन पार्टी के सबसे ऊंचे पद पर बैठे व्यक्ति के हाथ में सीमित वक्त के लिए ही कमान आती थी.
एक दशक के बाद नेता दूसरे नेता के हाथ में सत्ता पकड़ा देता था. शी जिनपिंग ने पद पर बैठने के शुरुआती दिनों में ही इस सिस्टम को तोड़ना शुरू कर दिया था.
उन्होंने तुरंत एक भ्रष्टाचार विरोधी कैंपेन शुरू किया. इससे रिश्वत लेने या सरकारी पैसे का दुरुपयोग करने वाले 10 लाख से ज़्यादा पार्टी प्रतिनिधि अनुशासित हो गए.
इसी कैंपेन ने शी जिनपिंग के राजनीतिक प्रतिद्वंदियों को भी ख़त्म कर दिया और शक जताने वालों को चुप करवा दिया.
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उत्तराधिकारी की कल्पना मुश्किल
शी जिनपिंग ने अपने पद के शुरुआती दिनों में ही अपना राजनीतिक विज़न साफ दिखा दिया था जब उन्होंने अंतरराष्ट्रीय व्यापार के रास्ते बनाने के लिए 'वन बेल्ट वन रोड' जैसे प्रोजेक्ट को बढ़ावा दिया और 2020 तक चीन से ग़रीबी हटाने की योजना का एलान किया.
लंबे वक्त से ऐसी अटकलें थीं कि वो खुद को राष्ट्रपति बनाए रखने की कोशिश करेंगे.
शी जिनपिंग इतने शक्तिशाली हैं कि ये कल्पना करना भी मुश्किल है कि 5 साल में उनकी जगह लेने के लिए कोई आ पाएगा.
पार्टी की लीडरशीप इस घोषणा के लिए ग्राउंडवर्क कर रही थी.
पिछले अक्तूबर में पार्टी की एक अहम बैठक में शी जिनपिंग ने परंपरा तोड़ते हुए किसी उत्तराधिकारी का नाम आगे नहीं किया.
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