670 साल से भी पहले, 9 मिलियन km की स्पीड! जब वह तारा फटा था तो पृथ्वी पर क्या हुआ ? जानिए
न्यूयॉर्क, 13 सितंबर: ब्रह्मांड के रहस्यों को सुलझाने में अभी भी वैज्ञानिक या खगोलविद दिन-रात लगे हुए हैं। किसी चीज का रहस्य खुलता है तो किसी दूसरे का रहस्य और गहरा जाता है। करोड़ो-अरबों प्रकाश वर्ष दूर ब्रह्मांड के किस कोने में क्या चल रहा है, उसका जरा सा भी भनक लग जाना, खगोलविदों के लिए बहुत बड़ी कामयाबी मानी जाती है। ऐसी ही एक कामयाबी खगोलविदों की एक टीम को मिली है, जिन्होंने पता लगाया है कि 600 वर्षों से भी पहले एक तारे में जब विस्फोट हुआ तो उसके बाद क्या हुआ ?

एक तारे में विस्फोट होता है तो क्या होता है ?
जब करोड़ों-अरबों साल में कोई तारा बहुत ज्यादा संकुचित हो जाता है और अत्यधिक घनत्व की वजह आखिरकार उसमें विस्फोट हो जाता है तो उसका असर क्या होता है? यह जानने के लिए खगोलविदों ने अपनी घड़ी की सूई सैकड़ों साल पीछे घुमा दी है, तब जाकर जो नतीजे मिले हैं, वह भविष्य में ब्रह्मांड में हर समय मची उथल-पुथल को समझने में काफी मदद कर सकता है। ब्रह्मांड के नियमों से जुड़े ऐसे ही सवालों का जवाब खोज रहे खगोलविदों ने यह जानने की कोशिश की है कि तारे का विस्फोट कैसे होता है, फिर उससे सुपनोवा कैसे बनते हैं? खगोलविदों के एक ग्रुप ने एक तारे के खत्म होने की टाइमलाइन निर्धारित करने के लिए इसका सूक्ष्म विश्लेषण किया है और इसमें उन्हें बहुत बड़ी सफलता मिली है।

पृथ्वी से 1,60,000 प्रकाश वर्ष दूर की घटना
अपनी रिसर्च के लिए खगोलविदों ने पृथ्वी से 1,60,000 प्रकाश वर्ष दूर एक छोटी आकाशगंगा 'लार्ज मैगेलैनिक क्लाउड' में स्थित सुपरनोवा एसएनआर 0519 के अवशेषों का विश्लेषण किया है। यह सुपरनोवा तब बना था, जब एक सफेद बौने तारे में विस्फोट हुआ था। थर्मोन्यूक्लियर विस्फोट होने की वजह से इस विस्फोट के कारण वह पूरी तरह से तबाह हो गया था। थर्मोन्यूक्लियर विस्फोटों को अधिक बेहतर ढंग से समझने और अरबों प्रकाश-वर्ष दूर आकाशगंगाओं की दूरी को मापने के लिए ऐसे खगोलीय धमाकों का विश्लेषण काफी महत्वपूर्ण है।

कैसे किया गया ये खोज ?
एसएनआर 0519 के तारे में विस्फोट कितने समय पहले हुआ था, उसके बाद जो सुपरनोवा की स्थिति बनी वह कैसा था? इसके बारे में जानने के लिए कई तरह के टेलीस्कोप का उपयोग किया गया। इस शोध के नतीजे एस्ट्रोफिजिकल जर्नल में अगस्त के अंक में प्रकाशित हुए हैं। इसके लिए खगोलविदों ने नासा के चंद्रा एक्स-रे ऑब्जर्वेटरी से एक्स-रे डेटा और नासा के हबल स्पेस टेलीस्कोप से ऑप्टिकल डेटा का इस्तेमाल किया और फिर उन्हें रिटायर हो चुके स्पिट्जर स्पेस टेलीस्कोप से किए गए अवलोकनों के साथ मिलाया।

पृथ्वी पर क्या हुआ ?
मिश्रित तस्वीर में निम्न, मध्यम और उच्च ऊर्जा क्रमश: हरे, नीले और बैंगनी दिखाती है, जिसमें कुछ रंग एक-दूसरे में मिलकर सफेद नजर आते हैं। विस्फोट की वजह से जो ऊर्जा की लहर उठी थी, उसके पदार्थों की स्पीड का आकलन करने के लिए वैज्ञानिकों ने हबल से 2010, 2011, और 2020 में ली गई तस्वीरों की तुलना की, जो 9 मिलियन किलोमीटर प्रति घंटे तक की होगी। अमेरिकी अंतरिक्ष संगठन नासा ने एक विज्ञप्ति में कहा है, 'यदि स्पीड उस अनुमानित गति के ऊपर की रही हो, तो खगोलविदों ने निर्धारित किया कि विस्फोट के कारण जो प्रकाश निकला होगा, वह लगभग 670 साल पहले या इंग्लैंड और फ्रांस के बीच सौ साल के युद्ध के दौरान और तब जब चीन में मिंग राजवंश अपनी ऊंचाई पर थी, तब पृथ्वी पर पहुंचा होगा ।'

670 साल से भी पहले होने की संभावना
लेकिन, खगोलविदों को लगता है कि विस्फोट से निकले पदार्थों की गति धीमी हो चुकी थी और इसलिए तारे में वह विस्फोट 670 साल से भी पहले हो चुका होगा। नासा का कहना है कि खगोलविदों को एक्सरे में अवशेषों में उस जगह पर सबसे चमकीला क्षेत्र मिला है, जहां सबसे धीमी गति वाले पदार्थ मौजूद थे और तेजी से बढ़ने वाले पदार्थों से कोई एक्सरे उत्सर्जन जुड़ा नहीं है।

तारे के अंत के वास्तविक समय निर्धारित करने की प्रक्रिया जारी
द एस्ट्रोफिजिकल जर्नल में प्रकाशित उनके निष्कर्ष के मुताबिक कुछ विस्फोट की तरंगें अवशेष के चारों ओर घनी गैस से जाकर टकरा गईं, जिससे यात्रा के दौरान यह धीमा हो गया। टीम अब हबल के साथ अतिरिक्त अवलोकनों पर काम कर रही है, ताकि यह निर्धारित किया जा सके कि उस तारे के अंत का समय वास्तव में कब निर्धारित किया जाना चाहिए। (तस्वीरें- प्रतीकात्मक)












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