'नींबू गरम करके डाला है क्या'? बेंगलुरु के कैफे ने शिकंजी पर वसूला Gas Crisis Charge, बिल देख भड़के लोग!
Bengaluru Cafe Viral Bill: क्या आपने कभी सुना है कि शिकंजी या नींबू पानी (Lemonades ) बनाने के लिए गैस चूल्हे की जरूरत पड़ती है? सोशल मीडिया पर इस वक्त बेंगलुरु के एक कैफे का बिल तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने इंटरनेट पर नई बहस छेड़ दी है। 'थियो कैफे' (Theo Cafe) नाम के इस रेस्टोरेंट ने ग्राहकों से नींबू पानी के बिल पर Gas Crisis Charge के नाम से अतिरिक्त वसूली की है।
दरअसल, एक्स (ट्विटर) और रेडिट पर @HaramiParindey नाम के यूजर ने एक बिल शेयर किया है। इस बिल में दो 'मिंट लेमोनेड' का ऑर्डर दिया गया था, जिसकी कुल कीमत 358 रुपये थी। जीएसटी और डिस्काउंट के बाद, बिल में अचानक एक अजीबोगरीब एंट्री दिखी- 'गैस संकट शुल्क' (5%), जिसके नाम पर 17.01 रुपये अतिरिक्त जोड़े गए थे। अंत में ग्राहक को कुल 374 रुपये का भुगतान करना पड़ा।

सोशल मीडिया पर उड़ी खिल्ली
जैसे ही यह बिल वायरल हुआ, लोगों ने कैफे को आड़े हाथों लेना शुरू कर दिया। यूजर्स का सबसे बड़ा सवाल यह था कि नींबू पानी बनाने में गैस का क्या काम? एक यूजर ने लिखा, 'नींबू पानी बनाने में कौन सी गैस लगती है भाई?' वहीं दूसरे ने मजे लेते हुए पूछा, 'क्या इन्होंने नींबू को गर्म करके डाला है?'
कानूनी एक्शन की चेतावनी
कुछ जागरूक यूजर्स ने इसे 'उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019' का उल्लंघन बताया। एक व्यक्ति ने टिप्पणी की, "ईंधन की कमी के नाम पर अनिवार्य अतिरिक्त शुल्क वसूलना अनुचित व्यापार प्रथा है। इसके लिए रेस्टोरेंट पर 50,000 रुपये तक का जुर्माना लग सकता है।' कई लोगों ने सुझाव दिया कि इसे सोशल मीडिया पर डालने के बजाय उपभोक्ता अदालत में रिपोर्ट करना चाहिए।
हालांकि, कैफे ने अभी तक इस 'सरचार्ज' पर कोई आधिकारिक सफाई नहीं दी है। जहां अधिकतर लोग नाराज हैं, वहीं एक यूजर ने रेस्टोरेंट का पक्ष लेते हुए कहा कि शायद बाकी मेन्यू को चालू रखने और दुकान खुली रखने के लिए वे ऐसा कर रहे हैं, जो जायज है।
क्या वाकई देश में है गैस का संकट?
भारत सरकार ने देश में घरेलू गैस (LPG) की भारी कमी की खबरों को पूरी तरह से भ्रामक और अफवाह करार दिया है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि देश में रसोई गैस का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) पूरी तरह सुचारू है। सरकार के मुताबिक, कुछ क्षेत्रों में स्थानीय लॉजिस्टिक्स या डिलीवरी संबंधी देरी को 'संकट' समझ लिया गया, जबकि हकीकत में गैस की कोई कमी नहीं है। अधिकारियों ने जनता से अपील की है कि वे पैनिक बुकिंग न करें और सोशल मीडिया पर फैल रही 'गैस संकट' जैसी निराधार खबरों पर ध्यान न दें।












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