हिंसा प्रभावित बांग्लादेश के हिंदुओं ने सीमा पर सुरक्षा मांगी, बीएसएफ ने उन्हें वापस भेजा: संयुक्त राष्ट्र
पिछले साल जुलाई और अगस्त 2024 में बांग्लादेश में अराजकता की स्थिति पैदा हो गई थी। जिसमें हिंदूओं, उनके पूजा स्थल और उनके व्यवसाय को निशाना बनाया गया था। अब बांग्लादेश हिंसा को लेकर संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय (UNHRC) की एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है।
यह रिपोर्ट्स न केवल बांग्लादेश में अंतरिम सरकार के प्रमुख मुहम्मद यूनुस की पोल खोली है। बल्कि, इस रिपोर्ट में ऐसा दावा किया गया है कि सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के जवानों ने शरण मांगने के लिए भारत-बांग्लादेश सीमा पर आए हजारों बांग्लादेशी हिंदुओं को वापस भेज दिया।

इंडिया टुडे की खबर के मुताबिक, शेख हसीना सरकार के पतन के बाद सिर्फ तीन दिनों में अल्पसंख्यक हिंदुओं पर हमलों की 200 से ज़्यादा घटनाएं हुईं, जिनमें पांच हत्याएं भी शामिल थीं। इतना ही नहीं, 5 अगस्त को शेख हसीना को ढाका से भागने पर मजबूर होना पड़ा। इन हमलों की खबरों को यूनुस ने 'दुष्प्रचार' करार दिया था।
लेकिन, अब संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट से स्पष्ट होता है कि ये सभी घटनाएं ठोस तथ्यों पर आधारित थीं। रिपोर्ट में बताया गया है कि हिंसा से प्रभावित लगभग 4000 हिंदुओं ने भारत-बांग्लादेश सीमा क पास शरण लेने की कोशिश की। लेकिन उन्हें बीएसएफ ने वापस भेज दिया।
हिंदू मंदिरों में की गई तोड़फोड़
संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में एक गवाह के हवाले से कहा गया है कि ठाकुरगांव में हिंदू श्मशान घाटों और मंदिरों में तोड़फोड़ की गई। इसके अलावा कई हिंदुओं की संपत्तियों पर हमले हुए। जिसके कारण वह सांप्रदायिक हिंसा के डर से अपने गांवों को छोड़कर भारत की सीमा के पास शरण लेने के लिए मजबूर हो गए थे। लेकिन, भारत सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) ने उन्हें वापस भेज दिया।
लोगों ने खो दिया अपना कारोबार
छह महीने बाद आई रिपोर्ट में कहा गया है, 'हिंसा प्रभावित परिवारों ने व्यापक असुरक्षा और भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा। कई लोगों ने अपनी आवश्यक वस्तुएं, पशुधन यानी मवेशी और पूरा कारोबार खो दिया। अगस्त 2024 में भारत-बांग्लादेश सीमा पर हिंदू शरणार्थियों की तस्वीरें और वीडियो भी सामने आए।
4000 हिंदू लेना चाहते थे शरण
रिपोर्टों के अनुसार, अगस्त के पहले दो हफ्तों में सैकड़ों बांग्लादेशियों हिंदुओं ने भारत में प्रवेश की गुहार लगाई थी, लेकिन बीएसएफ ने उन्हें वापस भेज दिया। बीएसएफ के जवानों को इस दौरान भीड़ को समझाते हुए भी देखा गया था। हालांकि, रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि 4000 हिंदू सीमा पार करने की कोशिश नहीं कर रहे थे। बल्कि वे शरण लेना चाहते थे।
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