Britain Muavja Comment: 89 साल भारत को लूटा, अब मुआवजा क्यों मांग रहा ब्रिटेन? भारत ने क्या कहा?
Britain Muavja Comment: ब्रिटेन की पूर्व गृह मंत्री सुएला ब्रेवरमैन ने एक इंटरव्यू में अजीब मांग रख दी हें। उनका कहना है कि जो देश कभी ब्रिटेन के गुलाम थे, उन्हें ब्रिटिश राज में बनी रेलवे और सरकारी इमारतों की कीमत चुकानी चाहिए। यानी सीधे-सीधे इतिहास को उलटने की कोशिश। मज़ेदार बात यह है कि सुएला खुद भारतीय मूल की हैं-उनके माता-पिता गोवा और तमिलनाडु से थे। इसके बावजूद वह ब्रिटिश हुकूमत का पक्ष ले रही हैं।
कहां शुरू हुआ मुद्दा?
यह सारा विवाद तब शुरू हुआ जब जमैका का एक सरकारी दल गुलामी के हर्जाने की बात करने यूके जाने वाला था। ब्रेवरमैन ने उस मांग को दबाने के लिए यह नया शगूफा छोड़ दिया। अब हकीकत भी देख लीजिए। ब्रिटिश अर्थशास्त्री एंगस मैडिसन के डेटा बताते हैं कि साल 1700 में दुनिया की इकॉनमी में भारत की हिस्सेदारी 22.6% थी, जो 1947 तक सिकुड़कर सिर्फ 3.8% रह गई। अंग्रेज भारत में ट्रेनें हमारे विकास के लिए नहीं लाए थे। उनका सीधा एजेंडा था- सेना को तेजी से भेजना और भारत का कच्चा माल लूटकर पोर्ट्स तक पहुंचाना। इस पूरे काम का खर्च भी भारतीय टैक्सपेयर्स से ही वसूला गया था।

ब्रेवरमैन के अजीब-ओ-गरीब तर्क
ब्रेवरमैन का कहना है कि आज के ब्रिटिश नागरिकों से पुरानी गलतियों का हर्जाना मांगना गलत है, लेकिन वह अपने ही देश का एक पुराना रिकॉर्ड भूल गईं। 1830 के दशक में जब ब्रिटेन ने गुलामी खत्म की, तो गुलामों को कुछ नहीं मिला। उलटा, गुलामों के मालिकों को हुए नुकसान की भरपाई के लिए ब्रिटिश सरकार ने 2 करोड़ पाउंड का लोन लिया था। यह रकम उस वक्त की ब्रिटिश जीडीपी का 5% थी।
कहां गया इतना सारा पैसा?
ये सारा पैसा उन रसूखदार ब्रिटिश परिवारों की तिजोरियों में गया जो इंसानों का धंधा करते थे। यूके ट्रेजरी के मुताबिक, ब्रिटिश जनता के पैसे से इस कर्ज की आखिरी किस्त साल 2015 में चुकाई गई।
सुएला का क्या है असल मकसद?
इस बयान के पीछे ब्रिटेन की अंदरूनी राजनीति काम कर रही है। सुएला ने हाल ही में कंजरवेटिव पार्टी छोड़कर नाइजेल फराज की धुर दक्षिणपंथी पार्टी रिफॉर्म यूके जॉइन की है। साफ दिख रहा है कि वह अपने नए वोट बैंक को खुश करने के लिए यह सब कह रही हैं।
इस मामले पर भारत ने क्या कहा?
इधर भारत में इस बयान के आते ही कोहिनूर वापस लाने की चर्चा फिर गरम हो गई है। हालांकि इस मामले पर भारत सरकार ने कोई आधिकारिक बयान तो नहीं दिया लेकन दिल्ली के हलकों में साफ कहा जा रहा हें कि ब्रिटेन को फूटी कौड़ी देने का सवाल ही नहीं उठता, बल्कि कर्ज तो खुद ब्रिटेन पर है जो उसने सदियों की लूट से कमाया है।
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