Pakistan Cargo Plane Missing: शारजाह से उड़ा, कराची पहुंचने से पहले गायब! आखिर कहां गया प्लेन?
Pakistan Cargo Plane Missing: यूएई के शारजाह से कराची आ रहा एक मालवाहक विमान (Cargo Plane) कराची के पास अरब सागर में लापता हो गया है। विमान में पांच क्रू मेंबर्स सवार थे, जिनसे संपर्क टूटने के बाद पाकिस्तानी अथॉरिटीज ने गहरे समुद्र में एक बड़ा सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया है। इस प्राइवेट कार्गो प्लेन के अचानक रडार से गायब होने के बाद से सभी सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हें।
पाकिस्तान एयरपोर्ट अथॉरिटी (PAA) के मुताबिक, यह विमान K2 Airways का बोइंग 737-400 था। मंगलवार शाम को कराची एयरपोर्ट पर लैंड करने से कुछ ही देर पहले इसका एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) से संपर्क पूरी तरह टूट गया। गायब होने से ठीक पहले पायलटों ने नेविगेशन सिस्टम में खराबी आने की जानकारी दी थी, जिसके बाद सिचुएशन बहुत तेजी से बिगड़ी।

अजीब तरीके से गायब हुआ प्लेन
फ्लाइट ट्रैकिंग सर्विसेज के डेटा से संकेत मिलता है कि लापता होने से पहले इस बोइंग विमान ने हवा में बहुत ही अजीब और असामान्य बिहेवियर दिखाया था। रडार डेटा के मुताबिक, पाकिस्तानी समय के मुताबिक रात करीब 09:21 बजे विमान बहुत तेजी से नीचे की ओर झुकने लगा। इसके साथ ही प्लेन की दिशा में भी बेहद तेज और अजीब बदलाव दर्ज किए गए, जो आम तौर पर किसी बड़ी इमरजेंसी में ही देखे जाते हं।
कंट्रोल करने के बाद दोबारा नीचे गया विमान
ग्लोबल फ्लाइट-ट्रैकिंग सेवा Flightradar24 के शुरुआती आंकड़ों से पता चलता है कि गायब होने से पहले विमान की ऊंचाई (Altitude) बहुत तेजी से गिरी थी। इसके बाद विमान ने एक बार फिर से ऊंचाई हासिल करने यानी क्लाइंब करने की कोशिश की, लेकिन उसके ठीक बाद वह दोबारा और ज्यादा तेजी से नीचे की ओर क्रैश मोड में गिरा। इसके तुरंत बाद विमान का सिग्नल पूरी तरह गायब हो गया। पाकिस्तानी अधिकारियों ने साफ किया है कि विमान से आखिरी संपर्क कराची से लगभग 155 समुद्री मील (Nautical Miles) पश्चिम में हुआ था। यह पूरा इलाका अरब सागर के गहरे पानी के दायरे में आता है, जिससे सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशन और ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो गया है। इस घटना की गंभीरता को देखते हुए तुरंत रेस्क्यू कोऑर्डिनेशन सेंटर को एक्टिव कर दिया गया हे।
अरब सागर में ढूंढा जा रहा विमान
लापता विमान और उस पर सवार पांच क्रू मेंबर्स की तलाश के लिए पाकिस्तानी नेवी और कोस्ट गार्ड की टीमों को मोर्चे पर तैनात किया गया है। यह एक ज्वाइंट हवाई और समुद्री सर्च ऑपरेशन है, जिसमें आधुनिक जहाजों और हेलिकॉप्टरों की मदद ली जा रही है। चूंकि संपर्क टूटने के बाद विमान के गहरे समुद्र में डूबने की आशंका है, इसलिए पानी के भीतर मलबे का पता लगाने वाले सोनार जैसे इक्विपमेंट्स का भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
क्या है विमान का इतिहास?
हादसे के शिकार हुए इस बोइंग 737-400 विमान का काफी लंबा और पुराना ऑपरेटिंग इतिहास रहा है। साल 1999 में बने इस विमान ने शुरू में एक यात्री विमान (Passenger Plane) के रूप में अपनी सेवाएं दी थीं। इस दौरान यह रूसी एयरलाइन एअरोफ्लोट (Aeroflot) और इंडोनेशिया की गरुड़ इंडोनेशिया एयरलाइंस के बेड़े का हिस्सा रहा था। इसके बाद साल 2012 में इसे पैसेंजर विमान से कंवर्ट करके एक मालवाहक (Cargo) विमान में तब्दील किया गया था।
आशंकाओं और अटकलों का डर
नेविगेशन उपकरणों में आई खराबी और उसके बाद अचानक आई भारी गिरावट इस बात की ओर इशारा करती है कि विमान में कोई गंभीर तकनीकी या स्ट्रक्चरल फेलियर (Structural Failure) हुआ हो सकता है। इस तरह के समुद्री हादसों में ब्लैक बॉक्स (फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर और कॉकपिट वॉइस रिकॉर्डर) की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है।
जब तक विमान का मलबा या कोई सुराग नहीं मिल जाता, तब तक दुर्घटना के सही कारणों का पता लगाना नामुमकिन है। वर्तमान में पाकिस्तानी विशेषज्ञों की टीम उस आखिरी जीपीएस लोकेशन और रडार सिग्नलों का बारीकी से विश्लेषण कर रही है, जहां विमान को आखिरी बार ट्रैक किया गया था।
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