खजराना सिविल अस्पताल के नाम पर नहीं खरीदी गई दवाएं या उपकरण, जिला प्रशासन ने बताया पूरा मामला

इंदौर जिला प्रशासन ने बताया है कि प्रस्तावित 100-बिस्तरों वाले खजराना सिविल अस्पताल के लिए कोई दवा, उपकरण या सामग्री नहीं खरीदी गई है। देरी का कारण स्वास्थ्य विभाग को ज़मीन का वास्तविक हस्तांतरण न होना है, जहाँ अधिकारी निर्माण शुरू होने से पहले ज़मीन की मंजूरी और औपचारिक अनुमोदन को पूरा करने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।

इंदौर के खजराना क्षेत्र में प्रस्तावित 100 बिस्तरीय सिविल अस्पताल को लेकर मीडिया में प्रसारित विभिन्न खबरों के बीच जिला प्रशासन ने तथ्यात्मक स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि अस्पताल के नाम पर अब तक किसी भी प्रकार की दवाओं, चिकित्सा उपकरणों या अन्य सामग्री की खरीदी नहीं की गई है। प्रशासन का कहना है कि अस्पताल निर्माण में देरी का मुख्य कारण स्वास्थ्य विभाग को आवंटित भूमि का वास्तविक हस्तांतरण नहीं होना है।

Khajrana Civil Hospital delays over land transfer

जिला प्रशासन द्वारा मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी की रिपोर्ट के आधार पर जारी जानकारी के अनुसार, ग्राम खजराना के सर्वे क्रमांक 435/1/1 पैकी की 0.700 हेक्टेयर भूमि सिविल अस्पताल निर्माण के लिए स्वास्थ्य विभाग को आवंटित की गई थी। हालांकि, उक्त भूमि का वास्तविक कब्जा अब तक स्वास्थ्य विभाग को नहीं मिल पाया है। वर्तमान में इस भूमि का उपयोग नगर निगम इंदौर द्वारा किए जाने के कारण अस्पताल भवन का निर्माण शुरू नहीं हो सका है।

हाल ही में आयोजित समीक्षा बैठक में कलेक्टर शिवम वर्मा ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि अस्पताल के लिए आवंटित भूमि को अतिक्रमण मुक्त कर स्वास्थ्य विभाग को उपलब्ध कराया जाए। प्रशासन के अनुसार, भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कर भवन निर्माण की प्रशासकीय स्वीकृति प्राप्त करने की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल स्वास्थ्य विभाग को भवन निर्माण संबंधी कोई प्रशासकीय स्वीकृति प्राप्त नहीं हुई है।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के अनुसार वर्ष 2021 में मध्य प्रदेश शासन के लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने खजराना सिविल अस्पताल के लिए 87 पद स्वीकृत किए थे। इनमें अब तक 29 स्टाफ नर्स, 5 फार्मासिस्ट और 1 लैब टेक्नीशियन की पदस्थापना की जा चुकी है।

चूंकि अस्पताल भवन अभी अस्तित्व में नहीं है और संस्था शुरू नहीं हुई है, इसलिए कोविड-19 के बाद बढ़ी स्वास्थ्य सेवाओं की जरूरत को देखते हुए इन कर्मचारियों की सेवाएं शहर के विभिन्न शासकीय स्वास्थ्य संस्थानों में ली जा रही हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सभी कर्मचारियों को नियमानुसार कार्य आवंटित किया गया है और उनके कार्य का प्रमाणीकरण संबंधित संस्थाओं के प्रभारियों द्वारा किया गया है। साथ ही उन्हें नियमानुसार वेतन का भुगतान भी किया जा रहा है।

चिकित्सकों की नहीं हुई कोई पदस्थापना

जिला प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि वर्तमान में खजराना सिविल अस्पताल के लिए किसी भी चिकित्सक की पदस्थापना के आदेश किसी भी स्तर से जारी नहीं किए गए हैं। मीडिया में अस्पताल के लिए बड़े पैमाने पर पदस्थापना किए जाने संबंधी खबरों को प्रशासन ने भ्रामक बताया है।

दवाओं और उपकरणों की नहीं हुई खरीद

प्रशासन के अनुसार प्रस्तावित अस्पताल के लिए अब तक किसी भी प्रकार की औषधि, चिकित्सा उपकरण या अन्य सामग्री की खरीद नहीं की गई है। इसके लिए वरिष्ठ स्तर से कोई वित्तीय आवंटन भी प्राप्त नहीं हुआ है। इसलिए अस्पताल के नाम पर वित्तीय व्यय किए जाने संबंधी दावों का कोई तथ्यात्मक आधार नहीं है।

आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करने की अपील

जिला प्रशासन ने कहा है कि सिविल अस्पताल परियोजना से जुड़े सभी कार्य शासन के नियमों और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार किए जाएंगे। भूमि हस्तांतरण और भवन निर्माण की प्रशासकीय स्वीकृति मिलने के बाद ही निर्माण की आगे की प्रक्रिया शुरू होगी। कलेक्टर शिवम वर्मा ने आमजन से अपील की है कि वे अपुष्ट और भ्रामक सूचनाओं के बजाय प्रशासन द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर ही भरोसा करें।

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