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India US डील से मची खलबली! ट्रंप के आगे क्यों गिड़गिड़ाए शहबाज शरीफ? ये हैं सरेंडर की 5 बड़ी वजहें

Pakistan US Relations: वॉशिंगटन में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 'बोर्ड ऑफ पीस' की पहली बैठक में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ का अंदाज किसी कूटनीतिक शिष्टाचार से ज्यादा 'मक्खनबाजी' की पराकाष्ठा नजर आया। शरीफ ने ट्रंप को 'साउथ एशिया का रक्षक' और 'शांति दूत' बताकर सबको चौंका दिया। असल में, यह तारीफें सिर्फ गाजा के लिए नहीं, बल्कि भारत और अमेरिका के बीच हुए उस अंतरिम व्यापार समझौते (Trade Deal) का खौफ है जिसने पाकिस्तान की नींद उड़ा दी है।

शरीफ की यह 'डिप्लोमेसी' असल में डूबती अर्थव्यवस्था के लिए ऑक्सीजन और भारत के बढ़ते वैश्विक प्रभाव के खिलाफ एक सुरक्षा कवच तलाशने की कोशिश है। आइए समझते हैं वे 5 बड़ी वजहें, जिनके कारण शहबाज शरीफ ट्रंप के सामने नतमस्तक नजर आ रहे हैं।

Pakistan US Relations

भारत-अमेरिका ट्रेड डील का 'आर्थिक झटका'

भारत और अमेरिका के बीच हुए नए समझौते के तहत टेक्सटाइल, चमड़ा और हस्तशिल्प जैसे सेक्टरों पर अमेरिकी टैरिफ 50% से गिरकर 18% होने वाला है। ये वही सेक्टर हैं जहां पाकिस्तान कभी भारत को टक्कर देने की कोशिश करता था। अब भारतीय सामान अमेरिका में सस्ता होगा, जिससे पाकिस्तान का बचा-कुचा एक्सपोर्ट भी तबाह हो सकता है। इसी आर्थिक तबाही के डर से शहबाज ट्रंप को खुश करने में जुटे हैं।

कश्मीर और भारत के मुद्दे पर मध्यस्थता

ट्रंप अपने पिछले कार्यकाल में कई बार भारत और पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता (Mediation) की पेशकश कर चुके हैं। शहबाज शरीफ इसी उम्मीद में ट्रंप की तारीफ कर रहे हैं कि शायद वह दोबारा भारत पर बातचीत के लिए दबाव डालें। भारत हमेशा से तीसरे पक्ष की दखलअंदाजी को नकारता रहा है, लेकिन पाकिस्तान को लगता है कि ट्रंप की 'सेवियर' वाली इमेज को हवा देकर वह कश्मीर मुद्दे को फिर से अंतरराष्ट्रीय मंच पर जिंदा कर सकता है।

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Pakistan Economic Crisis: आर्थिक बेलआउट और कर्ज से राहत

पाकिस्तान इस वक्त इतिहास के सबसे बुरे आर्थिक दौर से गुजर रहा है। शहबाज शरीफ को बखूबी पता है कि आईएमएफ (IMF) और वर्ल्ड बैंक जैसी संस्थाओं की चाबी वॉशिंगटन के पास है। ट्रंप के साथ अच्छे रिश्ते बनाने का मतलब है कर्ज की शर्तों में ढील और नए निवेश की उम्मीद। शरीफ की इस 'मक्खनबाजी' के पीछे असल मकसद पाकिस्तान की डूबती अर्थव्यवस्था के लिए अमेरिकी ऑक्सीजन हासिल करना है, ताकि देश को दिवालिया होने से बचाया जा सके।

'बोर्ड ऑफ पीस' में अपनी अहमियत बढ़ाना

गाजा के पुनर्निर्माण के लिए बने इस बोर्ड में 27 देश शामिल हैं, जिनमें सऊदी अरब और यूएई जैसे प्रभावशाली देश भी हैं। मजे की बात यह है कि फिलिस्तीन इसका हिस्सा नहीं है। ऐसे में शरीफ चाहते हैं कि वह ट्रंप के सबसे करीबी सहयोगी बनकर उभरें। उन्हें लगता है कि ट्रंप की जी-हजूरी करके वह मुस्लिम जगत में भी अपनी धाक जमा पाएंगे और अमेरिका की गुड बुक्स में ऊपर आ जाएंगे, जिससे पाकिस्तान को ग्लोबल लेवल पर अलग-थलग होने से बचाया जा सके।

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सुरक्षा और सैन्य मदद की बहाली

ट्रंप ने अपने पिछले कार्यकाल में पाकिस्तान को दी जाने वाली करोड़ों डॉलर की सैन्य मदद रोक दी थी। शहबाज शरीफ की इस 'बयानबाजी' का एक बड़ा लक्ष्य उस सुरक्षा सहायता को फिर से शुरू करवाना है। पाकिस्तानी सेना को आधुनिक हथियारों और तकनीक की सख्त जरूरत है। ट्रंप को "शांति का दूत" कहना एक तरह की कूटनीतिक रिश्वत है, ताकि व्हाइट हाउस पाकिस्तान की सुरक्षा जरूरतों के प्रति नरम रुख अपनाए और बंद पड़ी इमदाद फिर से शुरू हो जाए।

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