Shree Pitra Chalisa: इस चालीसा बिना अधूरी है अमावस की पूजा, कीजिए पाठ तभी मिलेगी पितृ दोष से मुक्ति

Shree Pitra Chalisa: हिंदू धर्म में पितरों का विशेष स्थान माना गया है। ऐसी मान्यता है कि हमारे पूर्वजों का आशीर्वाद जीवन में सुख, शांति और समृद्धि प्रदान करता है। पितरों को प्रसन्न करने के लिए अमावस्या तिथि को सबसे शुभ माना जाता है, इस दिन पितृ तर्पण, श्राद्ध, दान-पुण्य और पितृ चालीसा का पाठ करने से पितृ दोष के प्रभाव कम होते हैं और पूर्वजों की कृपा प्राप्त होती है इसलिए इस दिन पितृ चालीसा का पाठ जरूर करना चाहिए।

पितृ चालीसा पूर्वजों के प्रति श्रद्धा, सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने का एक आध्यात्मिक माध्यम है। इसका नियमित पाठ करने से व्यक्ति अपने पितरों का स्मरण करता है और उनके प्रति सम्मान प्रकट करता है।

Shree Pitra Chalisa

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पितृ चालीसा का पाठ करने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है तथा परिवार पर उनका आशीर्वाद बना रहता है।

श्री पितृ चालीसा

॥ दोहा ॥

  • हे पितरेश्वर आपको।
  • दे दियो आशीर्वाद।।
  • चरणाशीश नवा दियो।
  • रखदो सिर पर हाथ।।
  • सबसे पहले गणपत।
  • पाछे घर का देव मनावा जी।।
  • हे पितरेश्वर दया राखियो।
  • करियो मन की चाया जी।।
  • ॥ चौपाई ॥
  • पितरेश्वर करो मार्ग उजागर।
  • चरण रज की मुक्ति सागर।।1।।
  • परम उपकार पित्तरेश्वर कीन्हा।
  • मनुष्य योणि में जन्म दीन्हा।।
  • मातृ-पितृ देव मनजो भावे।
  • सोई अमित जीवन फल पावे।।
  • जै-जै-जै पित्तर जी साईं।
  • पितृ ऋण बिन मुक्ति नाहिं।।4।।
  • चारों ओर प्रताप तुम्हारा।
  • संकट में तेरा ही सहारा।।
  • नारायण आधार सृष्टि का।
  • पित्तरजी अंश उसी दृष्टि का।।
  • प्रथम पूजन प्रभु आज्ञा सुनाते।
  • भाग्य द्वार आप ही खुलवाते।।
  • झुंझुनू में दरबार है साजे।
  • सब देवों संग आप विराजे।।8।।
  • प्रसन्न होय मनवांछित फल दीन्हा।
  • कुपित होय बुद्धि हर लीन्हा।।
  • पित्तर महिमा सबसे न्यारी।
  • जिसका गुणगावे नर नारी।।
  • तीन मण्ड में आप बिराजे।
  • बसु रुद्र आदित्य में साजे।।
  • नाथ सकल संपदा तुम्हारी।
  • मैं सेवक समेत सुत नारी।।12।।
  • छप्पन भोग नहीं हैं भाते।
  • शुद्ध जल से ही तृप्त हो जाते।।
  • तुम्हारे भजन परम हितकारी।
  • छोटे बड़े सभी अधिकारी।।
  • भानु उदय संग आप पुजावै।
  • पांच अँजुलि जल रिझावे।।
  • ध्वज पताका मण्ड पे है साजे।
  • अखण्ड ज्योति में आप विराजे।।16।।
  • सदियों पुरानी ज्योति तुम्हारी।
  • धन्य हुई जन्म भूमि हमारी।।
  • शहीद हमारे यहाँ पुजाते।
  • मातृ भक्ति सन्देश सुनाते।।
  • जगत पित्तरो सिद्धान्त हमारा।
  • धर्म जाति का नहीं है नारा।।
  • हिन्दु, मुस्लिम, सिख, ईसाई।
  • सब पूजे पित्तर भाई।।20।।
  • हिन्दु वंश वृक्ष है हमारा।
  • जान से ज्यादा हमको प्यारा।।
  • गंगा ये मरुप्रदेश की।
  • पितृ तर्पण अनिवार्य परिवेश की।।
  • बन्धु छोड़ना इनके चरणाँ।
  • इन्हीं की कृपा से मिले प्रभु शरणा।।
  • चौदस को जागरण करवाते।
  • अमावस को हम धोक लगाते।।24।।
  • जात जडूला सभी मनाते।
  • नान्दीमुख श्राद्ध सभी करवाते।।
  • धन्य जन्म भूमि का वो फूल है।
  • जिसे पितृ मण्डल की मिली धूल है।।
  • श्री पित्तर जी भक्त हितकारी।
  • सुन लीजे प्रभु अरज हमारी।।
  • निशदिन ध्यान धरे जो कोई।
  • ता सम भक्त और नहीं कोई।।28।।
  • तुम अनाथ के नाथ सहाई।
  • दीनन के हो तुम सदा सहाई।।
  • चारिक वेद प्रभु के साखी।
  • तुम भक्तन की लज्जा राखी।।
  • नाम तुम्हारो लेत जो कोई।
  • ता सम धन्य और नहीं कोई।।
  • जो तुम्हारे नित पाँव पलोटत।
  • नवों सिद्धि चरणा में लोटत।।32।।
  • सिद्धि तुम्हारी सब मंगलकारी।
  • जो तुम पे जावे बलिहारी।।
  • जो तुम्हारे चरणा चित्त लावे।
  • ताकी मुक्ति अवसी हो जावे।।
  • सत्य भजन तुम्हारो जो गावे।
  • सो निश्चय चारों फल पावे।।
  • तुमहिं देव कुलदेव हमारे।
  • तुम्हीं गुरुदेव प्राण से प्यारे।।36।।
  • सत्य आस मन में जो होई।
  • मनवांछित फल पावें सोई।।
  • तुम्हरी महिमा बुद्धि बड़ाई।
  • शेष सहस्र मुख सके न गाई।।
  • मैं अतिदीन मलीन दुखारी।
  • करहु कौन विधि विनय तुम्हारी।।
  • अब पित्तर जी दया दीन पर कीजै।
  • अपनी भक्ति शक्ति कछु दीजै।।40।।
  • ॥ दोहा ॥
  • पित्तरौं को स्थान दो।
  • तीरथ और स्वयं ग्राम।।
  • श्रद्धा सुमन चढ़ें वहां।
  • पूरण हो सब काम।।
  • झुंझुनू धाम विराजे हैं।
  • पित्तर हमारे महान।।
  • दर्शन से जीवन सफल हो।
  • पूजे सकल जहान।।
  • जीवन सफल जो चाहिए।
  • चले झुंझुनू धाम।।
  • पित्तर चरण की धूल ले।
  • हो जीवन सफल महान।।

पितृ चालीसा का महत्व

पितृ चालीसा का पाठ विशेष रूप से उन लोगों के लिए लाभकारी माना जाता है जो पितृ दोष, पारिवारिक कलह, आर्थिक परेशानियों या कार्यों में बार-बार आने वाली बाधाओं से परेशान हैं। श्रद्धा और विश्वास के साथ किया गया पाठ मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है।

पितृ चालीसा पाठ के लाभ

पितरों की कृपा प्राप्त होती है।घर में सुख, शांति और समृद्धि आती है।पितृ दोष के प्रभाव कम होते हैं।मानसिक तनाव और चिंता में कमी आती है।परिवार में प्रेम और सौहार्द बढ़ता है। कार्यों में सफलता और उन्नति के मार्ग खुलते हैं।

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हिंदू धर्म में पितरों और पितृ पूजा को इतना महत्वपूर्ण क्यों माना गया है?
हिंदू धर्मग्रंथों में पूर्वजों यानी पितरों को पूजनीय और उच्च स्थान दिया गया है। मान्यता है कि पितर प्रसन्न रहें तो जीवन में तरक्की के रास्ते खुलते हैं और घर-परिवार में सुख, समृद्धि व शांति आती है, इसलिए पितृ पूजा महत्वपूर्ण मानी जाती है।
अमावस्या के दिन पूर्वजों की आराधना के लिए पितृ पूजा कैसे की जाती है?
धार्मिक दृष्टिकोण से अमावस्या को पूर्वजों की आराधना के लिए सर्वोत्तम समय माना गया है। इस दिन मृत पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण, दान-पुण्य और श्राद्ध जैसी क्रियाएं श्रद्धापूर्वक की जाती हैं।
पितृ चालीसा का पाठ क्या दर्शाता है?
पितृ चालीसा को एक आध्यात्मिक माध्यम माना गया है, जिसके जरिए पूर्वजों के प्रति सम्मान, कृतज्ञता और गहरी श्रद्धा व्यक्त की जाती है।
पितृ चालीसा का पाठ करने से किन समस्याओं में मदद मिलती मानी गई है?
इन पाठों को उन लोगों के लिए लाभकारी माना गया है जो आर्थिक तंगी, मानसिक तनाव या पारिवारिक कलह से जूझ रहे हों। मान्यता के अनुसार पितृदोष से आने वाली अप्रत्याशित बाधाओं में भी यह पाठ सकारात्मक ऊर्जा का संचार कर सकता है।
अमावस्या की पूजा में पितृ चालीसा का पाठ क्यों जरूरी माना गया है?
पुजा को तब तक अपूर्ण समझा जाता है जब तक पितृ देव की स्तुति न की जाए। पितृ चालीसा के पाठ से पितृ दोषों के प्रभाव धीरे-धीरे कम होने लगते हैं और पूर्वजों की प्रसन्नता से घर का माहौल शांत व खुशहाल माना गया है।
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