Pakistan: जेल से जिंदा बाहर नहीं आएंगे इमरान खान? पुरानी है मुनीर से दुश्मनी, 2018 के एक फैसले में छुपी है वजह
Pakistan की राजनीति में इस समय एक बड़ा सवाल घूम रहा है- क्या पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान अब भी सेना प्रमुख आसिम मुनीर के लिए खतरा हैं? इमरान खान पिछले दो साल से ज्यादा समय से जेल में हैं। हाल ही में आई रिपोर्ट के मुताबिक उनकी एक आंख की 85 प्रतिशत रौशनी चली गई है। बावजूद इसके, उनके खिलाफ आर्मी की यातनाएं और सरकार की बेरुखी, दोनों में कोई कसर नहीं है। इमरान खान और आर्मी चीफ आसिम मुनीर के रिश्ते साल 2018 से ही कड़वे हैं, जिसका बदला अब मुनीर ले रहे हैं।
इमरान बने PM और शुरु हुई अदावत
साल 2018 में इमरान खान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बने। शुरुआत में सेना और खान के रिश्ते अच्छे माने जाते थे। उसी साल उन्होंने आसिम मुनीर को ISI का चीफ नियुक्त किया। उस समय यह फैसला सामान्य प्रशासनिक बदलाव की तरह देखा गया।

2018-2019: ISI विवाद और पहली बड़ी दरार
आसिम मुनीर का कार्यकाल ISI प्रमुख के रूप में सिर्फ 8 महीने चला, जो एजेंसी के इतिहास में सबसे छोटा था। रिपोर्ट्स के मुताबिक उन्होंने खान की पत्नी बुशरा बीबी से जुड़े भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच शुरू की, यहीं से खेल बिगड़ा और इमरान खान नाराज हो गए। बाद में तत्कालीन सेना प्रमुख कमर जावेद बाजवा के दौर में मुनीर को पद से हटाकर गुंजरांवाला में कोर कमांडर बना दिया गया। यह घटना दोनों के बीच व्यक्तिगत और प्रोफेशनल टकराव की शुरुआत मानी जाती है।
2022: मुनीर का इशारा अविश्वास प्रस्ताव
समय के साथ सेना और इमरान खान के रिश्ते खराब होते गए। 2022 में अविश्वास प्रस्ताव के जरिए खान को प्रधानमंत्री पद से हटा दिया गया। खान और उनके समर्थकों ने इसके लिए आर्मी लीडरशिप को जिम्मेदार ठहराया। यहीं से इन दोनों के बीच की अदावत खुलकर बाहर आने लगी।
सेना के खिलाफ इमरान का मोर्चा
पद से हटने के बाद इमरान खान ने अपने भाषणों में सीधे सेवारत जनरलों के नाम लेने शुरू कर दिए। उन्होंने आसिम मुनीर पर PTI को 'कुचलने की कोशिश' करने का आरोप लगाया। यह पाकिस्तान की राजनीति में असामान्य था, क्योंकि आमतौर पर नेता सीधे सेना प्रमुखों का नाम नहीं लेते।
नवंबर 2022: आसिम मुनीर का कमबैक
नवंबर 2022 में आसिम मुनीर पाकिस्तान के सेना प्रमुख बने। उस समय वे पाकिस्तान आर्मी के नाम पर सामान बेचने वाली और व्यापार करने वाली फौजी फाउंडेशन के चीफ थे, जिस पर पूर्व प्रधानमंत्री खुले आरोप लगा रहे थे। इससे दोनों के बीच तनाव और बढ़ गया। मुनीर इमरान पर शिकंजा कसते चले गए। कुछ ही समय में इमरान के कई पुराने मामलों को खोला गया जिसमें तोशाखाना सबके सामने आ गया। इसमें इमरान खान और उनकी पत्नी बुशरा बीवी पर सरकारी पैसे से गहने खरीदने के आरोप लगे। मुनीर ने इसी के सहारे उन्हें कसना शुरू किया, मामला दर्ज हुआ और उन पर गिरफ्तारी की तलवार लटकने लगी।
9 मई 2023: कैद में कप्तान
9 मई 2023 को इमरान खान की गिरफ्तारी के बाद उनके समर्थकों ने छावनी इलाकों में प्रदर्शन किया। रावलपिंडी में सेना मुख्यालय के गेट तोड़े गए और लाहौर में एक वरिष्ठ जनरल के घर पर हमला हुआ। आसिम मुनीर ने इस दिन को पाकिस्तान के इतिहास का 'काला दिन' कहा। सेना के लिए यह सीधी चुनौती थी।
लिहाजा बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियां हुईं और कुछ प्रदर्शनकारियों पर सैन्य अदालतों में मुकदमे चले। अगस्त 2023 तक इमरान खान खुद भी जेल चले गए। जेल में रहते हुए भी उन्होंने अक्टूबर 2023 में कहा था कि पाकिस्तान 'कठोर राज्य' बन रहा है और 'आसिम कानून' लोकतांत्रिक संस्थानों को दबा रहा है।
जेल में एकांत और मुलाकात विवाद
खान ने आरोप लगाया कि उन्हें पूरी तरह एकांत में रखा गया है। उनके सहयोगियों ने दावा किया कि परिवार और वकीलों को मिलने नहीं दिया गया। इमरान के बच्चों को पाकिस्तान आने के लिए वीजा भी नहीं दिया जा रहा है। अकेले में रहकर उनकी मानसिक स्थिति पर भी बुरा असर पड़ा है। यहां से 'राजनीतिक कैदी' वाला नैरेटिव और मजबूत हुआ। इसके बाद नवंबर 2025 में 27वां संवैधानिक संशोधन पारित हुआ। अनुच्छेद 243 में बदलाव कर आसिम मुनीर को चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज बनाया गया और उन्हें आजीवन इस पद पर रहने की इजाजत दी गई। एक्सपर्ट्स ने इसे साइलेंट तख्तापलट बताया।
नवंबर 2025: मौत की अफवाह और बढ़ती बेचैनी
नवंबर 2025 में एक अफगान समाचार आउटलेट ने दावा किया कि इमरान खान की हिरासत में मौत हो गई है। उस समय खान को चार सप्ताह से किसी ने नहीं देखा था। अदालत के साप्ताहिक मुलाकात आदेश का भी पालन नहीं हुआ था। सरकार की चुप्पी ने हालात और तनावपूर्ण बना दिए। अडियाला जेल के बाहर हजारों समर्थक इकट्ठा हुए और खान के जिंदा होने का सबूत मांगा। हालांकि ये खबर बाद में अफवाह निकली, लेकिन इमरान की जेल में हालत बदतर है और वे अपनी एक आंख भी लगभग खो चुके हैं।
2026: गर्त में जाता पाकिस्तान
2026 तक आते-आते यह साफ हो गया कि यह लड़ाई सिर्फ दो व्यक्तियों के बीच नहीं है। एक तरफ राज्य की ताकत है, दूसरी तरफ जनता का समर्थन। इमरान खान का लंबा अलगाव, उनके स्वास्थ्य को लेकर अस्पष्टता, और सेना की बढ़ती शक्तियों ने पारदर्शिता और लोकतंत्र पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
आज पाकिस्तान आर्थिक दबाव, आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों और क्षेत्रीय बदलावों का सामना कर रहा है। ऐसे समय में देश के सबसे ताकतवर सैन्य नेता और सबसे लोकप्रिय राजनीतिक चेहरे के बीच यह अनसुलझा टकराव राष्ट्रीय अनिश्चितता को और बढ़ा रहा है। यह कहानी 2018 में शुरू हुई थी, लेकिन 2026 तक यह पाकिस्तान की राजनीति का सबसे बड़ा सत्ता संघर्ष बन चुकी है। ऐसे ही तमाम कारण पाकिस्तान को गर्त में ले जा रहे हैं।
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