ममता बनर्जी को बड़ा झटका! TMC के बागी सांसद NCPI में होंगे शामिल, काकोली घोष ने किया NDA को समर्थन का ऐलान

TMC Rebel MPs Merge NCPI: पश्चिम बंगाल की राजनीति और अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (TMC) के आंतरिक ढांचे में अब तक का सबसे बड़ा भूचाल आ चुका है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी के बागी सांसदों ने अब पार्टी से पूरी तरह नाता तोड़ने का मन बना लिया है।

कई दिनों से चल रही सियासी उठापटक के बाद, 14 जून को यह साफ हो गया है कि TMC के बागी सांसद अब त्रिपुरा आधारित 'नेशनलिस्ट सिटीजन पार्टी ऑफ इंडिया' (NCPI) में शामिल होने जा रहे हैं।

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बागी सांसदों की नेता काकोली घोष दस्तीदार ने घोषणा की है कि टीएमसी का विद्रोही गुट त्रिपुरा आधारित नेशनलिस्ट सिटिजन पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में विलय करेगा और संसद में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) का समर्थन करेगा। इस ऐलान को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और पार्टी नेतृत्व के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।

TMC के बागी सांसदों का बड़ा दावा

काकोली घोष दस्तीदार ने कहा कि टीएमसी के करीब दो-तिहाई सांसद उनके साथ हैं और उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को अलग बैठने की व्यवस्था (Separate Seating Arrangement) के लिए पत्र भी सौंप दिया है। उन्होंने कहा,"हम नेशनलिस्ट सिटिजन पार्टी में विलय करेंगे और एनडीए का समर्थन करेंगे। टीएमसी के दो-तिहाई सांसद हमारे साथ हैं और हमने इस संबंध में लोकसभा अध्यक्ष को पत्र दे दिया है।" उनके इस बयान के बाद यह साफ हो गया है कि बागी सांसद अब टीएमसी के भीतर रहकर संघर्ष करने के बजाय अलग राजनीतिक पहचान बनाने की दिशा में आगे बढ़ चुके हैं।

दिल्ली में बढ़ी हलचल: स्पीकर ओम बिरला से मिले बागी सांसद

रविवार को राजधानी दिल्ली में राजनीतिक सरगर्मियां उस समय चरम पर पहुंच गईं, जब युसूफ पठान, काकोली घोष दस्तीदार और सुदीप बंदोपाध्याय सहित टीएमसी के कई बड़े बागी चेहरों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से उनके आवास पर मुलाकात की। बागी गुट का दावा है कि उनके साथ टीएमसी के 22 लोकसभा सांसदों का समर्थन है, जो कि पार्टी की कुल संसदीय संख्या का दो-तिहाई से अधिक है। सांसदों ने आधिकारिक तौर पर स्पीकर से आग्रह किया है कि उन्हें मूल टीएमसी विधायी दल से अलग एक स्वतंत्र संसदीय ब्लॉक (गुट) के रूप में मान्यता दी जाए।

बंगाल चुनाव में हार के बाद बढ़ा संकट

तृणमूल कांग्रेस में यह संकट पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में पार्टी की हार के बाद और गहरा गया। करीब 15 वर्षों तक राज्य की सत्ता में रहने के बाद टीएमसी को भाजपा के हाथों बड़ी चुनावी हार का सामना करना पड़ा।

चुनावी नतीजों के बाद पार्टी के भीतर असंतोष की आवाजें तेज हो गईं। कई सांसदों और विधायकों ने संगठन की कार्यप्रणाली और नेतृत्व को लेकर सवाल उठाने शुरू कर दिए। विशेष रूप से पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी की भूमिका को लेकर असहमति खुलकर सामने आने लगी। कुछ नेताओं का आरोप है कि पार्टी के फैसलों पर अभिषेक का प्रभाव लगातार बढ़ता गया, जिससे पुराने नेताओं में नाराजगी पैदा हुई।

अभिषेक बनर्जी ने भी खोला मोर्चा

बागी सांसदों की सक्रियता के बीच अभिषेक बनर्जी ने रविवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को एक पत्र लिखकर स्पष्ट किया कि तृणमूल कांग्रेस एक अविभाज्य राजनीतिक दल है और उसके भीतर किसी समानांतर गुट को मान्यता नहीं दी जानी चाहिए।

यह पत्र टीएमसी सांसद कीर्ति आजाद और सागरिका घोष ने लोकसभा अध्यक्ष को सौंपा। पत्र में अभिषेक ने लिखा, "मीडिया रिपोर्ट्स के जरिए जानकारी मिली है कि टीएमसी के कुछ सांसद अलग गुट या समूह के रूप में मान्यता पाने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन AITC एक ही राजनीतिक दल है और कानून की नजर में उसका कोई समानांतर गुट नहीं हो सकता।"

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संसद में बदल सकते हैं समीकरण

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि टीएमसी के बागी सांसद वास्तव में एनसीपीआई में शामिल होकर एनडीए का समर्थन करते हैं, तो इसका असर सिर्फ पश्चिम बंगाल तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि संसद के भीतर भी राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि कितने सांसद औपचारिक रूप से टीएमसी छोड़ेंगे और एनसीपीआई में शामिल होंगे। लेकिन काकोली घोष दस्तीदार का दावा है कि उनके साथ बड़ी संख्या में सांसद हैं, जिससे पार्टी नेतृत्व की चिंता बढ़ सकती है।

अब सबकी नजर इस बात पर है कि ममता बनर्जी और टीएमसी नेतृत्व इस संकट से कैसे निपटते हैं और क्या पार्टी बागी नेताओं को वापस अपने साथ ला पाएगी या पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नए राजनीतिक अध्याय की शुरुआत होने जा रही है।

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