'तृणमूल एक है, दो नहीं' TMC बागियों के खिलाफ Abhishek Banerjee ने खोला मोर्चा, लोकसभा स्पीकर को लिखी चिट्ठी

TMC Abhishek Banerjee Letter Om Birla: पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) में जारी अंदरूनी कलह अब संसद तक पहुंच गई है। पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी (Abhishek Banerjee) ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर मांग की है कि पार्टी के बागी सांसदों के किसी भी अलग गुट या धड़े को संसद में मान्यता न दी जाए।

यह कदम तब उठाया गया है जब काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व में टीएमसी के कम से कम 19-20 बागी सांसदों का एक बड़ा समूह लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात करने के बाद NCPI को अपना समर्थन दिया है।

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अभिषेक ने साफ कहा कि तृणमूल कांग्रेस एक ही, अविभाज्य राजनीतिक दल है और पार्टी के भीतर किसी समानांतर गुट को मान्यता नहीं दी जा सकती। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब TMC के बागी सांसदों का एक समूह लोकसभा में खुद को अलग पहचान दिलाने और रियल TMC होने का दावा करते हुए सोमवार, 16 जून को स्पीकर से मिलने की तैयारी कर रहा है।

लोकसभा स्पीकर को सौंपा पत्र

अभिषेक बनर्जी का पत्र रविवार, 14 जून को TMC सांसद कीर्ति आजाद और सागरिका घोष ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को सौंपा। पत्र में अभिषेक ने मीडिया रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए कहा कि कुछ सांसद खुद को पार्टी से अलग गुट के रूप में मान्यता दिलाने की कोशिश कर रहे हैं, जो न तो कानूनी रूप से सही है और न ही संसदीय परंपराओं के अनुरूप।

पत्र में उन्होंने लिखा कि उन्हें जानकारी मिली है कि टीएमसी के कुछ सांसद लोकसभा अध्यक्ष से संपर्क कर पार्टी के आधिकारिक संसदीय दल से अलग पहचान की मांग कर सकते हैं। उन्होंने आग्रह किया कि ऐसे किसी भी प्रयास को स्वीकार न किया जाए।

'TMC एक ही पार्टी, कोई समानांतर गुट नहीं'

अभिषेक बनर्जी ने अपने पत्र में स्पष्ट शब्दों में कहा कि ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (AITC) एक एकीकृत और अविभाज्य राजनीतिक दल है। पार्टी का एक ही अधिकृत नेतृत्व है, एक ही संसदीय दल का नेता है और एक ही अधिकृत व्हिप है। उन्होंने लिखा,कानून की नजर में केवल एक ही AITC है। पार्टी के भीतर कोई सांसद या सांसदों का समूह अपनी इच्छा से अलग गुट बनाकर खुद को स्वतंत्र इकाई के रूप में पेश नहीं कर सकता। अभिषेक ने यह भी कहा कि किसी समानांतर गुट को मान्यता देना पार्टी की संवैधानिक संरचना और लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ होगा।

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बागी सांसदों का दावा- हम ही हैं 'असली TMC'

दूसरी ओर, TMC के भीतर बगावत का झंडा उठाने वाले सांसदों का समूह अब खुलकर पार्टी नेतृत्व को चुनौती दे रहा है। जानकारी के मुताबिक, काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व में करीब 19 सांसदों का एक गुट लोकसभा अध्यक्ष से मिलने वाला है। बागी सांसदों की मांग है कि उन्हें संसद में अलग पहचान दी जाए और उन्हें सदन में सत्तारूढ़ भाजपा-नीत एनडीए के सांसदों के साथ बैठने की अनुमति मिले। इतना ही नहीं, यह गुट खुद को वास्तविक तृणमूल कांग्रेस बताने की तैयारी में भी है।

किन सांसदों के नाम सामने आए?

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बागी खेमे में शामिल सांसदों की सूची में कई बड़े नाम शामिल हैं। इनमें बापी हलदार, डॉ. शर्मिला सरकार, प्रसून बंद्योपाध्याय, जगदीश वर्मा बसुनिया, असीत कुमार माल, अरूप चक्रवर्ती, रचना बनर्जी, सायोनी घोष, खलीलुर रहमान, अबू ताहेर खान, यूसुफ पठान, मिताली बाग, माला रॉय, कालिपद सोरेन, दीपक अधिकारी, जून मालिया और पार्थ भौमिक जैसे सांसदों के नाम बताए जा रहे हैं। हालांकि पार्टी नेतृत्व की ओर से अभी इन सभी नामों पर औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है।

TMC में क्यों बढ़ रहा है संकट?

पिछले कुछ समय से तृणमूल कांग्रेस के भीतर असंतोष लगातार बढ़ता दिखाई दे रहा है। कई नेताओं और सांसदों ने पार्टी के संगठनात्मक ढांचे और नेतृत्व शैली को लेकर सवाल उठाए हैं। कुछ नेताओं ने अप्रत्यक्ष रूप से पार्टी महासचिव अभिषेक बनर्जी की कार्यशैली पर भी नाराजगी जाहिर की है। हाल ही में वरिष्ठ नेता कल्याण बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के बीच विवाद भी सुर्खियों में रहा था। इसके बाद कई सांसदों के पार्टी से अलग रुख अपनाने की खबरों ने टीएमसी के भीतर चल रहे संकट को और गहरा कर दिया।

ममता बनर्जी के सामने बड़ी चुनौती

पार्टी में बढ़ती बगावत के बीच अब सबसे बड़ी जिम्मेदारी मुख्यमंत्री और पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी के कंधों पर आ गई है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि बागी सांसदों को मनाने में पार्टी नेतृत्व सफल नहीं हुआ, तो इसका असर संसद के साथ-साथ पश्चिम बंगाल की राजनीति पर भी पड़ सकता है।

फिलहाल सभी की नजर सोमवार को होने वाली उस बैठक पर टिकी है, जिसमें बागी सांसद लोकसभा अध्यक्ष से मिलकर अपनी मांगें रखेंगे। वहीं अभिषेक बनर्जी का पत्र यह संकेत दे रहा है कि टीएमसी नेतृत्व किसी भी कीमत पर पार्टी के भीतर समानांतर गुट को मान्यता नहीं मिलने देना चाहता।

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