आसमान छूने का जज़्बा: Ishita Sangwan ने NDA में रचा इतिहास, दादी से किया वादा निभाया
Ishita Sangwan First Female Fighter Pilot From NDA: भारतीय वायुसेना के इतिहास में एक नया स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया है। हरियाणा की बेटी इशिता सांगवान ने नेशनल डिफेंस सर्विस (NDA) की पहली महिला पायलट बनकर इतिहास रच दिया है। इशिता सांगवान इंडियन एयर फोर्स में फायटर पायलट बनकर आसमान में ऊंची उड़ान भरने का अपना सपना पूरा किया है।
इशिता 12वीं कक्षा में थी तभी सुप्रीम कोर्ट ने देश की बेटियों के पक्ष में फैसला सुनाते हुए एनडीए परीक्षा में महिलाओं को बैठने की परमीशन दी थी। कोर्ट के इस फैसले की जानकारी इशिता को उनके पिता ने फोन पर दी, तभी इन्होंने इंडियन एयर फोर्स में फाइटर पायलट बनने की ठान ली। इशिता सांगवान को ये उपलब्धि वर्ष 2021 के सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश के पांच साल बाद मिली है।

इशिता सांगवान बनीं फाइटर पायलट
इशिता सांगवान को 13 जून, 2026 को हैदराबाद के डुंडीगल स्थित एयर फोर्स एकेडमी में आयोजित कंबाइंड ग्रेजुएशन की पासिंग आउट परेड में कमीशन हासिल किया। इस परेड के मौके पर केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह मौजूद थे। परीक्षा पास कर भारतीय वायुसेना में कमीशन हासिल करने वाले कुल 231 कैडेट्स में 194 पुरुष और 37 महिलाएं शामिल थीं। इशिता अपने ग्रुप की उन बहादुर महिला पायलटों में शामिल हैं, जिन्होंने सैन्य विमानन के सबसे कठिन क्षेत्र यानी फाइटर पायलट के रूप में उड़ान भरने का विकल्प चुना है।
कौन हैं इशिता सांगवान? राजस्थान से क्या है नाता
इशिता मूल रूप से हरियाणा के चरखी दादरी स्थित छपार गांव की निवासी हैं, हालांकि उनका पूरा बचपन राजस्थान में बीता। उनके पिता चरण सिंह सांगवान एक निजी स्कूल में प्रिंसिपल हैं, जबकि मां अनीता सांगवान हिंदी की शिक्षिका हैं। उनकी जुड़वां बहन आस्था एमबीबीएस (MBBS) की पढ़ाई कर रही हैं और उसने दो मिनट ही बड़ी हैं। भाई आर्यन पुणे से इंजीनियरिंग कर रहा है।
इशिता ने दादी से किया 12 साल पुराना वादा किया पूरा
इशिता ने अपनी स्वर्गीय दादी लीछमा देवी से बचपन में वादा किया था कि वह एक दिन सेना में बड़ी अधिकारी बनेंगी। आज उनकी दादी इस गौरवपूर्ण पल को देखने के लिए जीवित नहीं हैं, लेकिन परिवार को पूरा विश्वास है कि उनका आशीर्वाद हमेशा इशिता के साथ रहा। उन्होंने कड़ी मेहनत से बचपन में देखा अपना सपना आज सच कर दिखाया है।
बचपन से होनहार रहीं इशिता
अपनी स्कूली शिक्षा नागौर और चूरू से पूरी करने वाली इशिता बचपन से ही बेहद होनहार थीं। वह हर दिन आठ-आठ घंटे पढ़ाई करती थीं। वह पढ़ाई के साथ-साथ खेलों में भी काफी शानदार थीं और उन्होंने स्टेट लेवल पर बास्केटबॉल खेला है। उनकी जुड़वां बहन बताती हैं कि इशिता में बचपन से ही कुछ अलग करने और लीक से हटकर जोखिम लेने का अभूतपूर्व जुनून था।
पहले ही प्रयास में पास की NDA परीक्षा
इशिता ने 12 की बोर्ड परीक्षाओं के बीच ही सीमित समय में एनडीए की कठिन लिखित परीक्षा की तैयारी की और पहले ही प्रयास में क्लियर कर ली। इसके बाद उन्होंने एसएसबी का इंटरव्यू, मेडिकल टेस्ट और पायलट बनने के लिए आवश्यक 'कंप्यूटराइज्ड पायलट सिलेक्शन सिस्टम' (सीपीएसएस) को भी पास किया। इन बेहद कठिन चरणों को पार कर उन्होंने पहले महिला एनडीए बैच में अपनी जगह पक्की की।
NDA की सख्त ट्रेनिंग भी नहीं डिगा पाया इशिता का हौसला
खड़कवासला स्थित सेना अकादमी में साल 2022 से उन्होंने आर्मी और नेवी के कैडेटों के साथ मिलकर बहुत ही कठोर सेना की ट्रेनिंग शुरू की। मई 2025 में एनडीए के पहले महिला पासिंग आउट बैच से ग्रेजुएट होने के बाद, उन्होंने प्री-कमीशन फ्लाइंग ट्रेनिंग के लिए डुंडीगल ज्वाइन किया। यहां उन्होंने हाई स्पीड वाले आधुनिक लड़ाकू विमानों को उड़ाने का हुनर सीखा।
इशिता की उपलब्धि क्यों है खास?
वायुसेना के लड़ाकू बेड़े में महिलाओं को सबसे पहले साल 2016 में शॉर्ट सर्विस कमीशन के माध्यम से जगह मिली थी, जिसमें अवनी चतुर्वेदी, भावना कंठ और मोहना सिंह शामिल थीं। इशिता का चयन इसलिए अभूतपूर्व है क्योंकि वह सीधे एनडीए परीक्षा के रास्ते स्थायी कमीशन पाकर इस मुकाम पर पहुंचने वाली हमारी बेटियों के पहले समूह का प्रतिनिधित्व करती हैं।
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