कछुआ क्यों जीता है इतना लंबा, चूहे की क्यों हो जाती है जल्दी मौत? वजह है बेहद खास

वैज्ञानिकों ने चिरकाल तक युवा बने रहने का राज ढूंढ़ लिया है। साइंस जर्नल में गुरुवार को प्रकाशित दो अध्ययनों में ठंडे खून वाली प्रजातियों के बूढ़े होने से बचने के प्रमाण प्रस्तुत किए गए हैं।

एडिलेड, 24 जूनः क्या आपने कभी इस रहस्य के बारे में सोचा है कि कुछ जीवों का जीवन लंबा क्यों होता है? खैर आपने सोचा तो होगा ही। बाकी वैज्ञानिकों ने चिरकाल तक युवा बने रहने का राज ढूंढ़ लिया है। साइंस जर्नल में गुरुवार को प्रकाशित दो अध्ययनों में ठंडे खून वाली प्रजातियों के बूढ़े होने से बचने के प्रमाण प्रस्तुत किए गए हैं। अपने निष्कर्षों में वैज्ञानिकों ने पहली बार पाया है कि कछुए, मगरमच्छ आदि जंतुओं के उम्र बढ़ने की दर बेहद कम है।

77 प्रजातियों पर हुआ शोध

77 प्रजातियों पर हुआ शोध

आपने शायद कछुओं को एक लंबा जीवन जीते हुए सुना होगा। 190 साल की उम्र में सेशेल्स का जोनाथन नामक विशाल कछुआ भूमि का सबसे उम्रदराज प्राणी माना जाता है। लेकिन कुछ जानवर दूसरों की तुलना में अधिक समय तक क्यों जीवित रहते हैं? इस सवाल का जवाब जानने के लिए वैज्ञानिकों ने सरीसृपों और उभयचरों की 77 विभिन्न प्रजातियों के दीर्घकालिक डेटा का उपयोग किया। ये सभी ठंडे खून वाले जानवर थे।

ठंडे खून वाले दीर्घायु होते हैं

ठंडे खून वाले दीर्घायु होते हैं

इन आंकड़ों की तुलना गर्म खून वाले जानवरों की मौजूदा जानकारी से की गई और उम्र बढ़ने के बारे में कई अलग-अलग विचार सामने आए। शोध के दौरान पाया गया कि ठंडे खून वाले जानवर जैसे मेंढक, सैलामैंडर और सरीसृप लंबे समय तक जीवित रहते हैं क्योंकि उनकी उम्र बढ़ने की रफ्तार धीमी होती है। इन जानवरों को अपने शरीर के तापमान को नियंत्रित करने में मदद करने के लिए बाहरी तापमान पर निर्भर रहना पड़ता है। परिणामस्वरूप उनके चयापचय धीमें होते हैं (जिस दर पर वे जो खाते हैं और पीते हैं उसे ऊर्जा में परिवर्तित करते हैं)।

गर्म खून वालों की जल्दी होती है मौत

गर्म खून वालों की जल्दी होती है मौत

जानवर जो छोटे और गर्म रक्त वाले होते हैं, जैसे कि चूहे, छोटी उम्र के होते हैं क्योंकि उनका चयापचय तेज होता है- और कछुए की उम्र धीरे बढ़ती है क्योंकि उनका चयापचय धीमा होता है। इस तर्क से, ठंडे खून वाले जानवरों में समान आकार के गर्म खून वाले जीवों की तुलना में कम चयापचय होना चाहिए। वैज्ञानिकों ने पाया कि ठंडे खून वाले जानवर समान आकार के गर्म खून वाले जानवरों की तुलना में जल्दी बूढ़े नहीं होते हैं।

पर्यावरण का भी है असर

पर्यावरण का भी है असर

इसके साथ ही एक अन्य संबंधित सिद्धांत यह निकाला गया कि पर्यावरणीय तापमान भी जीवों की बड़ी उम्र के लिए एक चालक हो सकता है। जैसे कि ठंडे इलाकों में जानवर अधिक धीरे-धीरे भोजन संसाधित करते हैं और उनमें निष्क्रियता की अवधि होती है, जैसे हाइबरनेशन में - जिससे जीवनकाल में समग्र वृद्धि होती है। इस हिसाब से ठंडे क्षेत्रों में ठंडे और गर्म रक्त वाले दोनों जानवर गर्म क्षेत्रों के जानवरों की तुलना में अधिक समय तक जीवित रहेंगे।

गर्म जगहों पर जल्दी बढ़ती है उम्र

गर्म जगहों पर जल्दी बढ़ती है उम्र

हालांकि वैज्ञानिकों के मुताबिक यह सिद्धांत एक समूह के रूप में सरीसृपों के लिए सही था, लेकिन उभयचरों के लिए नहीं। महत्वपूर्ण रूप से, यह खोज ग्लोबल वार्मिंग के प्रभावों से जुड़ी है, जिसका मतलब है कि स्थायी रूप से गर्म वातावरण में सरीसृपों की उम्र तेजी से बढ़ सकती है।

तस्वीर- फाइल

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