Russia Election: 19 साल बाद चुनावी मैदान में उतरेंगे पुतिन! बचा पाएंगे सत्ता? कहां से आई खबर?

Russia Election: रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध को चार साल से ज्यादा हो चुके हैं। लेकिन अब यह लड़ाई सिर्फ सीमा या यूक्रेन तक सीमित नहीं रह गई है। यूक्रेन लगातार ऐसे ड्रोन हमले कर रहा है, जो रूस के अंदर तक पहुंच रहे हैं। इन हमलों ने रूसी एयर डिफेंस की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब मॉस्को और सेंट पीटर्सबर्ग जैसे बड़े शहर भी इन हमलों की जद में आने लगे हैं। इससे रूस के आम लोगों के बीच सुरक्षा को लेकर चिंता पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गई है।

ड्रोन हमलों से आम लोगों की जिंदगी भी हो रही प्रभावित

यूक्रेन के ड्रोन हमलों का असर अब सिर्फ सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं है। कई जगहों पर बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा है, जिससे आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही है। लगातार हो रहे हमलों की वजह से लोगों में डर का माहौल बन गया है और अब युद्ध का असर सीधे नागरिकों तक पहुंचने लगा है।

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तेल रिफाइनरियों पर हमले, ईंधन संकट और इंटरनेट बंद

रूस की कई प्रमुख तेल रिफाइनरियों पर लगातार हमले हुए हैं। इसका असर यह हुआ कि कई इलाकों में ईंधन की कमी देखने को मिल रही है। इसके अलावा सुरक्षा कारणों का हवाला देकर कई जगह इंटरनेट सेवाएं भी बंद की जा रही हैं। इससे लोगों को रोजमर्रा के कामों में दिक्कत हो रही है और सरकार के प्रति नाराजगी भी बढ़ रही है। अब युद्ध की वजह से पैदा हुई आर्थिक और तकनीकी परेशानियों को छिपाना सरकार के लिए आसान नहीं रह गया है।

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पुतिन ने भी माना- ड्रोन हमलों से बढ़ी मुश्किलें

पोलैंड की TVP World न्यूज के मुताबिक रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने हाल ही में स्वीकार किया कि यूक्रेन के ड्रोन हमलों की वजह से देश के अंदर कई तरह की परेशानियां और असुविधाएं पैदा हुई हैं। हालांकि, इन नुकसानों को मानने के बावजूद क्रेमलिन अपने रुख में कोई बदलाव करने के मूड में नहीं है। रूस अब भी शांति वार्ता को लेकर सख्त रुख अपनाए हुए है, जिससे जल्द किसी समाधान की उम्मीद कम दिखाई देती है।

संसदीय चुनाव से पहले बढ़ी सरकार की चिंता

रूस में सितंबर में संसदीय चुनाव होने वाले हैं। ऐसे समय में बढ़ती महंगाई, सुरक्षा चुनौतियां और जनता की नाराजगी सरकार के लिए चिंता का विषय बन गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि लोगों का गुस्सा सीधे पुतिन से ज्यादा सत्ताधारी यूनाइटेड रशिया पार्टी पर निकल रहा है। यही वजह है कि चुनाव से पहले पार्टी अपनी रणनीति बदलने में जुट गई है।

यूनाइटेड रशिया की लोकप्रियता 30% तक पहुंची

ताजा राजनीतिक आंकड़ों के मुताबिक यूनाइटेड रशिया पार्टी की लोकप्रियता घटकर करीब 30 प्रतिशत रह गई है, जो अब तक का सबसे निचला स्तर माना जा रहा है। वहीं राष्ट्रपति पुतिन पर जनता का भरोसा भी गिरकर 69 प्रतिशत पर पहुंच गया है। साल 2022 में यूक्रेन पर हमले की शुरुआत के बाद यह उनका सबसे कम भरोसे का आंकड़ा है। हालांकि वैश्विक स्तर पर 69 प्रतिशत अभी भी बड़ा आंकड़ा माना जाता है, लेकिन रूस के लिए यह गिरावट चिंता का संकेत है।

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अब पार्टी नहीं, सिर्फ पुतिन के चेहरे पर चुनाव

चुनावी नुकसान से बचने के लिए यूनाइटेड रशिया पार्टी ने अपनी नीतियों को पीछे कर दिया है। अब पार्टी खुद को 'राष्ट्रपति की पार्टी' बताकर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है। रणनीतिकारों को उम्मीद है कि पुतिन की व्यक्तिगत लोकप्रियता और उनके प्रति लोगों की वफादारी पार्टी को चुनाव में फायदा दिला सकती है। ऐसे में यदि चुनाव होता है तो पुतिन 19 साल के बाद चुनावी मैदान में उतरेंगे।

यूक्रेन ने दिया सीजफायर का प्रस्ताव, रूस ने किया इनकार

इस बीच यूक्रेन ने रूस के सामने एक सीमित सीजफायर का प्रस्ताव रखा था। इस प्रस्ताव के तहत दोनों देशों को ऊर्जा से जुड़े ढांचे और नागरिक इलाकों पर ड्रोन और मिसाइल हमले रोकने थे। अगर यह प्रस्ताव स्वीकार हो जाता तो दोनों देशों के आम नागरिकों को बड़ी राहत मिल सकती थी। लेकिन क्रेमलिन ने इस प्रस्ताव को तुरंत खारिज कर दिया।

पुतिन क्यों नहीं मान रहे सीजफायर?

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अगर रूस इस समय किसी टेम्परेरी सीजफायर पर सहमत होता, तो इसे उसकी कमजोरी के तौर पर देखा जा सकता था। यही वजह है कि पुतिन अपनी मजबूत छवि बनाए रखने को ज्यादा अहमियत दे रहे हैं। उनके लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ताकतवर नेता की छवि बनाए रखना फिलहाल सबसे बड़ी प्राथमिकता माना जा रहा है।

नाराजगी बढ़ रही, लेकिन लोग खुलकर विरोध नहीं कर पा रहे

रूस के अंदर लोगों में असंतोष जरूर बढ़ रहा है, लेकिन सड़कों पर बड़े प्रदर्शन नहीं दिखाई दे रहे हैं। इसकी वजह युद्ध के सख्त कानून, कड़ी सेंसरशिप और सुरक्षा एजेंसियों की सख्त कार्रवाई मानी जा रही है। लोग खुलकर विरोध नहीं कर पा रहे हैं, लेकिन सरकार के प्रति अविश्वास लगातार बढ़ता जा रहा है।

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ड्रोन हमले जारी रहे तो बढ़ सकती है क्रेमलिन की मुश्किल

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यूक्रेन के ड्रोन हमले इसी तरह जारी रहे और रूस के अंदर बुनियादी सुविधाएं प्रभावित होती रहीं, तो क्रेमलिन के लिए हालात संभालना मुश्किल हो सकता है। राष्ट्रीय सुरक्षा बनाए रखना, आर्थिक चुनौतियों से निपटना और जनता का भरोसा दोबारा जीतना अब रूस सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। पूरी दुनिया की नजर इस बात पर है कि आने वाले महीनों में रूस इस संकट से कैसे निपटता है।

इस खबर पर आपकी क्या राय है, हमें कमेंट में बताएं।

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