'लोग भूल गए कि मैं भी एक इंसान हूं', तिहाड़ जेल से उमर खालिद का पहला इंटरव्यू, विपक्षी पार्टी पर क्यों गुस्सा?

Umar Khalid: "जब आपको सिर्फ एक कड़क छवि में बदल दिया जाता है, चाहे वह अच्छी हो या बुरी, तो समाज में अपनी इंसानियत और कभी-कभी अपना मानसिक संतुलन बनाए रखना बेहद मुश्किल हो जाता है।" ये बातें छह साल से दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद उमर खालिद ने एक इंटरव्यू में कही है। साल 2020 के दिल्ली दंगों के आरोप में जेल जाने के बाद उमर खालिद का ये पहला इंटरव्यू है।

सख्त पाबंदियों के बीच अपने परिवार और करीबियों के जरिए ब्रिटिश अखबार 'द गार्जियन' को दिए इंटरव्यू में उमर खालिद ने जेल के भीतर की मानसिक प्रताड़ना और अकेलेपन पर बात की है। उन्होंने कहा कि इतनी लंबी कैद ने उनसे उनकी इंसानियत तक छीन ली है। उमर खालिद ने कहा, ''इंसानियत एक अधिकार है, जो मेरे जैसे लोगों को नहीं मिला है।''

umar khalid

उमर खालिद बोले- "मेरे लिए इंसान होना एक लग्जरी जैसा"

जेल के माहौल और समाज के बदले नजरिए पर बात करते हुए 38 साल के उमर खालिद ने बताया कि प्रोपेगैंडा और नफरत ने उन्हें लोगों की नजरों में एक इंसान की जगह सिर्फ एक विलेन बना दिया है। जेल के भीतर के अनुभवों को साझा करते हुए उमर खालिद ने कहा,

"आप जेल में जिन कैदियों के साथ बैठकर खाना खाते हैं, उन्हीं के मुंह से अपने पीठ पीछे फुसफुसाहट सुनते हैं। वे आपको आतंकवादी बुलाते हैं। बाहर का प्रोपेगैंडा आपको पूरी तरह तोड़ देता है। मेरे जैसे लोगों के लिए इंसान समझा जाना भी एक ऐसा विशेषाधिकार (प्रिविलेज) बन चुका है, जो हमें आसानी से नहीं मिलता।"

खालिद ने उन लोगों से भी नाराजगी जताई जो उनके साथ हमदर्दी रखते हैं। उन्होंने कहा,

''जो लोग मुझे बहुत बड़ा हीरो बनाकर दिखाते हैं, वे भी अक्सर यह भूल जाते हैं कि मैं हाड़-मांस का इंसान हूं। मेरी भी अपनी कमजोरियां हैं, मेरे भीतर भी डर है। जेल के इन लंबे सालों ने मेरे दिमाग और शरीर को बुरी तरह निचोड़ दिया है और मेरी घबराहट को कई गुना बढ़ा दिया है।''

Umar Khalid: 'बहनें कर सकती हैं मां का देखभाल',उमर खालिद की जमानत याचिका खारिज, क्यों नहीं मिली बेल?
Umar Khalid: 'बहनें कर सकती हैं मां का देखभाल',उमर खालिद की जमानत याचिका खारिज, क्यों नहीं मिली बेल?

विपक्ष और एक्टिविस्टों की चुप्पी से निराशा: खुद को बताया अकेला

जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) के पूर्व छात्र नेता ने देश के मौजूदा राजनीतिक माहौल पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि आज के समाज में नफरत भरे बयानों और हिंसा की भाषा को आम बात मान लिया गया है और इसका जश्न मनाया जाता है। इसके साथ ही उन्होंने विपक्षी राजनीतिक दलों और सिविल सोसाइटी पर अपनी चुप्पी को लेकर बड़ा आरोप लगाया।

खालिद ने खुलकर कहा कि छह साल जेल में बिताने के बाद आज वह खुद को बेहद अकेला और निराश महसूस कर रहे हैं। विपक्षी पार्टियां, बड़े-बड़े आंदोलनों के दम पर अपना करियर बनाने वाले सेलिब्रिटी एक्टिविस्ट और मानवाधिकार संगठन आज इस दमन पर पूरी तरह खामोश हैं। इसी चुप्पी की वजह से सरकार को उन लोगों को निशाना बनाने की और ताकत मिलती है जो सत्ता के खिलाफ आवाज उठाते हैं।

हालांकि उन्होंने साफ किया कि इतनी प्रताड़ना के बाद भी वह अपने पुराने रास्ते को नहीं छोड़ेंगे। उन्होंने 2019 के सीएए (CAA) विरोधी आंदोलन के अपने संदेश को दोहराते हुए कहा कि हम हिंसा का जवाब हिंसा से और नफरत का जवाब नफरत से कभी नहीं देंगे। अगर वे नफरत फैलाएंगे, तो हम प्यार से जवाब देंगे।

उमर खालिद मामले पर 4 जुलाई को अब होगी सुनवाई

उमर खालिद को सितंबर 2020 में कड़े आतंकवाद विरोधी कानून (UAPA) के तहत दिल्ली दंगों की साजिश रचने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। इस मामले में बीजेपी और सरकारी एजेंसियों का हमेशा से स्टैंड रहा है कि देश की अदालतें पूरी तरह आजाद हैं और यह कार्रवाई राजनीति से प्रेरित बिल्कुल नहीं है।

इस बीच उमर खालिद की कानूनी लड़ाई में एक नई उम्मीद जागी है। कड़कड़डूमा कोर्ट के एडिशनल सेशंस जज सुमेध कुमार सेठी ने दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी कर इस मामले की अगली सुनवाई 4 जुलाई के लिए तय की है। खालिद ने अपनी नई जमानत अर्जी में सुप्रीम कोर्ट के एक हालिया फैसले का हवाला दिया है।

18 मई को सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की बेंच ने एक नार्को-टेरर मामले में सैयद इफ्तिखार अंद्राबी को जमानत दी थी। इस फैसले में कोर्ट ने साफ कहा था कि जेल में बहुत लंबा वक्त बिताना और ट्रायल (मुकदमे की सुनवाई) में जरूरत से ज्यादा देरी होना, UAPA कानून की सख्त शर्तों के बावजूद जमानत देने की वजह बन सकता है।

देश की सबसे बड़ी अदालत ने इस बात पर भी कड़ा ऐतराज जताया था कि किसी आरोपी को साल भर तक सिर्फ इसलिए अंदर रखा जाए कि जब तक गवाहों के बयान न हो जाएं। इसी कानूनी बदलाव को ढाल बनाकर अब उमर खालिद ने कोर्ट से रिहाई की गुहार लगाई है।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+