Europe Heatwave: यूरोप बना 'आग का गोला'! अस्पताल फुल-कब्रिस्तान भरे, क्यों धधक उठा सूरज?- Video
Europe Heatwave: यूरोप इस समय अपने इतिहास की सबसे भयानक गर्मी का सामना कर रहा है। लगातार बढ़ते तापमान ने पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं और कई देशों में हालात गंभीर हो गए हैं। अस्पतालों में मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है और मौतों का आंकड़ा भी लगातार ऊपर जा रहा है। आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी बुरी तरह प्रभावित हुई है और कई जगहों पर बुनियादी सुविधाएं भी जवाब देने लगी हैं।
WHO की चेतावनी, 15 करोड़ लोग जानलेवा गर्मी की चपेट में
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के प्रमुख टेड्रोस अदनोम गेब्रेयेसस ने चेतावनी दी है कि यूरोप दुनिया का सबसे तेजी से गर्म होने वाला महाद्वीप बन चुका है। उनके मुताबिक, यह क्षेत्र वैश्विक औसत से करीब दोगुनी रफ्तार से गर्म हो रहा है। फिलहाल लगभग 15 करोड़ लोग इस भीषण गर्मी से प्रभावित हैं। कई देशों में तापमान इतना बढ़ गया है कि स्कूल बंद करने पड़े हैं और बिजली ग्रिड पर भी भारी दबाव बन गया है।

जर्मनी में पिघली ट्राम की पटरियां, बर्लिन में सड़कों पर चला वाटर कैनन
गर्मी का असर अब सिर्फ लोगों पर ही नहीं बल्कि इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी साफ दिखाई दे रहा है। जर्मनी के लीपज़िग शहर में तेज गर्मी के कारण ट्राम की पटरियां पिघल गईं, जिससे ट्राम सेवाएं रोकनी पड़ीं। वहीं राजधानी बर्लिन में लोगों को राहत देने के लिए पुलिस सड़कों पर वाटर कैनन से पानी की बौछारें कर रही है। यह नजारा बताता है कि हालात कितने गंभीर हो चुके हैं।
धूप में पक रहे अंडे, पिघल रहे जूते और सिग्नल
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो इस गर्मी की गंभीरता को दिखा रहे हैं। कहीं लोग धूप में रखे बर्तन में अंडे पका रहे हैं, तो कहीं प्लास्टिक के जूते और सामान पिघलते दिखाई दे रहे हैं। दुकानों में बिना फ्रिज के रखी चॉकलेट और दूसरी चीजें कुछ ही मिनटों में पिघल रही हैं। इससे साफ है कि सामान्य जीवन भी अब मुश्किल होता जा रहा है।
फ्रांस में मौतों का आंकड़ा बढ़ा, शव दफनाने के लिए लगी लाइनें
फ्रांस में स्थिति सबसे ज्यादा चिंताजनक बताई जा रही है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, जून के आखिरी सप्ताह से अब तक सामान्य से करीब 1,000 ज्यादा मौतें दर्ज की गई हैं। राष्ट्रीय अंतिम संस्कार संघ के मुताबिक, शवदाह गृहों और कब्रिस्तानों में काम का दबाव सामान्य 30-45% से बढ़कर 60% से ज्यादा हो गया है।
पेरिस में भर गए कब्रिस्तान, परिवारों को जाना पड़ रहा दूर
पेरिस के कई शवदाह गृह पूरी तरह भर चुके हैं। इसकी वजह से लोगों को अपने परिजनों का अंतिम संस्कार करने के लिए शहर से दूर उपनगरीय और ग्रामीण इलाकों में जाना पड़ रहा है। अंतिम संस्कार से जुड़े अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि अगर तापमान जल्द कम नहीं हुआ, तो पूरी व्यवस्था पर बड़ा संकट आ सकता है क्योंकि कब्र खोदने और शवदाह की क्षमता सीमित है।
युद्ध के बीच यूक्रेन पर मौसम की दोहरी मार
रूस के साथ जारी युद्ध से जूझ रहे यूक्रेन के लिए यह गर्मी नई मुसीबत बन गई है। युद्ध में देश के कई थर्मल और हाइड्रो पावर प्लांट पहले ही क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। अब भीषण गर्मी की वजह से बचे हुए बिजली ग्रिड पर भी भारी दबाव पड़ रहा है। हालात संभालने के लिए कई इलाकों में इमरजेंसी बिजली कटौती शुरू कर दी गई है।
5 प्रांतों में लंबे ब्लैकआउट की चेतावनी
यूक्रेन के रिव्ने समेत 5 प्रमुख प्रांतों में उद्योगों और घरों के लिए लंबे बिजली कटौती की चेतावनी जारी की गई है। ऊर्जा कंपनी यास्नो (Yasno) के प्रमुख सर्गेई कोवालेंको ने कहा कि पिछले चार साल से युद्ध के बीच किसी तरह चल रहे बिजली उपकरणों के लिए यह गर्मी सबसे कठिन परीक्षा साबित हो रही है।
40 से 42 डिग्री तक पहुंचा तापमान, WHO ने बताया 'साइलेंट किलर'
यूरोप के कई देशों में रिकॉर्ड तापमान दर्ज किया गया है। पोलैंड में 40.5°C, जर्मनी में 41.7°C और चेक रिपब्लिक में 41.9°C तापमान रिकॉर्ड किया गया। WHO प्रमुख ने इस गर्मी को "साइलेंट किलर" बताया है क्योंकि यूरोप के ज्यादातर घरों और स्कूलों में एयर कंडीशनिंग की व्यवस्था नहीं है। ऐसे में लोग लंबे समय तक गर्मी से बच नहीं पा रहे हैं।
जलवायु परिवर्तन का बड़ा संकेत
यूरोप की यह भीषण गर्मी साफ संकेत देती है कि जलवायु परिवर्तन अब भविष्य की नहीं बल्कि आज की सबसे बड़ी चुनौती बन चुका है। अस्पतालों पर बढ़ता दबाव, पिघलता इंफ्रास्ट्रक्चर, बिजली संकट और बढ़ती मौतें दिखाती हैं कि विकसित देश भी इस खतरे से अछूते नहीं हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर पर्यावरण संरक्षण के लिए जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले सालों में ऐसे संकट और भी गंभीर हो सकते हैं।
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