'हम पाकिस्तान का हिस्सा नहीं', आर्मी ने रोकी PoK में खाने की सप्लाई, मुनीर के खिलाफ फूटा गुस्सा- Video
PoK Protest: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में चल रहे विरोध-प्रदर्शन अब पहले से ज्यादा गंभीर हो गए हैं। रावलाकोट के ऐतिहासिक ईदगाह मैदान में हजारों लोग एक बड़ी सभा में जुटे। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने इस्लामाबाद के कंट्रोल को खुली चुनौती दी। लोगों ने साफ कहा कि यह पूरा रणनीतिक इलाका किसी भी तरह से पाकिस्तान का हिस्सा नहीं है। इस बयान ने आंदोलन को एक नया राजनीतिक मोड़ दे दिया है।
PoK का खाना किया बंद, सरकार के खिलाफ उतरे कश्मीरी
बुनियादी राशन और खाने की आपूर्ति रुकने से लोगों का गुस्सा लगातार बढ़ रहा है। प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तान सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर जरूरी सामान की सप्लाई इसी तरह रोकी गई, तो वे अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए कंट्रोल रेखा (LoC) के पार दूसरे रास्तों की तलाश करेंगे। उनका कहना है कि भूख और जरूरी सामान की कमी के बीच उनके पास दूसरा कोई विकल्प नहीं बचेगा।

आर्थिक संकट और भारी टैक्स बना आंदोलन की बड़ी वजह
PoK में चल रहे इस बड़े आंदोलन के पीछे कई वजहें हैं। लोगों का कहना है कि क्षेत्र में गंभीर आर्थिक संकट है, महंगाई लगातार बढ़ रही है, भारी टैक्स वसूले जा रहे हैं और नागरिकों के बुनियादी अधिकारों की अनदेखी की जा रही है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस्लामाबाद उनके इलाके के प्राकृतिक जल संसाधनों का पूरा इस्तेमाल करता है, लेकिन बदले में यहां रहने वाले लोगों को सस्ती बिजली तक नहीं मिलती। उल्टा उन पर ज्यादा टैक्स लगाया जा रहा है, जिससे लोगों में नाराजगी लगातार बढ़ती जा रही है।
अवामी एक्शन कमेटी पर प्रतिबंध के बाद भी आंदोलन जारी
इस आंदोलन की अगुवाई जम्मू कश्मीर अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) नाम का एक नागरिक संगठन कर रहा है। संगठन की बढ़ती लोकप्रियता और प्रभाव को देखते हुए पाकिस्तान सरकार ने उस पर आतंकवाद विरोधी कानूनों के तहत पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया है। हालांकि, इस सरकारी कार्रवाई के बावजूद हजारों लोग आंदोलन में लगातार शामिल हो रहे हैं और प्रदर्शन रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं।
नेताओं पर आतंकवाद के केस, भड़के लोग
प्रदर्शन को रोकने के लिए प्रशासन ने सरदार अमान खान और अवामी एक्शन कमेटी के कई वरिष्ठ नेताओं के खिलाफ आतंकवाद निरोधी कानूनों के तहत गंभीर मामले दर्ज किए हैं। पाकिस्तान की संघीय एजेंसियां इन नेताओं और कार्यकर्ताओं को सुरक्षा के लिए खतरा मान रही हैं। वहीं स्थानीय लोगों का कहना है कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने वालों पर आतंकवाद के केस लगाना गलत है। इससे खासकर युवाओं और सुरक्षा बलों के बीच भरोसे की कमी और ज्यादा बढ़ गई है।
ख्वाजा आसिफ के बयान से और भड़का विवाद
इसी बीच पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के एक बयान ने हालात को और तनावपूर्ण बना दिया। उन्होंने कहा कि रावलाकोट और मीरपुर में रहने वाले लोग 'असली कश्मीरी' नहीं हैं। उनके इस बयान की पूरे इलाके में तीखी आलोचना हो रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस बयान ने उनकी पहचान और सम्मान पर सीधा हमला किया है।
स्थानीय नेताओं ने दिया करारा जवाब
ख्वाजा आसिफ के बयान के बाद स्थानीय नेताओं ने भी खुलकर जवाब दिया। उनका कहना है कि उन्हें पाकिस्तान सरकार की किसी तरह की खैरात नहीं चाहिए। नेताओं का दावा है कि असल में पाकिस्तान अपनी बिजली और दूसरे प्राकृतिक संसाधनों की जरूरतों के लिए इसी पहाड़ी इलाके पर निर्भर है। उनका कहना है कि अब यह लड़ाई सिर्फ महंगाई और आर्थिक समस्याओं की नहीं, बल्कि सम्मान और राजनीतिक पहचान की भी बन चुकी है।
इंटरनेट बंद होने से लोगों की मुश्किलें बढ़ीं
आंदोलन की तस्वीरें और वीडियो बाहर न जा सकें, इसके लिए पाकिस्तान प्रशासन ने जून की शुरुआत से ही कई इलाकों में इंटरनेट और मोबाइल नेटवर्क सेवाओं पर प्रतिबंध लगा रखा है। इस संचार ब्लैकआउट की वजह से छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है, व्यापारियों का काम ठप पड़ रहा है और मरीजों को इलाज के लिए भी परेशानी झेलनी पड़ रही है। लोगों का कहना है कि इससे उनके बुनियादी और मानवीय अधिकार प्रभावित हो रहे हैं।
महंगाई के विरोध से शुरू हुआ आंदोलन अब राजनीतिक लड़ाई बना
जो आंदोलन शुरुआत में महंगाई, सब्सिडी और जरूरी सुविधाओं की मांग को लेकर शुरू हुआ था, वह अब राजनीतिक अधिकार, सम्मान और पहचान की लड़ाई बन चुका है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि ताकत के दम पर लोगों की आवाज दबाने की कोशिश की जा रही है, लेकिन इससे हालात और खराब हो रहे हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि मौजूदा स्थिति यह दिखाती है कि इस इलाके पर इस्लामाबाद का प्रशासनिक नियंत्रण पहले के मुकाबले काफी कमजोर पड़ता नजर आ रहा है।
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