Pakistan गुरु नानक की जन्मस्थली के पास 125 साल पुराना गुरुद्वारे पर चलाया बुलडोजर, किसके इशारे पर हुआ हमला?

Pakistan Gurudwara Demolish: पाकिस्तान की शहबाज शरीफ सरकार ने कृष्ण गली और राम गली का जो दिखावा किया था अब उसका असली मकसद अब बाहर आने लगा है। दरअसल धर्म निर्पेक्षता की आड़ में अब शरीफ सरकार अपने असली मंसूबे पर उतर आई है। जहां ताजा मामला पाकिस्तान के पंजाब प्रांत से आया है। यहां के शेखूपुरा जिले के फारूकाबाद स्थित करीब 125 साल पुरानी ऐतिहासिक धरोहर, 'गुरुद्वारा सिंह सभा' (Gurudwara Sabha Singh) को असामाजिक तत्वों और भू-माफियाओं ने मिलकर नेस्तनाबूद कर दिया है। सदियों पुरानी इस ऐतिहासिक इमारत को जमींदोज किए जाने की घटना के बाद से पूरी दुनिया में बसे सिख समुदाय में भारी आक्रोश और निराशा का माहौल है।

स्थानीय सूत्रों और मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, यह बेहद संवेदनशील घटना 24 जून की रात को अंजाम दी गई। अंधेरे का फायदा उठाकर कुछ शरारती तत्वों ने इस ऐतिहासिक ढांचे को पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया। घटना वाले दिन स्थानीय लोगों ने इसकी जानकारी प्रशासन को देने का प्रयास भी किया था, लेकिन जब तक कोई ठोस कार्रवाई होती, तब तक सदियों पुराना यह इतिहास मलबे के ढेर में तब्दील हो चुका था।

Ruins of the historic Gurdwara Singh Sabha in Pakistan

सिंह सभा आंदोलन और गुरुद्वारे का इतिहास

यह ऐतिहासिक गुरुद्वारा केवल ईंट और गारे का ढांचा नहीं था, बल्कि इसका नाता सिख इतिहास के एक बेहद गौरवशाली और क्रांतिकारी दौर से जुड़ा था। यह स्थान सिख धर्म में सुधार और नई चेतना जगाने वाले 'सिंह सभा आंदोलन' (Singh Sabha Movement) के समय का साक्षी था। इस आंदोलन ने 19वीं सदी के आखिर में सिख धर्मग्रंथों की मर्यादा बहाल करने, सामाजिक कुरीतियों को मिटाने और शिक्षा का उजाला फैलाने में केंद्रीय भूमिका निभाई थी।

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फारूकाबाद को पहले ऐतिहासिक रूप से 'चुहड़काना' के नाम से जाना जाता था। यह क्षेत्र सिखों के पहले गुरु, श्री गुरु नानक देव जी की जन्मस्थली ननकाना साहिब के बेहद करीब स्थित होने के कारण हमेशा से सिख श्रद्धालुओं और इतिहासकारों के लिए पूजनीय रहा है। विभाजन के बाद यहां सिखों की आबादी भले ही कम हो गई हो, लेकिन इस गुरुद्वारे की भव्य वास्तुकला और दीवारों पर उकेरे गए भित्तिचित्र इतिहास के एक गौरवशाली अध्याय को बयां करते थे।

सरकार और प्रशासन का क्या रोल है?

घटना के बाद पाकिस्तान के सिख प्रतिनिधियों ने स्थानीय पुलिस प्रशासन और 'इवेक्यूई ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड' (ETPB) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। यह संस्था पाकिस्तान में अल्पसंख्यक समुदायों के धार्मिक स्थलों और उनकी खाली पड़ी संपत्तियों की देखरेख के लिए जिम्मेदार है। सिख नेताओं का आरोप है कि शिकायत के बावजूद अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया, जिससे असामाजिक तत्वों को मनमानी करने का खुला मौका मिल गया। इसमें सरकार और प्रशासन दोनों की चुप्पी भी शामिल है।

वहां रह रहे सिख समुदाय के प्रतिनिधियों का कहना है कि यह कोई पहली या अकेली घटना नहीं है। इससे पहले भी पाकिस्तान के विभिन्न हिस्सों, विशेषकर खैबर पख्तूनख्वा और पंजाब प्रांत के आंतरिक इलाकों में स्थित ऐतिहासिक महत्व के गुरुद्वारों और मंदिरों को निशाना किया जाता रहा है। कई बार स्थानीय भू-माफिया इन ऐतिहासिक इमारतों की जमीनों पर अवैध कब्जा करने के लिए जानबूझकर इन्हें खंडहर में बदलने या ध्वस्त करने की साजिश रचते रहते हैं।

वैश्विक सिख भयंकर नाराजगी

इस वीभत्स घटना की गूंज भारत सहित दुनिया भर के सिख संगठनों में सुनाई दे रही है। अमृतसर स्थित शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) और कई अन्य प्रमुख संस्थाओं ने इस घटना की कड़े शब्दों में निंदा की है। सिख जगत का कहना है कि ऐतिहासिक धरोहरों को इस तरह सुनियोजित तरीके से नष्ट किया जाना न केवल धार्मिक भावनाओं को आहत करता है, बल्कि यह पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर भी एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा करता है।

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धरोहर विश्लेषकों का भी मानना है कि जब किसी देश में ऐसी प्राचीन और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध इमारतों को नष्ट किया जाता है, तो वह केवल एक धर्म का नुकसान नहीं होता, बल्कि वह पूरे विश्व की साझी विरासत का ऐसा नुकसान है जिसे कभी पूरा नहीं किया जा सकता। पाकिस्तान में ऐसी सैकड़ों संपत्तियां हैं, जो दशकों से प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार हैं और अब वे धीरे-धीरे भू-माफियाओं के चंगुल में फंसकर अपना अस्तित्व खो रही हैं।

इंटरनेशनल लेवल पर हो रहा विरोध

इस घटना ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय बिरादरी और यूनेस्को (UNESCO) जैसी संस्थाओं का ध्यान इस ओर खींचा है कि वे दक्षिण एशिया में मौजूद अल्पसंख्यक धार्मिक विरासतों के संरक्षण के लिए कड़े कदम उठाएं। जब तक ऐतिहासिक स्थलों के संरक्षण के लिए सख्त कानून नहीं बनाए जाएंगे और दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा नहीं दी जाएगी, तब तक ऐसी घटनाओं पर रोक लगाना नामुमकिन होगा।

इस खबर पर आपकी क्या राय है, हमें कमेंट में बताएं।

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