Meloni से लेकर Modi तक, ट्रंप ने किस-किस से बिगाड़े रिश्ते? दूसरे कार्यकाल में कितनों से झगड़े?- Timeline
Trump Vs World: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के बीच तब से बहस छिड़ गई है जब से ट्रंप ने बयान दिया कि इटली की पीएम मेरे साथ फोटो खिंचवाने की विनती कर रही थी। जिसके बाद इटली की प्रधानमंत्री ने उन्हें खरी-खरी सुनाते हुए जवाब दिया। यह पहला मामला नहीं जब ट्रंप ने किसी राष्ट्राध्यक्ष के खिलाफ ऊट-पटांग बात कहकर उसे नीचा दिखाने की कोशिश की हो। ट्रंप के इसी व्यवहार के चलते ट्रंप के कई देशों के राष्ट्राध्यक्षों से रिश्ते नाजुक हो गए। जिनमें से कुछ तो उनसे मिलना तक नहीं चाहते। आइए जानते हैं कि ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल में किस-किस नेता से विवाद मोल लिया।
फरवरी 2025: जेलेंस्की के साथ ओवल ऑफिस विवाद
फरवरी 2025 में यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की की व्हाइट हाउस यात्रा के दौरान हुई तीखी बहस पूरी दुनिया में सुर्खियां बनी। ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से यूक्रेन से युद्ध समाप्त करने के लिए अधिक लचीला रुख अपनाने की बात कही, जबकि जेलेंस्की ने रूस पर भरोसा करने से इनकार किया। इस घटनाक्रम ने अमेरिका-यूक्रेन संबंधों में अस्थायी तनाव पैदा कर दिया और यूरोपीय देशों ने भी चिंता जताई। बाद के महीनों में दोनों पक्षों ने संवाद जारी रखा, लेकिन यह ट्रंप के दूसरे कार्यकाल का पहला बड़ा कूटनीतिक विवाद बन गया।

मार्च-अप्रैल 2025: पुतिन पर बदला रुख
शुरुआत में ट्रंप ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ बातचीत के जरिए युद्ध समाप्त करने की बात कही, लेकिन जब सीजफायर की कोशिशों में प्रगति नहीं हुई तो उन्होंने सार्वजनिक रूप से रूस पर प्रतिबंधों की चेतावनी भी दी। इस बदलते रुख ने यह संकेत दिया कि ट्रंप की मॉस्को नीति पहले की तुलना में अधिक अनिश्चित हो सकती है।
मई 2025: ग्रीनलैंड विवाद
डेनमार्क के साथ ट्रंप का सबसे बड़ा टकराव ग्रीनलैंड को लेकर सामने आया। ट्रंप ने एक बार फिर ग्रीनलैंड को अमेरिका के लिए रणनीतिक रूप से जरूरी बताते हुए इसे हासिल करने की इच्छा दोहराई। डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन ने साफ कहा कि ग्रीनलैंड बिकाऊ नहीं है और उसकी संप्रभुता पर कोई समझौता नहीं होगा। इस बयानबाजी से दोनों देशों के बीच सार्वजनिक तनाव बढ़ गया। हालात यहां तक पहुंच गए कि ग्रीनलैंड ने अपने पहले गोली न चलाने के कानून को ही बदल लिया। आसान भाषा में कहें तो बंदूक निकल आई थी बस चलना बाकी थी।
ब्राजील: लूला दा सिल्वा से जुबानी जंग
ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज़ इनासियो लूला दा सिल्वा और ट्रंप के बीच व्यापार, टैरिफ और ब्राजील की आंतरिक राजनीतिक-न्यायिक प्रक्रियाओं को लेकर बयानबाजी हुई। दोनों नेताओं ने एक-दूसरे की नीतियों की सार्वजनिक आलोचना की, जिससे द्विपक्षीय संबंधों में राजनीतिक तनाव बढ़ा, हालांकि औपचारिक राजनयिक संवाद जारी रहा।
जून 2025: यूरोपीय सहयोगियों से मतभेद
जी-7 और नाटो बैठकों के दौरान ट्रंप ने यूरोपीय देशों से रक्षा खर्च बढ़ाने, व्यापार असंतुलन और प्रवासन नीति पर तीखी टिप्पणियां कीं। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ ने कई मुद्दों पर अलग रुख अपनाया। हालांकि दोनों पक्षों ने संवाद जारी रखा, लेकिन सार्वजनिक मतभेद स्पष्ट दिखाई दिए।
वेनेजुएला: मादुरो सरकार पर लगातार हमले
ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल में भी वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की सरकार को लगातार निशाने पर रखा। उन्होंने लोकतंत्र, चुनाव और प्रतिबंधों को लेकर कई सख्त बयान दिए, जिससे दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद टकराव और गहरा हुआ।
20 जनवरी 2026- फ्रांस से खटास
वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गनाइजेशन की सालाना बैठक में ट्रंप को जवाब देते हुए फ्रांस के राष्ट्रपति ने नीला चश्मा लगाकर तीखा भाषण दिया था। मैक्रों ने बिना नाम लिए डोनाल्ड ट्रंप की ग्रीनलैंड नीति और यूरोप पर टैरिफ की धमकियों को "अस्वीकार्य" बताया और कहा कि फ्रांस "धौंस जमाने वालों" के आगे नहीं झुकेगा। अगले दिन, 21 जनवरी 2026 को ट्रंप ने अपने दावोस संबोधन में मैक्रों के चश्मे का मजाक उड़ाते हुए कहा, "Those beautiful sunglasses... what the hell happened?" यह विवाद दोनों नेताओं के बीच बढ़ते सार्वजनिक टकराव का प्रतीक बन गया था।
जून 2026: जॉर्जिया मेलोनी से सार्वजनिक टकराव
जी-7 शिखर सम्मेलन के बाद ट्रंप ने दावा किया कि इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने उनके साथ फोटो खिंचवाने के लिए बार-बार अनुरोध किया था और उनकी लोकप्रियता घट रही है। मेलोनी ने इन दावों को पूरी तरह झूठा बताया और कहा कि इटली किसी भी विदेशी नेता के सामने नहीं झुकेगा। विवाद इतना बढ़ा कि इटली के विदेश मंत्री ने अपनी प्रस्तावित अमेरिका यात्रा रद्द कर दी। इसे दोनों देशों के बीच दुर्लभ सार्वजनिक कूटनीतिक तनाव माना गया।
भारत के साथ भी ठीक नहीं रहा व्यवहार
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर ट्रंप ने समय-समय पर व्यापार, भारत-पाकिस्तान तनाव और मध्यस्थता जैसे मुद्दों पर ऐसे बयान दिए, जिन पर नई दिल्ली ने सार्वजनिक रूप से असहमति जताई या चुप्पी बनाए रखी। इसके बावजूद दोनों देशों ने डिफेंस, टेक्नोलॉजी और इंडो-पैसिफिक सहयोग को आगे बढ़ाया। यानी बयानबाजी के बावजूद रणनीतिक साझेदारी कमजोर नहीं पड़ी। हालांकि कई मौकों पर रिश्ते नाजुक मोड़ पर जरूर पहुंच गए थे जब प्रधानमंत्री मोदी ने उनसे मिलने से किनारा कर लिया था।
क्या है ट्रंप के ऐसे कामों का भविष्य?
ट्रंप के दूसरे कार्यकाल ने यह दिखाया है कि आधुनिक कूटनीति में सोशल मीडिया पोस्ट और सार्वजनिक बयान भी उतने ही प्रभावशाली हो सकते हैं जितनी औपचारिक बैठकों की भाषा। यूक्रेन, इटली, डेनमार्क, ब्राजील और यूरोपीय सहयोगियों के साथ कई बार सार्वजनिक तनाव देखने को मिला। हालांकि अधिकांश मामलों में संवाद पूरी तरह नहीं टूटा, लेकिन ट्रंप की बयान शैली ने अमेरिकी कूटनीति को अधिक व्यक्तिगत, अप्रत्याशित और तनावपूर्ण बना दिया।
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